चूड़ी बेचने वाली मां के बेटे ने JPSC में लहराया परचम, हासिल की 80वीं रैंक

नई दिल्ली, 2 मई। वर्ष 2019 में दानिश को रेलवे में नौकरी के लिए भी चुना गया लेकिन अपने जीवन में कुछ बड़ा करने की जिद थी। उन्होंने इस नौकरी को ज्वाइन नहीं किया। और तीन साल बाद उन्हें अपना मुकाम मिला। हलांकि इस बीच दानिश ने अपने परिवार की आर्थिक तंगी अपने प्रयासों पर हावी नहीं होने दी। उनकी मां भी बेटे के सपने को पूरा करने के लिए दिन रात एक करती रही। दानिश जैसे बिरले संघर्ष के उदारहण हमें देखने के मिलते हैं जो वर्तमान में युवाओं के लिए एक मिशाल हैं।

Danish with his family

मां जरीना खातून का इस बात की हमेशा फिक्र रहती थी कि आर्थिक तंगी बेटे दानिश की पढ़ाई पर कहीं हावी ना हो जाए। इसके लिए जरीना सिर पर चूडडी भरी टोकरी लिए में गली-गली चूड़ियां बेचा करती हैं। वहीं दानिश हजारीबाग में रहकर जेपीएससी की तैयारी कर रहे थे। दानिश ने कहा कि जीवन में कुछ करने का जज्बा हो तो सफलता जरूर मिलती है।

दानिश शुरुआत से ही पढ़ाई में अव्वल रहे। उन्होंने 10वीं में 73% और 12वीं की परीक्षा में 76% अंक हासिल किए। जेपीएससी में चयन होने पर दानिश अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां के साथ-साथ अपने स्कूल और कॉलेज के शिक्षकों को देते हैं। वहीं उनकी मां जरीना खातू ने कहा कि बेटे ने मेरे सपनों को पूरा किया है। हम सभी को दानिश पर गर्व है। यह सब दानिश की कड़ी मेहनत परिणाम है।

दानिश हुसैन झारखंड के रामगढ़ जिले के निवासी हैं।उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता जाहुदी अंसारी की मौत हो चुकी है। परिवार के खर्च का बोझ दानिश की मां जरीना खातून पर था। वे चूड़ियां बेचकर घर चलाती हैं।

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