इलाज के लिए भीख मांगने राजोरी पहुंची सोनिया गांधी
अमित शर्मा (जम्मू)। मुकद्दर इंसान को कहां-कहां नहीं ले जाता है। इसका एक जीता जागता उदाहरण जम्मू के राजोरी जिले में देखने को मिला। जहां पर सोनिया गांधी अपने माता-पिता के इलाज के लिए भीख मांग रही है। जी हां चैकिये नहीं ये वो यूपीए की अध्यक्ष सोनिया नहीं, बल्कि राजस्थान प्रांत के जोधपुर जिले की रहने वाली एक छोटी सी लड़की है। सोनिया गांधी की दर्द भरी दास्तां पढ़ने के बाद आप की आंखें भी भर आयेंगी।

जोधपुर की सोनिया गांधी की कहानी
मुकद्दर ही इंसान को फलक पर भी बैठाता है और मुकद्दर ही इंसान को सड़कों पर भीख मंगवता है। अगर ऐसा न होता तो एक सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष न होती और दूसरी सोनिया गाँधी अपने बीमार माता-पिता के इलाज के खातिर सड़कों पर भीख मांगती नजर नहीं आती। मुकद्दर ने इस सोनिया गांधी के साथ ऐसा मजाक किया कि नाम तो इसे सोनिया गांधी का दे दिया लेकिन किस्मत में लिख दी दरबरदर की ठोकरें। डाक्टर बनने का सपने देखने वाली इस सोनिया गांधी ने यह कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उसे अपने माता-पिता के बीमार होने पर परिवार का पेट पालने के लिए सड़कों पर इस तरह भीख मांगनी पड़ेगी।

स्कूल देखा तक नहीं
10 साल छोटी सी मासूम बच्ची ने स्कूल तो देखी लेकिन वह स्कूल केवल पहली ही सीढ़ी चढ़ पाई थी कि मुकद्दर ने एक बार फिर करवट बदली और इसके पिता को बिस्तर पर लिटा दिया और उसे स्कूल से निकाल कर सड़कों पर पहुंचा दिया और आज यह मासूम बच्ची अपने बीमार पिता और मानसिक तौर पर बीमार माँ के साथ-साथ अपनी छोटी बहन का भी पेट पाल रही है।

यूं तो सरकार बाल मज़दूरी और एसे बच्चों की शिक्षा के बड़े-बड़े दावों को करती है लेकिन जमीनी सतह पर सरकार के सब दावे खोखले नजर आते हैं। वहीं लोगों का कहना है कि सरकार को ऐसे विशयों को गंभीरता से लेना चाहिए।
मुकद्दर की मारी यह सोनिया गांधी राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली है और मुकद्दर से लड़ते-लड़ते वह हिमाचल से होते हुए राजोरी की गलियों तक आ पहुंची है और देखना यह है कि मुकद्दर इसे और कहां ले जाता है।












Click it and Unblock the Notifications