J&K Polls: कांग्रेस की उम्मीदों को लग सकता है झटका! PDP-NC से पहले AAP देने लगी रेड सिंग्नल
Jammu Kashmir Chunav: जम्मू-कश्मीर में एक दशक बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इन 10 वर्षों में राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से उलट-पुट हो चुके है। कांग्रेस की ओर से पूरा जोर लगाया जा रहा है कि विपक्षी पार्टियां गठबंधन के तहत चुनाव लड़े। क्योंकि, इंडिया ब्लॉक में टूट की वजह से लोकसभा चुनावों में यहां उसे फिर से मुंह की खानी पड़ चुकी है।
जम्मू-कश्मीर में इस बार चुनाव परिसीमन के बाद हो रहा है और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो चुकी हैं। लोकसभा चुनावों के परिणामों को आधार मानें तो नेशनल कांफ्रेंस और बीजेपी इस केंद्र शासित प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका में हैं।

क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करना चाहती है कांग्रेस
राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और आम आदमी पार्टी सभी विपक्षी इंडिया ब्लॉक की हिस्सा हैं। कांग्रेस चाहती है कि बीजेपी की चुनौती से मुकाबले के लिए सभी दलों को गठबंधन में चुनाव लड़ना चाहिए। इसी सिलसिले में पार्टी सांसद राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दो दिन तक यहां डेरा भी डालने वाले हैं।
सोमवार को जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा था कि पार्टी 'सम्मानजनक गठबंधन' पर बातचीत करने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कह दिया था कि इस चुनाव में गठबंधन के लिए मापदंड या सीटों का फॉर्मूला लोकसभा चुनावों से अलग होगा। वैसे कर्रा ने यह भी दावा किया है कि इस बार पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस दोनों ने ही कांग्रेस से गठबंधन के लिए संपर्क किया है।
अपने दम पर चुनाव लड़ेगी AAP- इमरान हुसैन
लेकिन, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने कह दिया है कि वह यह चुनाव अपनी पूरी ताकत से लड़ेगी। बुधवार को जम्मू-कश्मीर में आम आदमी पार्टी के नेता इमरान हुसैन ने बताया है कि पार्टी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
जम्मू-कश्मीर के लोग एक बार हमें मौका दें- AAP नेता
उन्होंने कहा, 'जम्मू और कश्मीर में आम आदमी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। मैं लोगों से अपील करता हूं कि उन्होंने सभी पार्टियों को मौका दिया है, इस बार उन्हें आम आदमी पार्टी को एक चांस देना चाहिए।' इमरान ने इस दौरान इंडिया ब्लॉक या अन्य किसी गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं की है।
लोकसभा चुनावों में निराश हुआ इंडिया ब्लॉक
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने यहां पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को साथ लाने की पूरजोर कोशिश की थी। लेकिन, फारूक अब्दुल्ला की पार्टी कश्मीर घाटी की अपनी तीनों जीती हुई सीटें छोड़ने के लिए राजी नहीं हुई। इसका परिणाम ये हुआ कि गठबंधन नहीं हो पाया। पीडीपी ने कश्मीर की तीनों सीटों पर उम्मीदवार उतारे और जम्मू की दोनों सीटें पहले की तरह कांग्रेस लिए खाली छोड़ दी गई।
कांग्रेस-पीडीपी का खाता भी नहीं खुला
इस लोकसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस को यहां की 5 लोकसभा सीटों में से 2 ही सीटें मिलीं और जम्मू की 2 सीटें लगातार तीसरी बार भी बीजेपी ने जीत ली। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई है, जहां इंजीनियर राशिद ने नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को हराया है। पीडीपी और कांग्रेस का एक बार फिर से खाता तक नहीं खुल पाया।
2014 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में कुल 87 सीटों में से पीडीपी को 28, बीजेपी को 25, नेशनल कांफ्रेंस को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। चुनाव के बाद पीडीपी और बीजेपी ने गठबंधन किया था और महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनी थीं।












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