J&K Election: जम्मू और कश्मीर के लिए अलग-अलग रणनीति! घाटी में जीत के लिए क्या है बीजेपी की खास प्लानिंग?

Jammu Kashmir Chunav: भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए बहुत ही बड़ी रणनीति तैयार की है। जिस तरह से परिसीमन के बाद जम्मू इलाके में सीटें बढ़ी हैं, भाजपा का अपनी दम पर सरकार बनाने का हौसला भी बढ़ा है। लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि वह कश्मीर घाटी में भी चुनाव जीते।

परिसीमन के बाद जम्मू और कश्मीर में विधानसभा की कुल सीटें 114 हो गई हैं। इनमें से 24 सीटें पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लिए सुरक्षित रखी गई हैं। बाकी 90 सीटों पर 18 और 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को तीन चरणों में चुनाव करवाए जाने हैं, जिसमें बहुमत के लिए 46 सीटें जरूरी हैं।

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जम्मू-कश्मीर में अपनी सरकार बनाने के लिए घाटी में जीत जरूरी
अब कश्मीर डिविजन में 47 और जम्मू डिविजन में 43 सीटें हो गई हैं। 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की कुल सीटों की संख्या मात्र 87 ही थी। हाल में जो लोकसभा चुनाव हुए हैं, उसमें फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस को 90 में से 34 सीटों पर बढ़त मिली थी और बीजेपी 29 विधानसभा सीटों पर आगे रही थी।

कश्मीर घाटी में खास रणनीति के तहत चुनाव लड़ेगी बीजेपी
लोकसभा चुनावों में भाजपा ने कश्मीर की तीन सीटों में से एक पर भी अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। वह सिर्फ जम्मू की दोनों सीटों पर ही चुनाव लड़ी और लगातार तीसरी बार दोनों पर ही कामयाबी दर्ज की। लेकिन, विधानसभा चुनाव में बीजेपी घाटी में भी चुनाव लड़ेगी और इसके लिए बहुत ही सोची-समझी योजना पर काम कर रही है।

भाजपा की योजना है कि कश्मीर घाटी में वह कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ तालमेल करे। इसके साथ ही पार्टी चाहती है कि वह ज्यादातर युवा उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारे और वह भी ऐसे युवा हों, जो किसी भी सियासी परिवार से ताल्लुक न रखते हों। हाल ही में इसको लेकर जम्मू में पार्टी की एक बैठक में वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, उधमपुर से सांसद और पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और पार्टी महासचिव तरुण चुग ने हिस्सा लिया है।

कश्मीर मिशन को लेकर भाजपा को मिली पहली सफलता!
बीजेपी को घाटी फतह की योजना के तहत चुनाव से पहले एक सफलता यह मिली है कि 'अपनी पार्टी' के संस्थापक सदस्य चौधरी जु्ल्फकार अली ने रविवार को औपचारिक तौर पर भाजपा ज्वाइन कर ली है। रेड्डी, सिंह और चुग की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल होने से पहले जgल्फकार ने शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

कश्मीर में अपनी पार्टी को भाजपा का सहयोगी ही माना जाता है और पार्टी में शामिल होने के बाद चौधरी ने कहा है कि उन्होंने अनुसूचित जनजातियों और राजौरी-पुंछ क्षेत्र के विकास और कल्याण के लिए बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है।

कश्मीर में बीजेपी को इन कदमों से फायदा मिलने की उम्मीद
बीजेपी को उम्मीद है कि आर्टिकल 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जो भी कदम उठाए हैं, उसका फायदा पार्टी को विधानसभा चुनावों में मिल सकता है। पार्टी के प्रभारी महासचिव चुग ने ईटी को बताया है, 'आर्टिकल 370 हटने के बाद गुज्जर बकरवालों, अनुसूचित जातियों, पश्चिम पाकिस्तान से आए शरणार्थियों और महिलाओं को अधिकार मिले हैं। एम्स की शुरुआत, कश्मीर में ट्रेन पहुंचने जैसे अन्य अनेकों पहल से जम्मू और कश्मीर में विकास का एक नया युग शुरू हुआ है।'

जम्मू में अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी बीजेपी,कश्मीर में निर्दलीयों को लेगी साथ
वहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने साफ किया है कि बीजेपी यहां किसी भी दल के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन नहीं करेगी। लेकिन, कश्मीर में निर्दलीय उम्मीदवारों से तालमेल पर जरूर विचार करेगी। उन्होंने कहा, 'जम्मू और कश्मीर में बीजेपी किसी भी राजनीतिक दल के साथ चुनाव-पूर्ण गठबंधन नहीं करेगी....कश्मीर घाटी में हम 8 से 10 निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ बात कर रहे हैं।'

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