Jammu Kashmir Chunav: अभी नहीं, तो कभी नहीं! क्या कश्मीर को मिलेगा पहला हिंदू मुख्यमंत्री?

Jammu Kashmir Chunav 2024: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना देख रही है। अंतिम चरण में जिन 40 सीटों पर मतदान हो रहा, उनमें से 24 सीटें सिर्फ जम्मू डिविजन में हैं। ऐसे में इलाके के कुछ बीजेपी उम्मीदवार पार्टी को इसलिए जिताने की अपील कर रहे हैं, ताकि प्रदेश को पहला हिंदू और वह भी डोगरा समुदाय का मुख्यमंत्री मिल सके।

दरअसल, बीते दीनों जम्मू उत्तर विधानसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष शाम लाल शर्मा ने जम्मू इलाकों के मतदाताओं से अपील की कि 1 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को वोट करें ताकि केंद्र शासित प्रदेश को पहला हिंदू डोगरा समाज का सीएम मिल जाए।

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'या तो अभी या फिर कभी नहीं'
पिछले हफ्ते डोमाना इलाके में एक चुनाव सभा में बीजेपी उम्मीदवार शर्मा ने कहा, 'जम्मू और कश्मीर में डोगरा हिंदू को मुख्यमंत्री बनाने का समय आ गया है, या तो अभी या फिर कभी नहीं....बहुत ही कम आबादी के बावजूद अगर महाराष्ट्र में एक मुस्लिम सीएम हो सकता है तो जम्मू और कश्मीर में एक हिंदू सीएम क्यों नहीं हो सकता? हमारी यहां 32% जनसंख्या है।'

बता दें कि मुस्लिम नेता एआर अंतुले भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जबकि, 2011 की जनगणना के हिसाब से महाराष्ट्र में मुसलमानों की जनसंख्या 12% से भी कम है।

जम्मू के वोटरों से हिंदू को सीएम बनाने की क्यों हो रही है अपील?
परिसीमन के बाद जम्मू में विधानसभा की 43 सीटें हो चुकी हैं, जिनमें से आधी से ज्यादा यानी 24 सीटों पर अंतिम चरण में वोटिंग हो रही है। जम्मू ही भाजपा का गढ़ है और इस तरह की अपील से लगता है कि पार्टी हिंदू मतदाताओं को गोलबंद करना चाहती है, ताकि यहां की अधिकतर सीटें जीत सके। क्योंकि, जम्मू में जितनी सीटें भाजपा के हक में आएंगी, उसकी संभावना उतनी ही बेहतर होगी।

2011 की जनगणना के अनुसार पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर राज्य में मुसलमानों की आबादी 68.8% थी और हिंदू 28.8% थे, जो कि अब अधिकतर जम्मू डिविजन में ही रह गए हैं। जहां तक डोगरा समाज के नेता को सीएम बनाने की अपील की गई है तो इसके पीछे वह यादें हैं, जब जम्मू और कश्मीर देसी रियासतों में शामिल था और 1846 से लेकर 1947 तक यहां डोगरा शासकों का राज था।

कश्मीर की 47 सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला
एक बात और है। जम्मू कश्मीर की 90 सीटों में 47 सीटें कश्मीर डिविजन में हैं। वहां बीजेपी आज भी पहली सीट जीतने के लिए भी संघर्ष कर रही है। लेकिन, उसके लिए राहत की उम्मीद इस बात में है कि वहां इस बार इतना बहुकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है कि किसी भी दल या गठबंधन को अकेले बढ़त मिलने की स्थिति नहीं है और खंडित जनादेश के ही अनुमान लगाए जा रहे हैं।

ऐसे में अगर जम्मू की अधिकतर सीटें जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनती है और उसे सरकार बनाने का मौका मिलता है तो उसके नेताओं को लगता है कि हिंदू सीएम बनना तय है।

वैसे भी बीते कई विधानसभा चुनावों के नतीजे यही बताते हैं कि कश्मीर घाटी केंद्रित किसी भी क्षेत्रीय दल के अकेले बहुमत में आने की संभावना मुश्किल है।

जम्मू डिविजन में बीजेपी सबसे ज्यादा प्रभावी
जबकि, पिछले चार चुनावों से जम्मू डिविजन में भाजपा का दबदबा देखा जा सकता है। पार्टी पिछले तीन लोकसभा चुनावों से वहां की दोनों ही सीटें जीत रही है और 2014 में जम्मू की 25 सीटें जीतकर विधानसभा में पहली बार दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर चुकी है। लेकिन, तब पीडीपी को इससे तीन सीटें ज्यादा मिली थीं और गठबंधन सरकार में सीएम का पद महबूबा मुफ्ती के पास चला गया था।

जम्मू डिविजन से अबतक सिर्फ एक सीएम
भाजपा लगातार कह रही है कि अगर इस चुनाव में उसे बहुमत मिलता है तो नई सरकार के गठन में जम्मू की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और मुख्यमंत्री इसी क्षेत्र का होगा। जम्मू कश्मीर में आजतक सिर्फ एक ही मुख्यमंत्री जम्मू क्षेत्र से हुए हैं, जो कि पूर्व कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद हैं। वे मूल रूप से यहां के डोडा जिले के रहने वाले हैं।

तब भी उन्हें इसलिए सीएम बनने का मौका मिला था, क्योंकि पीडीपी और कांग्रेस में सत्ता बंटवारे की डील हुई थी और जब मुफ्ती मोहम्मद सईद ने नवंबर 2005 में कुर्सी छोड़ी तो कांग्रेस को अपना सीएम बनाने का मौका दिया गया। उस समय कांग्रेस के ज्यादातर विधायक जम्मू क्षेत्र से ही चुने गए थे और बाजी आजाद के हाथ लग गई।

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