Jammu Kashmir Chunav 2024: कश्मीर का चुनाव इस बार अलग क्यों है? 37 साल में पहली बार यह मुद्दा गायब

Jammu Kashmir Election 2024 News: जम्मू कश्मीर में पहले चरण में 24 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है। 16 सीटें दक्षिण कश्मीर और 8 सीटें जम्मू डिविजन में हैं। यहां 10 साल बाद विधानसभा चुनाव करवाए जा रहे हैं। लेकिन, 37 साल बाद एक ऐसा मौका आया है, जब चुनाव में किसी भी देश-विरोधी संगठन की ओर से चुनाव बहिष्कार का आह्वान नहीं किया गया है।

पहले चरण में 24 सीटों पर कुल 219 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से 90 निर्दलीय हैं। पीर पंजाल रेंज की दोनों ओर सात जिलों में इस दौर में चुनाव करवाए जा रहे हैं। इनमें दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग और जम्मू की चेनाब घाटी के किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिले शामिल हैं।

Jammu Kashmir Chunav 2024

बदले-बदले माहौल में चुनाव
जम्मू और कश्मीर में इस बार हो रहा विधानसभा चुनाव कई मायनों में अलग और बहुत ही खास है। 2022 के परिसीमन के बाद यहां पहला विधानसभा चुनाव है। यह चुनाव 10 साल के अंतर पर हो रहा है और पहली बार केंद्र शासित प्रदेश की असेंबली के लिए हो रहा है।

ये जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जा यानी आर्टिकल 370 की समाप्ति के बाद हो रहा है। इस वजह से पूरा चुनावी माहौल, मतलब चुनाव अभियान से लेकर मतदान तक में काफी कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है।

इंडिया ब्लॉक में गठबंधन भी और मुकाबला भी
इस चुनाव में इंडिया ब्लॉक में शामिल पार्टियां- कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं। लेकिन, पांच सीटों पर इनके बीच सीटों का तालमेल नहीं हुआ है, जिस वजह से दोस्ताना मुकाबले देखने को मिल रहे हैं। पहले चरण की ये पांच सीटें हैं- देवसार, राजपोरा, पड्डार-नागसेनी, डोडा और बनिहाल।

इंडिया ब्लॉक में पीडीपी भी शामिल है, लेकिन हर सीट पर वह गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस, नेशनल कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है। पीडीपी भद्रवाह और रामबन छोड़कर 22 सीटों पर मैदान में है।

दक्षिण कश्मीर की 8 सीटों पर बीजेपी भी लड़ रही है चुनाव
लोकसभा चुनाव में कश्मीर घाटी की तीनों सीटों से चुनाव नहीं लड़ने की वजह से बीजेपी की काफी आलोचना हो चुकी है। इस वजह से पार्टी घाटी की 47 सीटों में से 19 सीटों पर इस बार चुनाव लड़ रही है। पहले चरण में यह दक्षिण कश्मीर की 16 में से 8 सीटों पर मैदान में है, वहीं जम्मू की सभी 8 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

दक्षिण कशमीर के जिन इलाकों से बीजेपी चुनाव मैदान में है, उनमें शोपियां, राजपोरा, बिजबेहरा और अनंतनाग शामिल हैं। 2016 में ये इलाके भयानक रूप से देश-विरोधी गतिविधियों की चपेट में आ गए थे और आतंकी कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन गए थे।

37 साल बाद चुनाव बहिष्कार का आह्वान नहीं
जम्मू कश्मीर में 1987 में हुआ विधानसभा चुनाव चुनावी धांधलियों के लिए इतिहास में दर्ज हो चुका है। इसके बाद ही जम्मू-कश्मीर ने करीब तीन दशकों तक आतंकवाद का दौर झेला है। चुनावी धांधली के आरोप नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पर लगे थे।

उसी की वजह से हुर्रियत कांफ्रेंस जैसे पाकिस्तान परस्त अलगवावादी और अन्य आतंकवादी संगठनों को चुनाव बायकॉट जैसा हथियार हाथ लग गया था। इसकी वजह से उम्मीदवार भी खौफ के साए में चुनाव लड़ते थे और वोटरों को भी वोट डालने में डर लगता था। लेकिन, इस बार वोटर भी बेखौफ हैं और उम्मीदवार ने भी देर रात तक बेझिझक चुनाव प्रचार किया है।

37 साल बाद जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन से जुड़े लोग भी चुनाव प्रक्रिया में शामल हो रहे हैं। इस संगठन पर 2019 से प्रतिबंध लगा हुआ है, जिससे वह सीधा चुनाव नहीं लड़ सकता।

चुनाव अभियान में आम जनता से जुड़े मुद्दे रहे हावी
जम्मू-कश्मीर में यह बात लोकतंत्र की मजबूती का ही संकेत है कि सभी 24 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं ने चुनाव अभियान के दौरान विकास, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है।

कुछ राजनीतिक दलों ने वोटरों को संवेदनशील मसलों पर भड़काने की भरपूर कोशिश जरूर की है, ताकि सहानुभूति वोट बटोर सकें, लेकिन देश के बाकी इलाकों की तरह जनता-जनार्दन से जुड़े मसले हावी रहना बदल रहे नए कश्मीर के लिए बहुत ही शुभ संकेत है।

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