JK Chunav: 3 फेज में 415 कैंडिडेट रण में, 2 फेज में पड़े 118.68% वोट, BJP को मिलेगा माता वैष्णो का आशीर्वाद?
Jammu Kashmir Chunav 2024 Analysis: जम्मू-कश्मीर में इस बार के विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं। पहले दो चरणों के मतदान 18 और 25 सितंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जिसमें 61.38% और 57.03% मतदान हुआ। दूसरे चरण में लगभग 25.78 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। रियासी जिले में सबसे ज्यादा 74.70% मतदान दर्ज किया गया, जबकि श्रीनगर में सबसे कम 29.81% मतदाताओं ने वोट डाला।
अब तीसरे और आखिरी चरण का मतदान 1 अक्टूबर को होगा, जिसमें चार मुख्य हिंदू बहुल जिलों - जम्मू, सांबा, कठुआ और उधमपुर में चुनाव होंगे। इन जिलों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गढ़ माना जाता है। बीजेपी ने इन सीटों पर पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि, दो चरणों में से सबसे हॉट सीट कही जाने वाली माता वैष्णो देवी सीट ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आइए जानते हैं क्यों? यह भी समझेंगे कि चुनावी और सीटों का गणित क्या है?

माता वैष्णो देवी सीट क्यों अहम? क्या BJP को मिलेगा आशीर्वाद?
वैष्णो देवी विधानसभा सीट, जो नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है, बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इस सीट पर 79.95% मतदान हुआ है, जो दिखाता है कि यहां के मतदाताओं में खासा उत्साह है। बीजेपी ने इस सीट को जीतने के लिए पूरी तैयारी की है। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने 19 सितंबर को कटरा में करीब दो किलोमीटर लंबा रोड शो किया था। पीएम मोदी ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर में एक ऐसी सरकार की जरूरत पर जोर दिया, जो आस्था और संस्कृति का सम्मान करे।
परिसीमन और माता वैष्णो देवी सीट का गठन
2022 में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग ने विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन किया। इसका उद्देश्य जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर संतुलन बनाना था। इसी परिसीमन के बाद रियासी जिले का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें माता वैष्णो देवी का क्षेत्र आता है, अलग करके एक नया विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। इस नए क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व काफी अधिक है, जिससे यह राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन गया है।
90 सीटों पर तीन चरणों में मतदान
जम्मू-कश्मीर में इस बार 90 विधानसभा सीटों पर तीन चरणों में मतदान हो रहा है। चुनाव के परिणाम 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। पिछली बार 2014 में यहां 87 सीटों पर चुनाव हुआ था, लेकिन इस बार परिसीमन के बाद 3 सीटें बढ़ाई गई हैं।
विधानसभा सीटों का गणित
- कुल सीटें- 90
- सामान्य- 74
- एससी- 7 सीटें आरक्षित
- एसटी- 9 सीटें आरक्षित

मतदाताओं का गणित
- कुल मतदाता- 87 लाख 9 हजार
- पुरुष मतदाता- 44.46 लाख
- महिला मतदाता- 42.62 लाख
- पहली बार वोटर- 3.71 लाख
- मतदान केंद्र- 11838

तीन चरणों का मतदान
- पहला चरण (18 सितंबर): 7 जिलों की 24 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें 219 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल मतदान 61.38% रहा।
- दूसरा चरण (25 सितंबर): 6 जिलों की 26 सीटों पर चुनाव हुआ, जिसमें 239 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल मतदान 57.3% दर्ज किया गया।
- तीसरा चरण (1 अक्टूबर): 40 सीटों पर 415 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें प्रमुख जिलों में बांदीपोरा, उधमपुर, कुपवाड़ा, सांबा, बारामूला, कठुआ और जम्मू शामिल हैं।
2014 से 2024 तक का सफर
2014 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहला विधानसभा चुनाव है। 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला, और अब पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2014 में PDP ने 28 और बीजेपी ने 25 सीटें जीती थीं, और दोनों ने मिलकर सरकार बनाई थी।

इस बार के चुनावों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि जम्मू-कश्मीर की सरकार का कार्यकाल अब 5 साल का होगा, जो पहले 6 साल का हुआ करता था। यह चुनाव बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, खासकर तब जब विपक्ष ने हाल के चुनावों में बीजेपी पर लगातार हमले किए हैं।
जम्मू-कश्मीर का विधानसभा चुनाव इस बार न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। खासकर वैष्णो देवी सीट जैसी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण सीट पर बीजेपी की चुनौती बड़ी है। चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को आएंगे और यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी बहुमत का आंकड़ा पार करती है।












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