जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने का BJP का खास फॉर्मूला, हिंदू ही नहीं मुस्लिम वोटों पर भी नजर

जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी यहां किसी भी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहती है। पार्टी ना सिर्फ हिंदू बल्कि मुस्लिमों के वोट को भी साधने की रणनीति तैयार कर रही है। हाल ही में हुए परिसीमन में हिंदू बहुल जम्मू में सीटें बढ़ गई हैं और अनुसूचित जनजातियों के लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं।

घाटी में त्रिकोणीय मुकाबला है, ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि उसे इसका लाभ हो सकता है। घाटी में पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच ही सीधा मुकाबला होता था।

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लेकिन पिछले कुछ समय में भाजपा ने अपनी पैठ यहां बनाने में सफलता हासिल की है। कश्मीर घाटी में नए दल उभर रहे हैं और स्वतंत्र उम्मीदवारों का उनके क्षेत्र में काफी प्रभाव है, लिहाजा भाजपा इसका पूरा लाभ उठाना चाहती है।

परिसीमन के बाद बदला समीकरण

परिसीमन के बाद जम्मू और कश्मीर विधानसभा में अब 90 सीटें हैं। लद्दाख, जो अब केंद्र शासित प्रदेश है, में चार सीटें कम हो गई हैं। जबकि जम्मू में छह सीटों का इजाफा हुआ है। मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी ने एक सीट का इजाफा हुआ है।

हिंदू-मुस्लिम वोट समीकरण

जम्मू क्षेत्र में 49 सीटें हैं जिसमे 24 हिंदू बहुल क्षेत्रों में और 13 मुस्लिम बहुल जिलों में हैं। पिछले कुछ वर्षों में, भाजपा ने जम्मू के हिंदू और मुस्लिम दोनों क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन में सुधार किया है, लेकिन कश्मीर घाटी से कभी भी भाजपा एक सीट नहीं जीत सकी है

भाजपा के आंतरिक विश्लेषण के अनुसार, पार्टी को अपने पिछले प्रदर्शन के आधार पर 12 सीटों को मजबूत, 14 को मध्यम और 57 को कमजोर के रूप में वर्गीकृत किया है। इन मजबूत सीटों में से 11 हिंदू-बहुल जम्मू जिलों में हैं, और एक मुस्लिम-बहुल क्षेत्र में है।

क्या है भाजपा की रणनीति

पार्टी की योजना 90 में से 67 सीटों पर चुनाव लड़ने की है, बाकी सीटें कश्मीर घाटी में सहयोगी दलों के लिए छोड़नी है। भाजपा का लक्ष्य नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नई पार्टियों के बीच वोटों को विभाजित करना और आरक्षित अनुसूचित जनजाति सीटों पर पहाड़ी जनजातियों को अपनी ओर खींचना है।

भाजपा जम्मू की सभी 43 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है और घाटी की 47 में से केवल 24 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार कर रही है। शामिल है। ऐसे में साफ है कि भाजपा गठबंधन को लेकर सक्रिय रूप से तैयारी कर रही है।

गठबंधन की सरकार

भाजपा को पता है कि वह अकेले दम पर घाटी में सरकार नहीं बना सकती है, लिहाजा वह यहां गठबंधन की सरकार बनाने की पुरजोर कोशिश में जुटी है। पार्टी को त्रिशंकु विधानसभा से लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां क्षेत्रीय दल और निर्दलीय एनसी, पीडीपी और कांग्रेस के वोटों को कम कर सकते हैं।

विपक्षी दलों में फूट का मिल सकता है लाभ

हाल के लोकसभा चुनावों में, एनसी और कांग्रेस के बीच गठबंधन ने अधिकांश सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 29 सीटें मिलीं। घाटी के 16 मुस्लिम बहुल जिलों में सीमित प्रभाव के बावजूद, भाजपा को उम्मीद है कि वह विपक्षी दलों में विभाजन का फायदा उठाकर त्रिशंकु विधानसभा में मैच विनर के रूप में सामने आ सकती है।

बहरहाल भाजपा के लिए जम्मू कश्मीर की राह आसान नहीं है लेकिन उसे उम्मीद है कि परिसीमन में बदलाव और विपक्षी दलों में फूट का लाभ उठाकर पार्टी हिंदू और मुस्लिम दोनों क्षेत्रों में अपना प्रदर्शन बेहतर कर सकती है।

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