J&K: जम्मू में घर-घर पहुंच रही है संस्कृत की शिक्षा, 'मोबाइल संस्कृत गुरुकुल' की बढ़ी लोकप्रियता
जम्मू-कश्मीर में संस्कृत भाषा की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। पिछले दिसंबर में जम्मू में यह अभियान शुरू किया गया था और अब यह स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच अपनी धाक जमा रही है।

जम्मू और कश्मीर में संस्कृत भाषा की लोकप्रियता बढाने के लिए 'सचल शिक्षा' अभियान करीब तीन महीने पहले ही लॉन्च किया गया था, जिसका सकारात्मक परिणाम नजर आ रहा है। इस कार्यक्रम को इस मकसद से लॉन्च किया गया है कि संस्कृत के शिक्षक घर-घर जाकर लोगों को इस प्राचीन भाषा की अनौपचारिक शिक्षा देंगे। जम्मू स्थिति एक गैर-सरकारी संस्था वैदिक संस्थान ट्रस्ट ने पिछले साल दिसंबर में 'मोबाइल संस्कृत गुरुकुल' या 'सचल संस्कृत गुरुकुलम' की शुरुआत की थी, जो अबतक जम्मू के एक दर्जन से ज्यादा बस्तियों को कवर कर चुका है।

सभी को संस्कृत की शिक्षा देना चाहता है ट्रस्ट
वैदिक संस्थान ट्रस्ट का कहना है कि वह चाहता है कि दुनिया के सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक संस्कृत में ज्ञान का जो खजाना भरा पड़ा है, उसकी अनौपचारिक शिक्षा लोगों तक पहुंचे। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री का कहना है, 'हम शहरी और ग्रामीण लोगों के पास संस्कृत पढ़ाने के लिए जा रहे हैं......हमारा उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में हर घर जाकर योग्य शिक्षकों के माध्यम से सभी को संस्कृत की शिक्षा देनी है।'

'संस्कृत को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक'
शास्त्री का कहना है कि जैसे ही मोबाइल गुरुकुल गांव में कक्षा लगाने के लिए पहुंच रहा है, लोगों की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक हैं। यह कक्षाएं अधिकतर युवाओं और बच्चों के लिए ही लग रही हैं। उन्होंने कहा कि,'हम अन्य गांवों से भी अनुरोध करते हैं कि हमें बुलाएं और इस पहल का लाभ उठाएं। हमें प्रसन्नता है कि सभी जाति और पंथ के लोग इस कार्यक्रम में भागीदारी कर रहे हैं।' अभी तक यह एनजीओ जम्मू के जिन दर्जन भर से अधिक बस्तियों में गया है, अधिकतर स्कूल जाने वाले बच्चे संस्कृत सीखने के लिए आ रहे हैं। शास्त्री के अनुसार लक्ष्य छात्रों को चरणबद्ध तरीके से संस्कृत में शिक्षित करना है।

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'लोग संस्कृत सीखने के लिए स्वयं ही आगे बढ़कर आ रहे हैं'
इस संगठन के पास दो वैन और 10 शिक्षक हैं, जो प्रत्येक ग्राम पंचायत में 4 से 5 दिन देते हैं और कुछ स्कूलों तक भी पहुंचने का प्रयास करते हैं। शास्त्री ने कहा है कि पहले वह जम्मू के व्यवसायी वर्ग के लोगों को संस्कृत की शिक्षा देते थे। उनका कहना है, 'लोग इस दृष्टिकोण को लेकर उत्साहित हैं....वह शिक्षा लेने के लिए स्वयं ही आगे बढ़कर आ रहे हैं। हम लोगों के बीच संस्कृत की पुस्तकें भी नि:शुल्क वितरित कर रहे हैं।'

हमें अंग्रेजी की तरह संस्कृत भी सीखनी चाहिए- छात्र
11वीं के एक छात्र ने बताया कि उसे मोबाइल गुरुकुल के बारे में पता चला तो वह संस्कृत सीखने की ओर आकर्षित हुआ। उसने कहा, 'स्कूल के बाद मैं घर जा रहा था और मैंने इस मोबाइल संस्कृत गुरुकुल को देखा। मैंने सोचा कि मुझे भी संस्कृत भाषा सीखनी चाहिए और मुझे वहां से किताब मिल गई। मैं 11वीं क्लास का छात्र हूं और मुझे लगता है कि हमें अंग्रेजी की तरह संस्कृत भी सीखनी चाहिए। '

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मोबाइल संस्कृत गुरुकुल की लॉन्चिंग के मौके पर जम्मू कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने बताया था कि संस्कृत सिर्फ धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है। यह प्राचीन भारत के ज्ञान की पूरी संरचना उपलब्ध कराता है, जिसमें चिकित्सा, वनस्पति विज्ञान और गणित के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के महान कार्य शामिल हैं। इस मौके पर उन्होंने संस्कृत भाषा और प्राचीन ऋषियों के संदेशों के संरक्षण, विकास और प्रचार के लिए ट्रस्ट की ओर से लिए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा था कि इस प्राचीन भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए एक लचीला और अनौपचारिक दृष्टिकोण अपनानने के लिए मिलकर काम करना होगा। (इनपुट-पीटीआई) (दो तस्वीरों के अलावा बाकी सांकेतिक)












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