Rajasthan में जन आक्रोश यात्रा यात्रा को लेकर विरोधाभास की स्थिति, जमीन पर नेताओं और कार्यकर्ताओं में बिखराव
राजस्थान में भाजपा की जन आक्रोश यात्रा से भाजपा जमीनी स्तर पर बिखरी हुई नजर आने लगी है। पार्टी के भीतर विरोधाभास की स्थिति का असर पार्टी की छवि पर पड़ रहा है। इससे पार्टी एकजुटता संदेहास्पद है।

Rajasthan में भाजपा की जन आक्रोश यात्रा के दौरान नेताओं को पार्टी के भीतर के आक्रोश का शिकार होना पड़ रहा है। भाजपा ने राजस्थान में गहलोत सरकार के 4 साल पूरे होने पर कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोलने के लिए 200 विधानसभाओं में इस यात्रा की शुरुआत की थी। लेकिन जब यात्रा जमीन पर पहुंची तो स्थानीय नेताओं का कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व के बीच चल रही मुख्यमंत्री की खींचतान इस यात्रा के जरिए विधानसभा स्तर के विरोध तक पहुंच गई है। जन आक्रोश यात्रा के बीच कई नेताओं को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जबकि भाजपा ने बड़ी उम्मीद के साथ सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने के लिए इस यात्रा की शुरुआत की थी।

टोंक में हुआ यात्रा का विरोध
टोंक के मालपुरा में भाजपा की जनाक्रोश यात्रा का विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जन आक्रोश यात्रा को मालपुरा क्षेत्र के नगर पंचायत मुख्यालय पर विरोध का सामना करना पड़ा। युवाओं ने यात्रा के दौरान काले झंडे दिखाकर और पायलट जिंदाबाद के नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया। स्थानीय बाशिंदों के मुताबिक क्षेत्र में प्रधान से लेकर एमएलए और सांसद भाजपा के हैं। बावजूद इसके कोई विकास कार्य नहीं हो रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भाजपा किस बात के लिए जन आक्रोश यात्रा निकाल रही है।

बारां जिले में गुटबाजी आई सामने
जन आक्रोश यात्रा से पहले ही प्रदेश के बारां जिले में यह यात्रा गुटबाजी का शिकार हो गई। बारां जिले में जन आक्रोश यात्रा को लेकर दो प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। भाजपा जिला अध्यक्ष जगदीश मीणा ने सांसद कार्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वहीं पार्टी के प्रदेश महामंत्री रामगंजमंडी से विधायक मदन दिलावर ने सर्किट हाउस में अलग से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। हालांकि इस मामले में दोनों नेताओं ने अनभिज्ञता जाहिर की। मदन दिलावर को जनाक्रोश यात्रा के दौरान ग्रामीणों के विरोध का सामना भी करना पड़ा।

शेखावाटी में भी हुआ यात्रा का विरोध
भाजपा की जन आक्रोश यात्रा के दौरान शेखावाटी के उदयपुरवाटी में सांसद नरेंद्र बुडानिया की मौजूदगी में भाजपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी आमने-सामने हो गए। आलम यह रहा कि नेताओं को अपनी गाड़ियां लेकर वहां से निकलना पड़ा। भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारियों में जमकर बहस हुई। वही भरतपुर में बीजेपी के पूर्व विधायक और स्थानीय नेताओं से नाराज लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जन आक्रोश यात्रा में शामिल भाजपा नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई और यात्रा का विरोध किया। पाली जिले के जैतारण में विधायक अविनाश गहलोत जब जनाक्रोश यात्रा लेकर ग्रामीण क्षेत्र किशननगर में पहुंचे तो उन्हें ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप था कि उन्होंने विधायक बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में कोई भी विकास कार्य नहीं करवाए हैं। इसी तरह जन आक्रोश यात्रा को प्रदेश में कई जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

जयपुर में कुर्सियां खाली रहने पर शीर्ष नेतृत्व ने जताई थी नाराजगी
राजस्थान में 1 दिसंबर को यात्रा के शुभारंभ के मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जयपुर में मौजूद थे। उनकी सभा में भाजपा प्रदेश इकाई भीड़ नहीं जुटा पाई थी। नड्डा इससे नाराज होकर दिल्ली गए थे। दिल्ली से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी इस पर नाराजगी जताई थी और जयपुर के स्थानीय पदाधिकारियों और नेताओं के खिलाफ कार्यवाही की बात की थी। वरिष्ठ पत्रकार नीलम मुंजाल कहती हैं भाजपा प्रदेश में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के मुकाबिल जन आक्रोश यात्राएं निकाल रही है। जन आक्रोश यात्रा के अलावा प्रेस वार्ता के जरिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार को विभिन्न मुद्दों पर कठघरे में खड़े कर रही है। भाजपा अपनी विपक्ष की भूमिका के तौर पर सरकार के काम की समीक्षात्मक आलोचना भी कर रही है। जहाँ तक बात जन आक्रोश यात्रा की है। इसके जरिए भाजपा भी स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ना चाहती हैं। ऐसे में अगर स्थानीय स्तर के नेताओं के किसी भी तरह के मतभेद जनता के समक्ष आते है, तो ऐसी स्थिति में प्रदेश इकाई के वरिष्ठ नेताओं की पंक्ति को इस तरह के स्थानीय नेताओं के बीच उपजने वाले मतभेदों को तत्काल सुलझाने का प्रयास करना होगा। वे कहती हैं, स्थानीय स्तर पर उपजने वाले मतभेद पार्टी के लिए प्रदेश में 2023 की राह कठिन कर सकते है।

गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ मिली शिकायत लीक
जनाक्रोश यात्रा के दौरान पिंडवाड़ा के एक व्यक्ति ने संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले को लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ यात्रा की शिकायत पेटिका में शिकायत डाली थी। पार्टी के प्रदेश संगठन के किसी व्यक्ति ने उस शिकायत को लीक कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस शिकायत के वायरल होने के बाद पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर सामने आ गई।












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