Salasar Dham : देश में इकलौते सालासर मंदिर में ही क्यों पूजे जाते हैं दाढ़ी मूंछ वाले हनुमानजी?
सालासर। सालासर बालाजी धाम की स्थापना को 28 जुलाई 2020 को 266 साल पूरे हो गए। श्रावण सुदी नवमी विक्रम सम्वत 1811 को संत मोहनदास ने सालासर में बालाजी के मंदिर की स्थापना की थी। सालासर धाम देश में एकलौता ऐसा मंदिर है, जहां दाढ़ी मूंछ वाले हनुमानजी पूजे जाते हैं। राजस्थान के चूरू जिले में सीकर सीमा पर सालासर बालाजी धाम के स्थापना दिवस के मौके पर आइए जानते हैं कि मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें।
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सालासर बालाजी की स्थापना कैसे हुई
सालासर बालाजी धाम के पुजारी अजय पंडित पुजारी बताते हैं कि सालासर बालजी की स्थापना का इतिहास बड़ा रोचक है। नागौर जिले की लाडनूं तहसील के गांव आसोटा से जुड़ा है। किदवंती है कि आसोटा में एक किसान खेत जोत रहा था तभी उसके हल की नोक किसी कठोर चीज से टकराई। किसान ने उसे निकाल कर देखा। वो एक बालाजी की मूर्तिनुमा पत्थर था। फिर किसान ने वह मूर्ति आसोटा के ठाकुर को सौंप दी। उसी रात ठाकुर के सपने में बालाजी आए और कहां कि वे यहां के लिए नहीं बल्कि सालासर के लिए प्रकट हुए हैं। उन्हें सालासर पहुंचाया जाए। इस पर ठाकुर ने मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर अपने दरबार के लोगों को सालासर की ओर भेज दिया।

मोहनदास के धुणे के पास आकर रुकी बैलगाड़ी
अजय पंडित पुजारी के अनुसार इधर, सालासर गांव में मोहनदास अपनी बहन के घर उनकी सेवा करने के लिए आए थे। वे सालासर में एक धुणे पर बैठकर राम भक्ति किया करते थे। बालाजी के भक्त थे। बालाजी ने उनको सपने में दर्शन देकर कहा कि वे सालासर आ रहे हैं तो उन्हें लाने के लिए सालासर की सीमा पर चले जाओ। इस पर भक्त मोहनदास सालासर के लोगों को साथ लेकर सीमा पर चले गए। वहां उन्हें ठाकुर के आदमी और एक मूर्ति को लेकर बैलगाड़ी आती दिखी। इस पर तय किया गया कि सालासर में जहां भी यह बैलगाड़ी रुकेगी। वहीं पर सालासर बालाजी की स्थापना की जाएगी। वह बैलगाड़ी मोहनदास के धुणे के पास आकर रुकी। वहीं पर मूर्ति स्थापित कर गई। यहीं स्थान वर्तमान में सालासर धाम के नाम से जाना जाता है।

ऐसे पहुंचे सालासर बालाजी धाम
नई दिल्ली से सड़क मार्ग के जरिए सालासर धाम पहुंचने के कई रास्ते हैं।
1. नई दिल्ली - गुरुग्राम (गुड़गांव)-रेवाड़ी-नारनौल-चिड़ावा-झुंझुनूं-मुकुंदगढ़-लक्ष्मणगढ़- सालासर बालाजी (318 किलोमीटर)
(आपको रेवाड़ी रोड़ से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 को छोड़कर रेवाड़ी से झुंझुनूं जाने वाला रास्ता लेना होगा) (सबसे छोटा रास्ता)
2. नई दिल्ली-गुरुग्राम-बहरोड़-नारनौल-चिड़ावा-झुंझुनूं-मुकुंदगढ़-लक्ष्मणगढ़-सालासर बालाजी (335 किलोमीटर)
(ऊपर बताए गए रास्ते से यह मार्ग बेहतर है, आपको बहरोड़ से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा, लेकिन बहरोड़-चिड़ावा-झुंझुनूं वाला रास्ता बहुत खराब है)
3. नई दिल्ली-गुरुग्राम-बहरोड़-कोटपुतली-नीमकाथाना-उदयपुरवाटी-सीकर-सालासर बालाजी (335 किलोमीटर)
(आपको कोटपुतली से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा)
4. नई दिल्ली-गुरुग्राम-बहरोड़-कोटपुतली-शाहपुरा-अजीतगढ़-सामोद-चौमूं-सीकर-सालासर बालाजी (392 किलोमीटर)
(आपको शाहपुरा से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा) इसे सामोद मार्ग के रूप में भी जाना जाता है।
5. नई दिल्ली-गुरुग्राम-बहरोड़-कोटपुतली-शाहपुरा-चंदवाजी-चौमूं-सीकर-सालासर बालाजी (399 किलोमीटर)
(आपको शाहपुरा से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा) इसे चंदवाजी मार्ग भी कहा जाता है।
6.नई दिल्ली-बहादुरगढ़-झज्झर-चरखीदादरी-लोहारू-चिड़ावा-झुंझुनूं-मुकुंदगढ़-लक्ष्मणगढ़-सालासर बालाजी (302 किलोमीटर) यह नया रास्ता है जिसे कम भक्त जानते हैं।
7. नई दिल्ली-रोहतक-हिसार-राजगढ़-चूरू-फतेहपुर-सालासर बालाजी (382 किलोमीटर)

सालासर बालाजी धाम से जुड़ी अन्य बातें
1. पान का बीड़ा :- आपने सुनी होगी एक प्रचलित लोकोक्ति 'बीड़ा उठाना'। इसका अर्थ होता है- कोई महत्वपूर्ण या जोखिमभरा काम करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर लेना। यदि आपके जीवन में कोई घोर संकट है या ऐसा काम है जिसे करना आपके बस का नहीं है, तो आप अपनी जिम्मेदारी हनुमानजी को सौंप दें। इसके लिए आप मंगलवार के दिन किसी मंदिर में पूजा-पाठ करने के बाद उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करें। रसीला बनारसी पान चढ़ाकर मांग लीजिए मनचाहा वरदान।
2. लौंग, इलायची और सुपारी :- हनुमानजी को लौंग, इलायची और सुपारी भी पसंद है। शनिवार के दिन लौंग, सुपारी और इलायची चढ़ाने से शनि का कष्ट दूर हो जाता है। कच्ची घानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें, संकट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।
3. नारियल चढ़ाएं:- गरीबी से मुक्ति के लिए 1 नारियल पर सिन्दूर लगाएं और मौली यानी लाल धागा बांधें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी को चढ़ाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें। यदि इसी नारियल को लाल कपड़े में राई के साथ लपेटकर घर के दरवाजे पर बांध दिया जाए, तो घर में किसी भी प्रकार की अला-बला नहीं आती है, जादू-मंतर या तंत्र का असर नहीं होता है और किसी की नजर भी नहीं लगती है।

गुड़-चने का प्रसाद
4. गुड़-चने का प्रसाद:- हनुमानजी को गुड़ और चने का प्रसाद तो अक्सर चढ़ाया ही जाता है। यह मंगल का उपाय भी है। इससे मंगल दोष मिटता है। यदि आप कुछ भी चढ़ाने की क्षमता नहीं रखते या किसी और कारण से चढ़ा नहीं पाते हैं तो सिर्फ गुड़ और चना ही चढ़ाकर हनुमानजी को प्रसन्न कर सकते हैं। हर मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को गुड़ और चने का भोग लगाएं। इससे आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। हालांकि आजकल गुड़ की जगह चिरौंजी ज्यादा मिलती है लेकिन चने के साथ गुड़ का ही संयोग होता है।
5. इमरती:- इमरती का भोग लगाने से संकटमोचन अत्यंत प्रसन्न होते हैं। आपकी जो भी मनोकामनाएं हैं, वे पूर्ण हो जाएंगी। बस, मंगलवार के दिन हनुमानजी को इमरती चढ़ा आएं।

हनुमानजी को 3 तरह के लड्डू पसंद हैं
6. लड्डू:- हनुमानजी को 3 तरह के लड्डू पसंद हैं- एक केसरिया बूंदी लड्डू, दूसरा बेसन के लड्डू और तीसरा मलाई-मिश्री के लड्डू। इसमें बेसन के लड्डू उन्हें खास पसंद हैं। लड्डू चढ़ाने से हनुमानजी भक्तों को दे देते हैं मनचाहा वरदान और उसकी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। लड्डू चढ़ाने से पापी ग्रह भी काबू में रहते हैं।
7. केसर-भात:- उज्जैन में मंगलनाथ पर केसर-भात से मंगल की शांति होती है। हनुमानजी को भी केसर-भात का भोग लगाया जाता है। इससे हनुमानजी बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। कोई व्यक्ति 5 मंगलवार हनुमानजी को यह नैवेद्य लगाता है, तो उसके हर तरह के संकटों का समाधान होता है।
9. रोट या रोठ:- ऐसी मान्यता है कि अगर हनुमानजी को मंगलवार के दिन रोट या मीठा रोटी का भोग लगाया जाता है तो मनवांछित फल मिलता है। गेहूं के आटे में गुड़, इलायची, नारियल का बूरा, घी, दूध आदि मिलाकर रोट बनाया जाता है। कुछ जगह इसे सेंककर रोटी जैसा बनाकर भोग लगाते हैं और कुछ जगह इसे पूरियों की तरह तलकर इसका भोग लगाते हैं। यह रोट हनुमानजी को बहुत प्रिय है।
10. पंच मेवा:- काजू, बादाम, किशमिश, छुआरा, खोपरागिट पंचमेवा के नाम से जाने जाते हैं। इसका भी हनुमानजी को भोग लगता है।

सालासर बालाजी पूजा सामग्री
1. आटे का दीपक:- यदि आप कर्ज में डूबे हैं तो आटे के बने दीपक में चमेली का तेल डालकर उसे बड़ के पत्ते पर रखकर जलाएं। ऐसे 5 पत्तों पर 5 दीपक रखें और उसे ले जाकर हनुमानजी के मंदिर में रख दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को आटे के दीपक लगाने से शनि की बाधा भी दूर हो जाती है।
2. सिन्दूर चढ़ाएं:- मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को घी के साथ सिन्दूर अर्पित करने से स्वयं को भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है और उसके बिगड़े काम बन जाते हैं। मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमानजी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है। कहते हैं कि सिन्दूर के साथ चमेली का तेल भी चढ़ाना चाहिए। सिन्दूर चढ़ाने से एकाग्रता में वृद्धि होती है और दृष्टि भी बढ़ती है। इससे सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। जो व्यक्ति शनिवार को हनुमानजी को सिन्दूर अर्पित करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।

चमेली का तेल और फूल
3. चमेली का तेल और फूल:- चमेली का तेल हनुमानजी को चढ़ाने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। प्रत्येक मंगलवार चमेली के तेल का दीपक जलाकर चमेली का तेल और फूल चढ़ाने से हनुमानजी की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। भूत-प्रेत का साया नहीं रहता और किया-कराया भी मिट जाता है। आप हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर दुश्मनों से छुटकारा पा सकते हैं। कहते हैं कि चमेली के तेल के साथ सिन्दूर भी चढ़ाना चाहिए। यदि आप बीमार हैं या घर का कोई सदस्य बीमार है तो प्रतिदिन हनुमानजी के समक्ष 3 कोनों वाला दीपक जलाएं। दीपक में चमेली का तेल हो और हनुमान बाहुक का पाठ करें।
4. ध्वज चढ़ाना:- हनुमानजी को यूं तो लाल या केसरिया ध्वज या झंडा चढ़ाया जाता है किसी कार्य में सफलता प्राप्ति हेतु या युद्ध में विजय हेतु। हालांकि झंडा चढ़ाने वाले का मान-सम्मान बढ़ता जाता है और उसे हर कार्य में तरक्की मिलती है। यह झंडा त्रिकोणीय होना चाहिए और उस पर 'राम' लिखा होना चाहिए। इससे हर तरह की संपत्ति संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं। हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करने पर सर्व कामनाएं पूर्ण होती हैं।

हनुमानजी को तुलसी की माला चढ़ाई जाती है
5. तुलसी की माला:- हनुमानजी को तुलसी की माला चढ़ाई जाती है। इससे तुरंत ही संकट मिट जाते हैं और समृद्धि के द्वार खुल जाते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान को तुलसी की माला चढ़ाने से व्यक्ति को धनलाभ की प्राप्ति होती है। तुलसी खाते रहने से किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता है और इससे प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इसमें एक ऐसा पदार्थ होता है, जो सफेद दाग नहीं होने देता है।
6. राम नाम चढ़ाएं:- हनुमानजी को 'राम' का नाम बहुत प्रिय है। भगवान श्रीराम की पूजा करने से हनुमानजी बहुत प्रसन्न होते हैं। पीपल के पत्ते पर चमेली के तेल और सिन्दूर से 'राम' नाम लिखें और इसे हनुमानजी को चढ़ाएं। यह कार्य करने से सभी तरह की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। यह भी कर सकते हैं- पीपल के 11 पत्तों पर चंदन या कुमकुम से श्रीराम का नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की माला बनाकर हनुमानजी को चढ़ाएं।

हनुमानजी अपने कांधे पर जनेऊ धारण करते हैंं
7. जनेऊ:- हनुमानजी अपने कांधे पर जनेऊ धारण करते हैंं। दुर्भाग्य से मुक्ति हेतु हनुमानजी को मंगलवार को जनेऊ चढ़ाई जाती है। जनेऊ को यज्ञोपवीत भी कहते हैं।
8. पीले रंग के फूल:- हनुमानजी को लाल, गुलाबी और पीले रंग के फूल अर्पित करने से आपको लाभ प्राप्त होगा। हनुमान जयंती से ही ऐसा करना प्रारंभ करें। मंगलवार को हनुमानजी को लाल या पीले फूल जैसे कमल, गुलाब, गेंदा या सूर्यमुखी चढ़ाने से सारे वैभव व सुख प्राप्त होते हैं।
9. लाल चंदन में केसर:- हनुमानजी को लाल चंदन में केसर मिलाकर चढ़ाएं या उनकी मूर्ति पर इसे लगा दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें और इस दौरान घर में हनुमान चालीसा का पाठ करते रहें। इससे गृह क्लेश दूर हो जाएगा और घर में हमेशा शांति बनी रहेगी। लाल चंदन घिसा हुआ हुआ चाहिए, बाजार से लाया हुआ नहीं?
लाल लंगोट व चोला चढ़ाना
10. लाल लंगोट:- सिन्दूर और चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमानजी को लाल लंगोट अर्पित करें। कहते हैं कि यह उपाय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता देता है।
11. चोला चढ़ाएं :- हनुमानजी को चोला चढ़ाने में उपरोक्त सभी सामग्री शामिल हो जाती है। प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ते हुए कम से कम 3 माह में 1 बार चोला चढ़ाते रहने से व्यक्ति के जीवन में किसी भी प्रकार का संकट नहीं आता है। और अगर कोई संकट है तो वह मिट जाता है। जो व्यक्ति चोला चढ़ाता रहता है उसके जीवन में भूत-पिशाच, शनि और ग्रह बाधा, रोग और शोक, कोर्ट-कचहरी-जेल बंधन, मारण-सम्मोहन-उच्चाटन, घटना-दुर्घटना, कर्ज, तनाव या चिंता जैसे किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं रहती है।












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