झोपड़ी से यूरोप तक का सफर, कभी पाई-पाई को थीं मोहताज, फिर 22 हजार महिलाओं को दी 'नौकरी'
बाड़मेर। तस्वीर में दिख रही दोनों महिलाएं एक ही हैं। एक फोटो संघर्ष के दिनों की है जबकि दूसरी फोटो अपने काम के दम पर यूरोप की यात्रा की है। तकदीर और तस्वीर बदलने वाली इस महिला का नाम है रूमा देवी, जो बेइंतहा गरीबी में पली-बढ़ी। बाल विवाह का दंश झेला। पाई-पाई को मोहताज हुई, मगर आज 22 हजार महिलाओं को 'नौकरी' दे रखी है।
Recommended Video

कौन हैं रूमा देवी?
रूमा देवी राजस्थान के बाड़मेर जिले की रहने वाली हैं। राजस्थानी हस्तशिल्प जैसे साड़ी, बेडशीट, कुर्ता समेत अन्य कपड़े तैयार करने में इनको महारत हासिल है। इनके बनाए गए कपड़ों के ब्रांड विदेशों में भी फेमस हैं। ये भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बाड़मेर, जैलसमेर और बीकानेर जिले के करीब 75 गांवों की 22 हजार महिलाओं को रोजगार मुहैया करवा रही हैं। इनके समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का लंदन, जर्मनी, सिंगापुर और कोलंबो के फैशन वीक्स में भी प्रदर्शन हो चुका है।

5 साल की उम्र में मां की मौत
वर्तमान में रूमा देवी भले ही हजारों महिलाओं का जीवन संवार रही हों, मगर इनके खुद के जीवन की शुरुआत ही संघर्ष से हुई। बाड़मेर जिले के गांव रातवसर में खेताराम व इमरती देवी के घर नवम्बर 1988 में रूमा देवी का जन्म हुआ। पांच साल की उम्र में रूमा ने अपनी मां को खो दिया। फिर पिता ने दूसरी शादी कर ली। 7 बहन व एक भाई में रूमा देवी सबसे बड़ी हैं।

बैलगाड़ी पर 10 किमी दूर से लाती थीं पानी
रूमा देवी अपने चाचा के पास रहकर पली-बढ़ी। गांव के सरकारी स्कूल से महज आठवीं कक्षा तक पढ़ पाई। राजस्थान में पेयजल की सबसे अधिक किल्लत बाड़मेर है। यहां भूजल स्तर पाताल की राह पकड़ चुका है। ऐसे में रूमा ने वो दिन भी देखें जब इन्हें बैलगाड़ी पर बैठकर घर से 10 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था।

कैसे बदली रूमा की तकदीर?
बाड़मेर में 1998 में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर (जीवीसीएस) नाम से एनजीओ बना, जिसका मकसद था राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना। वर्ष 2008 में रूमा देवी भी इससे संस्थान से जुड़ी और जमकर मेहनत की। हस्तशिल्प उत्पादों के नए नए डिजाइन तैयार किए। बाजार में मांग बढ़ाई। वर्ष 2010 में इन्हें इस एनजीओ की कमान सौंप दी गई। अध्यक्ष बना दिया गया। एनजीओ का मुख्य कार्यालय बाड़मेर में ही है।

क्या काम करता है रूमा देवी का एनजीओ?
ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान के सचिव विक्रम सिंह बताते हैं कि हमारे एनजीओ से आस-पास के तीन जिलों की करीब 22 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं अपने घरों में रहकर हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करती हैं। बाजार की डिमांड के हिसाब से इन्हें ट्रेनिंग और तैयार उत्पाद को बेचने में मदद एनजीओ द्वारा की जाती है। सभी महिलाओं के कामकाज का सालाना टर्न ओवर करोड़ों में है।

रूमा देवी का परिवार
महज 17 साल की उम्र में रूमा देवी की शादी बाड़मेर जिले के ही गांव मंगल बेरी निवासी टिकूराम के साथ हुई। इनके एक बेटा है लक्षित, जो अभी स्कूल की पढ़ाई कर रहा है। टिकूराम नश मुक्ति संस्थान जोधपुर के साथ मिलकर काम करते हैं। रूमा देवी ने बाड़मेर में मकान बना रखे हैं जबकि इनका बचपन गांव रावतसर की झोपड़ियों में बीता।

रूमा देवी की कामयाबी
रूमा देवी संघर्ष, मेहनत और कामयाबी का दूसरा नाम है। इन्हें भारत में महिलाओं के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'नारी शक्ति पुरस्कार 2018' से सम्मानित किया जा चुका है। 15 व 16 फरवरी 2020 को अमेरिका में आयोजित दो दिवसीय हावर्ड इंडिया कांफ्रेस में रूमा देवी को भी बुलाया गया था। तब इन्हें वहां अपने हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित करने के साथ-साथ हावर्ड यूनिवर्सिटी के बच्चों को पढ़ाने का मौका भी मिला। इसके अलावा रूमा देवी 'कौन बनेगा करोड़पति' में अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर भी नजर आ चुकी हैं।

सोशल मीडिया में हैं काफी एक्टिव
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटीं रूमा देवी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी एक्टिव हैं। इनके फेसबुक पेज को 1 लाख 64 हजार लोगों ने लाइक कर रखा है। ट्विटर पर इन्हें 6 हजार 500 लोग फॉलो करते हैं। सोशल मीडिया पर रूमा देवी अपने हस्तशिल्प उत्पादों के बारे में अक्सर बताती रहती हैं।
झोपड़ी व यूरोप यात्रा वाली तस्वीरें
झोपड़ी और यूरोप की यात्रा वाली तस्वीरें खुद रूमा देवी ने अपने फेसबुक पेज पर शेयर कर रखी हैं। वर्ष 2016-2017 जर्मनी में विश्व का सबसे बड़ा ट्रेड फेयर हुआ था, जिसमें शामिल होने की फीस करीब 15 लाख रुपए है, मगर रूमा देवी और उनकी टीम को निशुल्क बुलाया गया था। उस समय वहां बर्फबारी हो रही थी। रूमा देवी ने अब 31 जुलाई 2020 वो अपनी जर्मनी यात्रा की तस्वीरें फेसबुक पेज पर शेयर करते हुए लिखा 'यूरोप यात्रा डायरी से। गाड़ी के शीशे पर बर्फ वैसे ही जैसे थार में रेत जमा होती हैं' वहीं, 28 जून को अपनी झोपड़ी वाली तस्वीर शेयर करते हुए रूमा देवी ने लिखा 'दस साल पहले, हस्तशिल्प पर डॉक्यूमेंटरी शूटिंग की स्मृति'

रूमा देवी पर लिखी किताब 'हौसले का हुनर'
रूमा देवी पर हाल ही किताब भी लिखी गई है, जिसका नाम 'हौसले का हुनर' है। निधि जैन द्वारा लिखी गई किताब 'हौसले का हुनर' में रूमा देवी के संघर्ष और उनकी सफलता की पूरी कहानी बयां की गई है। किताब में बताया गया है कि रूमादेवी ने अल्पशिक्षा, संसाधनों की कमी, तकनीकी अभाव के बावजूद किस तरह से सफलता के शिखर पर अपनी जगह बनाई। खुद अपने गांव से निकलकर विदेशों तक पहुंचे और हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
-
क्या भारत में 'LOCKDOWN' लगने वाला है? दुनियाभर में Energy Lockdown की शुरुआत! तेल संकट से आप पर कितना असर -
Badshah Caste: बॉलीवुड के फेमस रैपर बादशाह की क्या है जाति? क्यों छुपाया असली नाम? कौन-सा धर्म करते हैं फॉलो? -
Iran Vs America War: अमेरिका ने किया सरेंडर! अचानक ईरान से युद्ध खत्म करने का किया ऐलान और फिर पलटे ट्रंप -
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट? -
Bengaluru Metro Pink Line: मेट्रो पिंक लाइन का शुरू हो रहा ट्रायल, जानें रूट और कब यात्री कर सकेंगे सवारी?












Click it and Unblock the Notifications