Rajasthan : 3 माह पहले जन्मी बेटी का चेहरा भी नहीं देख पाए थे शहीद रोहिताश लांबा

Jaipur News, जयपुर। पुलवामा आतंकी (Pulwama Attack) हमले के शहीदों के पीछे वो दर्दभरी कहानियां छूटी हैं, जिन्हें याद कर परिजन कभी आंसू नहीं रोक पाएंगे। ना ही इनका बलिदान कभी देश भूल पाएगा। ऐसी ही दर्दभरी दास्तां शहीद रोहिताश लांबा के परिवार की है।

Rohitash Lamba Funeral in Govindpura Shahpura jaipur

शनिवार सुबह शहीद रोहिताश लांबा (Rohitash Lamba) का जयपुर जिले के पैतृक गांव गोविंदपुरा में अंतिम संस्कार किया गया। सुबह जैसे ही शहीद लांबा की पार्थिव देह पहुंची तो पूरा गांव बहादुर बेटे के अंतिम दर्शन करने और अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा। हजारों लोग रोहिताश लांबा की शवयात्रा में शामिल हुए।

नहीं थम रहे रोहिताश लांबा के परिजनों के आंसू

नहीं थम रहे रोहिताश लांबा के परिजनों के आंसू

केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, शांति धारीवाल, प्रताप सिंह खाचरियावास समेत राजस्थान के कई बड़े नेता शहीद के घर पहुंचे। पार्थिव देह के साथ आए सेना और पुलिस के जवानों के साथ बड़ी संख्या में मौजूद रहे। शवयात्रा के दौरान लोगों की ओर से लगाए जा रहे देशभक्ति के नारों से आसमां गूंजता रहा।

बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में राजस्थान के पांच जवानों के साथ शहीद हुए रोहिताश लांबा के दो बच्चे हैं। तीन महीने पहले उनके घर बेटी का जन्म हुआ था जिसका चेहरा भी रोहिताश नहीं देख पाए थे। उनका दो साल का बेटा तो ये भी नहीं जानता कि जो पिता जल्द वापस लौटकर आने का वादा कर गए थे, वो अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

ड्यूटी पर लाैटने 48 घंटे के दौरान ही शहीद हुए जीतराम

ड्यूटी पर लाैटने 48 घंटे के दौरान ही शहीद हुए जीतराम

जीतराम गुर्जर सीआरपीएफ की 92वीं बटालियन में जवान के पद पर तैनात था। जीतराम गुर्जर के पिता किसान और भाई विक्रम सिंह बेरोजगार हैं। ऐसे में बेटे की शहादत ने उन्हें काफी दुखी कर दिया है। शनिवार सुबह शहीद जीतराम गुर्जर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान पूरा गांव इस अंतिम विदाई में शामिल हुआ और शहीद हुए जवान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

शहीद के भाई विक्रम सहित पूरे गांव ने सरकार से खून के बदले खून की मांग की है। जीतराम के दो बेटियां हैं। शहीद के अंतिम विदाई के समय ग्रामीणों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। वहीं बताया जा रहा है कि शहीद के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। शहीद जीतराम का परिवार एक झोपड़ी में गुजर बसर करता है। उल्लेखनीय है कि जीतराम मंगलवार को ही जम्मू कश्मीर में ड्यूटी पर लौटा था। महज 48 घंटों बाद ही शहीद हो गया।

तीन साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, कोई नहीं रोक पाया आंसू

तीन साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, कोई नहीं रोक पाया आंसू

तीन साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, कोई नहीं रोक पाया आंसू धौलपुर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद धौलपुर के भागीरथ सिंह को शनिवार को अंतिम विदाई दी गई। शहीद भागीरथ सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग उमड़े। शहीद के 3 वर्षीय बेटे विनय ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी तो कोई आंसू नहीं रोक पाया। लोगों ने शहीद भागीरथ और भारत जिन्दाबाद के नारों से आसमां गूंजा दिया। केन्दीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान सरकार की मंत्री ममता भूपेश भी शहीद भागीरथ के घर पहुंचीं।

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