राजस्थान: जब संकट में आए अशोक गहलोत तो फिर याद आ गईं वसुंधरा राजे, सदन में ही पूछ लिया "आपने कैसे किया"
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के रिश्ते चर्चा में रहते हैं। गहलोत और राजे प्रदेश के दिग्गज और असरदार नेता हैं। सीएम गहलोत ने सदन में वसुंधरा से राय लेकर फिर चर्चा को हवा दे दी है।
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करीब ढाई दशक से बारी बारी से राज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहली बार 1998 में राजस्थान के मुख्यमंत्री बने थे। वसुंधरा राजे 2003 में पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। माना जाता है कि दोनों नेताओं की प्रदेश की जनता और अपनी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर गहरी पकड़ है। सियासी गलियारों में अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे की आपसी समझ को लेकर चर्चा बनी रहती है। दोनों एक दूसरे के सम्मान और प्रतिष्ठा का ख्याल रखते आए हैं। साल 2020 में जब अशोक गहलोत की सरकार पर संकट आया तब भी पायलट गुट ने गहलोत सरकार बचाने में वसुंधरा राजे की भूमिका होने का आरोप लगाया था। एक बार फिर जब सीएम गहलोत पर संकट आया तो गहलोत को तुरंत वसुंधरा राजे याद आ गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को विधानसभा में जब बजट भाषण पढ़ रहे थे। तब सीएम गहलोत तकरीबन आठ मिनट तक पुराना बजट भाषण पढ़ते रहे। इस पर सदन में विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। गहलोत सदन में ही वसुंधरा राजे से पूछ बैठे कि वसुंधरा जी आपने भी बजट पेश किया है। आपने कैसे किया था। यह पूरा संवाद सदन के पटल पर रिकॉर्ड में आ रहा था। इससे प्रदेश में एक बार फिर गहलोत और वसुंधरा के रिश्तों पर चर्चा शुरू हो गई है।

सीएम गहलोत ने ली वसुंधरा राजे से राय
बजट भाषण को लेकर सदन में जब बहस चल रही थी तो सीएम गहलोत ने वसुंधरा राजे का नाम लेते हुए कहा कि वसुंधरा जी ने भी बजट पेश किया है। करेक्शन होता है। आप ने भी करेक्शन कराया था। ऐसी कोई बात नहीं है। इस पर वसुंधरा राजे ने तपाक से जवाब दिया। जो आपने किया है, डेट इज शियर कैयरलेसनेस। कोई भी मुख्यमंत्री इस तरीके से बिना अपने बजट को पढ़े, अपने कागज को लेकर ऐसे नहीं आ जाता है। अगर इस तरीके से होगा तो आई फील सॉरी कि राजस्थान का क्या होगा। इसलिए आप इन चीजों को यहाँ मत उठाइए। इसके बाद गहलोत ने उनकी बात पर हामी भर दी। सीएम गहलोत ने सॉरी बोलकर बजट भाषण पढ़ना शुरू किया।
वसुंधरा राजे हैं भाजपा का बड़ा चेहरा
प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। वसुंधरा दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। सीएम गहलोत ने खुद उनसे बजट पर राय लेकर यह साफ कर दिया है। प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा एक बार फिर वसुंधरा राजे को चुनाव में पार्टी का चेहरा बना सकती हैं। वसुंधरा की राजनीतिक समझ और जनता में लोकप्रियता उन्हें पार्टी के अन्य नेताओं से अलग कद प्रदान करती है। राजस्थान में भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार हैं। लेकिन सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं में राजे की पकड़ होने के कारण भाजपा में उनके नाम पर ही सहमति मानी जा रही है।













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