राजस्थान: महाकुंभ में जाट समुदाय ने उठाई मुख्यमंत्री की मांग, हनुमान बेनीवाल कर सकते हैं समाज की उम्मीद पूरी

जाट महाकुंभ के जरिए प्रदेश में जाट मुख्यमंत्री की मांग तो उठ गई है। लेकिन सियासी समीकरणों के मुताबिक कांग्रेस और भाजपा में जाट मुख्यमंत्री संभव नहीं है। ऐसे में प्रदेश के जाट समुदाय की निगाह हनुमान बेनीवाल पर टिक गई है।

hanuman beniwal

राजस्थान में जाट महासभा ने रविवार को जाट महाकुंभ के जरिए एक बार फिर प्रदेश में जाट मुख्यमंत्री होने की मांग उठाई गई है। प्रदेश में सभी जाट नेताओं ने एकजुट होकर यह मांग उठाई। जाट महाकुंभ में ओबीसी आरक्षण की विसंगतियों और राजनीति में जाट समाज की भागीदारी को लेकर भी को लेकर भी आवाज उठाई गई। राजनीति के जानकारों की मानें तो प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों के समीकरणों के मुताबिक बतौर मुख्यमंत्री जाट समुदाय नेतृत्व मुश्किल है। प्रदेश में अगर जाट समुदाय की उम्मीद को कोई पूरा कर सकता है तो हनुमान बेनीवाल ही ऐसे नेता हैं। जो जाट समुदाय को मुख्यमंत्री का नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। पश्चिमी राजस्थान से उभरकर देश-प्रदेश की राजनीति में अपना मुकाम बनाने वाले हनुमान बेनीवाल राजस्थान में बतौर मुख्यमंत्री जाट समुदाय को नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। जानकार बताते हैं कि इसकी अहम वजह यह है कि जाट समुदाय के युवाओं का झुकाव भी बेनीवाल और उनकी पार्टी आरएलपी की ओर ज्यादा है। आरएलपी प्रदेश में मजबूत पार्टी बनकर तेजी से उभरी है। कांग्रेस और भाजपा में गोविंद सिंह डोटासरा और सतीश पूनिया जैसे नेताओं की बतौर प्रदेश अध्यक्ष भागीदारी तो है। लेकिन पार्टी कभी इन्हें बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं करेगी।

गोविंद सिंह डोटासरा और सतीश पूनिया की भागीदारी

राजस्थान में कांग्रेस ने गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा ने सतीश पूनिया को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है। गोविंद सिंह डोटासरा दूसरी बार विधायक हैं। वही सतीश पूनिया दो बार चुनाव हार कर आमेर सीट से पहली बार विधायक चुने गए हैं। जाट मुख्यमंत्री की मांग उठाने वाले कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी खुद एक बार विधायक रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के टकराव के चलते किसी भी सूरत में जाट मुख्यमंत्री बनना संभव नहीं है। सचिन पायलट राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। वहीं भाजपा ने सतीश पूनिया को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष तो बना रखा है। लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना इसलिए कम है। क्योंकि पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, ओम माथुर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सांसद दिया कुमारी सहित अनेक मुख्यमंत्री के दावेदार है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर भारी गुटबाजी भी है। प्रदेश में जाट मुख्यमंत्री की बात करें तो भाजपा ने हरियाणा जैसे राज्य में भी जाट मुख्यमंत्री नहीं बनाया है।

प्रदेश की सियासत में हनुमान बेनीवाल का बढ़ता कद

राजस्थान में पिछले कुछ सालों में हनुमान बेनीवाल का कद सियासत में बड़ा हुआ है। हनुमान बेनीवाल प्रदेश में तीसरे मोर्चे के गठन में तो सफल नहीं हो सके। लेकिन अपनी पार्टी बनाने के बाद पश्चिमी राजस्थान में वे जाटों के बड़े नेता बनकर उभरे हैं। हनुमान बेनीवाल खुद नागौर से भाजपा के साथ गठबंधन में सांसद हैं। वही उनकी पार्टी आरएलपी से मौजूदा सरकार में तीन विधायक मौजूद है। प्रदेश में पिछले कुछ समय से आरएलपी की लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हुआ है। इसकी बड़ी वजह जाट समुदाय के युवाओं का हनुमान बेनीवाल की तरफ झुकाव है। जाट महासभा ने इस महाकुंभ में हनुमान बेनीवाल से परहेज रखा। उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित करने की महज औपचारिकता पूरी की गई। प्रदेश में जिस तरह बेनीवाल का ग्राफ बढ़ रहा है। आने वाले समय में जाट समुदाय की उम्मीदों को पूरा करने के लिए बेनीवाल सक्षम किरदार के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं।

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