Rajasthan News : मुख्यमंत्री पद पाने की कश्मकश में अपनी ही विधानसभा को भूले सचिन पायलट, जानें टोंक का हाल
मुख्यमंत्री पद पाने की कश्मकश में लगे सचिन पायलट का अपना विधानसभा क्षेत्र टोंक पिछड़ता जा रहा है। वन इंडिया हिंदी प्रदेश की ऐसी विधानसभाओं के विकास की पड़ताल कर रहा है। पढ़िए खास रिपोर्ट।

Rajasthan News : राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की कश्मकश में अपनी ही सरकार से संघर्ष कर रहे पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक को भुला बैठे हैं। सचिन पायलट टोंक से विधायक हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री रहते हुए भी टोंक में बहुत ज्यादा विकास कार्य नहीं करवा पाए हैं। अपने विधायक कार्यकाल में टोंक में ऐसा कोई छाप छोड़ने वाला विकास कार्य नहीं करवा सके. जिसके लिए टोंक की आम जनता उन्हें याद करें। राजनीति के जानकार यह भी बताते हैं कि पायलट जब भी टोंक के दौरे पर होते हैं तो उनकी दिलचस्पी शहर के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा होती। स्थानीय विधायक होते हुए भी वे शहर पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। टोंक शहरवासियों का कहना है कि हमारे क्षेत्र से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री विधायक हैं। लेकिन विकास कार्यों के मामले में हम आम विधायक से भी ज्यादा पिछड़े हुए हैं। पायलट से हमने जितनी बड़ी उम्मीदें की थी। वे उन पर खरे नहीं उतर पाए। मुख्यमंत्री पद की लालसा में सचिन पायलट ने अपने विधानसभा क्षेत्र को अनदेखा कर दिया। आपको बता दें सचिन पायलट ने टोंक शहर से विधानसभा चुनाव लड़ा था। पायलट भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वदी पूर्व कैबिनेट मंत्री यूनुस खान को तकरीबन 54 हजार मतों से हराया था।
टोंक में अब भी बुनियादी विकास का अभाव
सचिन पायलट जब टोंक से विधायक चुने गए थे। तब क्षेत्रवासी बेहद उत्साहित थे। पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ने उनके विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उनका नेता प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार था। टोंक के निवासी निजामुद्दीन (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि जब सचिन पायलट हमारे यहाँ से विधायक बने तब हम उम्मीदों से लबरेज थे। हमें लगा था अब टोंक का कायाकल्प हो जाएगा। प्रदेश के बीचोंबीच बसे टोंक की दशा और दिशा सुधर जाएगी। लेकिन आज भी हालात जस के तस हैं। इससे बेहतर विकास तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में करवाया है। निजामुद्दीन बताते हैं कि आज जोधपुर राजस्थान के नक़्शे में उभर चुका है। वहीं टोंक शहर की हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले राहुल शर्मा (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि सचिन पायलट जैसे दिग्गज नेता के विधायक बनने के बाद भी शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं में कोई बेहतर विकास नहीं हुआ है। पायलट ने जब टोंक से चुनाव लड़ा था। तब रेल लाने का वादा किया था। टोंक में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की बात कही थी। लेकिन टोंक में न तो अब तक रेल आई और ना ही मेडिकल कॉलेज बन पाई। यहाँ तक की शहर की सड़के और स्ट्रीट लाइटें भी दुरुस्त नहीं है। राहुल आगे बताते हैं शहर के आम आदमी को सचिन पायलट से कोई काम हो तो मिलना भी मुश्किल होता है। वे अक्सर अपने स्वजातीय बंधुओं से घिरे रहते हैं। पायलट के विधायक बनने के बाद शहर में गुटबाजी भी हावी हुई है।
यूनुस खान को हराकर विधायक बने पायलट
राजस्थान में साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए टोंक से विधायक का चुनाव लड़ा था। इस दौरान भाजपा ने टोंक सीट से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने करीबी माने जाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री यूनुस खान को चुनाव मैदान में उतारा था। पार्टी ने डीडवाना सीट से उनको टिकट नहीं दिया था। वसुंधरा राजे के दखल के बाद यूनुस खान को टोंक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया। ऐसे में नया क्षेत्र होने की वजह से इस सीट पर उनका जीतना नामुमकिन था। सचिन पायलट को इसका लाभ मिला और वे टोंक से विधायक चुने गए।












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