Rajasthan News: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आखिर इस वजह से रद्द करना पड़ा कोटा दौरा, जानिए पूरा मामला
Rajasthan News: राजस्थान के कोटा में चंबल रिवर फ्रंट का मंगलवार को लोकार्पण किया गया। चंबल रिवर फ्रंट के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शामिल होना था। लेकिन कार्यक्रम से पहले ऐन वक्त पर उनका यह दौरा रद्द हो गया।अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 13 सितंबर को कोटा दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कोटा दौरा रद्द किए जाने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सीएम गहलोत का दौरा रद्द होने को लेकर कई तरह की कयास लगाए जा रहे हैं।
देर रात ट्वीट कर दी जानकारी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को देर रात 2.28 बजे ट्वीट कर कहा कि हमारे वरिष्ठ साथी यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कोटा रिवर फ्रंट के रूप में हाडोती को एक ऐतिहासिक सौगात दी है। हाडोती पर्यटन के क्षेत्र में पीछे रहा है। लेकिन रिवर फ्रंट यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित होगा और कोटा के विकास की नई इबादत लिखेगा। पिछले कार्यकाल में धारीवाल ने कोटा को सेवेन वंडर्स की सौगात दी थी। जिस पर अब यहां फिल्मों की शूटिंग होती है। 12 और 13 सितंबर को कोटा के लोकार्पण मेरे द्वारा प्रस्तावित था। जिसका मैं बेसब्री से इंतजार कर रहा था। लेकिन किसी कारणवश में 12 सितंबर के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाऊंगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि वह 13 सितंबर को कोटा के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।

सीएम के दौरे को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किस कार्यक्रम के रद्द होने के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कोटा दौरा रद्द होने की कोई अहम वजह सामने नहीं आ सकी है। कोटा रिवर फ्रंट के लोकार्पण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, मंत्री शांति धारीवाल, आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत सहित कई विधायक और बोर्ड के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मौजूद रहे। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। वहीं भाजपा नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी आरोप लगाया था कि चंबल घड़ियाल सेंचुरी के इकोसिस्टम जोन में इस रिवर फ्रंट का निर्माण किया गया है। इसे प्रहलाद गुंजल ने गैरकानूनी बताते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इसका लोकार्पण नहीं करने की बात कही थी। गुंजल ने इसे असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1 जुलाई 2023 को इसके निर्माण पर भी आपत्ति जताई है।












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