राजस्थान में प्री-मैच्योर बच्ची ने 40 दिन में दी कोरोना को मात, 7 दिन वेंटिलेटर पर गुजारे
जयपुर, 5 जुलाई। राजस्थान की राजधानी जयपुर के महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में लगभग 30 हफ्ते की एक प्री-मैच्योर बच्ची ने जन्म लिया उस दौरान उसका वजन सिर्फ एक किलो था। सबसे बड़ी चिंता ये थी कि वह कोरोना संक्रमित थी। इसी के चलते वह 40 दिन अस्पताल में भर्ती रहीं, जिनमें से मासूम बच्ची ने 7 दिन को वेंटिलेटर पर ही गुजारे। इस दौरान डेढ़ माह तक मां अपनी बच्ची का चेहरा तक भी नहीं देख पाई। आखिरकार 25 जून 2021 को इस सबसे छोटी वॉरियर ने सबसे बड़ी महामारी को मात दे दी और मां की गोद में वापस लौटी।

इस पर राजस्थान के नागौर जिले के कुचामन सिटी के अड़कसर गांव की सुनीता ने बताया कि बच्ची का जन्म होने के बाद मुझे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया था। मैं उसे देख भी नहीं पाई। खुद कोरोना से गुजर रही थी। लेकिन दिल-दिमाग में बच्ची का ख्याल था। करीब डेढ़ महीने बाद उसका चेहरा देखा।
महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट के प्रभारी डॉ. आरएन सेहरा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिंकू सैनी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील गोठवाल ने बताया कि प्री-मैच्योर (30 सप्ताह) और एक किलो वजन की होने के बावजूद गंभीर कोरोना को हराने वाली ये सबसे कम उम्र और कम वजन की सरकारी अस्पताल की यह पहली बच्ची है।
अब उसका वजन बढ़कर डेढ़ किलो होने और हालत स्थिर होने पर अस्पताल से 25 जून को डिस्चार्ज कर दिया गया है। इसे बचाना हमारे लिए भी बड़ी चुनौती थी। पहले वेंटिलेटर, सी-पैप और फिर आक्सीजन पर रखा गया।












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