OPINION: विधानसभा चुनाव से पहले अशोक गहलोत का मास्टरस्ट्रोक साबित हुई मुफ्त बिजली योजना, जानिए सियासी मायने
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में सत्ता वापसी की कोशिश में जुटे हैं। सीएम गहलोत अपनी जन कल्याणकारी योजनाओं के जरिए में सत्ता में वापसी की तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश में एक से बढ़कर एक योजनाएं लागू की जा रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधासभा चुनाव से पहले प्रदेशवासियों के लिए 100 यूनिट बिजली पूरी तरह मुफ्त कर चुनावी मास्टर स्ट्रोक खेला है। राजनीति के जानकारों की मानें तो सीएम गहलोत के इस दांव ने प्रदेश में विपक्ष की मुसीबतें बढ़ा दी है। विपक्षी दलों को सीएम गहलोत के इस दांव का कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। सीएम गहलोत की इस घोषणा से प्रदेश में आमजन को सीधा लाभ मिलने वाला है। पिछले दिनों बूंदी में आम आदमी पार्टी की एक जनसभा के दौरान पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने तो यहाँ तक वादा कर दिया कि अगर हम सत्ता में आए तो प्रदेश में 300 यूनिट बिजली मुफ्त देंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में बड़ी बहस छेड़ दी है। साफ तौर पर प्रदेश में विपक्ष के सामने मुफ्त बिजली बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष को हर हाल में इसका तोड़ निकालना ही होगा। प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जनकल्याणकारी योजनाओं से आमजन का झुकाव सीधे तौर पर उनके पक्ष में बढ़ता जा रहा है।
क्या है गहलोत सरकार की घोषणा
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में 100 यूनिट बिजली मुफ्त कर विपक्षियों को चौंका दिया है। गहलोत सरकार की इस घोषणा के मुताबिक 100 यूनिट प्रति माह तक बिजली उपभोक्ता वालों का बिजली का बिल शून्य होगा। उन्हें पूर्ववत कोई बिल नहीं देना होगा 100 यूनिट प्रति माह से ज्यादा उपभोग करने वाले वर्ग के परिवारों को पहले भी 100 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी। यानी कितना भी बिल क्यों ना आए पहले 100 यूनिट का कोई विद्युत शुल्क नहीं देना होगा। मध्यम वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए 200 यूनिट प्रतिमाह बिजली उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को पहले 100 यूनिट बिजली फ्री देने के साथ 200 यूनिट तक के स्थाई शुल्क फ्यूल सरचार्ज एवं तमाम अन्य शुल्क माफ होंगे और इसका भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। आपको बता दे की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2023-24 के बजट में मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक उपभोग करने पर बिजली निशुल्क करने की घोषणा की थी। सीएम गहलोत की यह योजना एक जून से प्रदेश में प्रभावित हो गई है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 1.10 करोड़ से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा होगा।

प्रदेश के किसानों को मिलेगी राहत
राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क कृषि बिजली योजना के जरिए गहलोत सरकार ने किसानों को भी राहत देने की कोशिश की है। राज्य सरकार द्वारा आमजन को महंगाई से राहत देने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की गई है। किसानों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री निशुल्क कृषि बिजली योजना शुरू की गई है। इस योजना की शुरुआत साल 2023 में हुई है। मुख्यमंत्री निशुल्क कृषि बिजली योजना शुरू करने का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के किसानों को कृषि उपभोग के लिए निशुल्क बिजली देकर उन्हें आर्थिक रूप से सम्बल बनाना है। राजस्थान में गहलोत सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है। जो पहले से ही किसानों को 90 पैसे प्रति यूनिट की दर से कृषि उपयोग के लिए बिजली प्रदान कर रही है। प्रदेश के किसानों के भार को और कम करने के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री निशुल्क कृषि बिजली योजना शुरू करने का फैसला किया गया। मुख्यमंत्री निशुल्क कृषि बिजली योजना के तहत प्रदेश के किसानों को निशुल्क बिजली प्रदान की जाएगी। योजना के तहत केवल 2000 यूनिट प्रति माह की बिजली उपभोग पर ही निशुल्क दर लागू होगी। यानि जिन किसानों द्वारा प्रति माह 2000 यूनिट या उससे कम की बिजली कृषि कार्य के लिए इस्तेमाल की जाएगी। उन सब किसानों का बिजली का बिल शून्य आएगा। इस योजना का लाभ प्रदेश के तकरीबन 11 लाख किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री निशुल्क कृषि बिजली योजना के अंतर्गत निशुल्क बिजली का लाभ लेने के लिए किसानों को अपना पंजीकरण कराना होगा। सीएम गहलोत के इस फैसले से किसानों को बड़ी राहत देने की कोशिश की गई है।
सीएम गहलोत की मुफ्त बिजली योजना के सियासी मायने
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में 100 यूनिट बिजली मुफ्त करके बड़ा सियासी दांव चल दिया है। सियासी गलियारों में सीएम गहलोत के इस दांव के मायने निकाले जा रहे हैं। चर्चा है कि राजस्थान के बॉर्डर पर दो राज्य ऐसे हैं जिनमें बिजली फ्री का बड़ा असर है। वहां की दोनों सरकारें फ्री बिजली को मुद्दा बनाए हुए हैं। यह राज्य दिल्ली और पंजाब है। यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। पिछले दिनों राजस्थान में तिरंगा यात्रा के दौरान दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ने मुफ्त बिजली का मुद्दा उठाया था। ऐसे में राजस्थान सरकार बिजली के मुद्दे को गंभीरता लिया है। राजनीति के जानकार बताते हैं दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्री ने बिजली के बिल को लेकर राजस्थान में गहलोत सरकार पर लगातार हमले किए हैं। ऐसे में उसे चुनौती देने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह बड़ा दांव चला है। सीएम गहलोत के इस दांव से प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को सीधे तौर पर फायदा होने की बात कही जा रही है। प्रदेश में अब 100 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली का बिल शून्य हो जाएगा।












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