OPINION: राजस्थान में नए जिलों का गठन कर देशभर में बदलाव के वाहक बने अशोक गहलोत, जानिए सियासी मायने
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मौजूदा कार्यकाल में घोषणाओं और योजनाओं का इतिहास रच दिया है। सीएम अशोक गहलोत आजादी के बाद देशभर में सबसे ज्यादा जिलों का गठन करने वाले मुख्यमंत्री बनकर उभरे हैं। बजट घोषणा के दौरान उनके इस ऐतिहासिक फैसले बाद अशोक गहलोत नए कीर्तिमान रचने वाले नेता बनकर उभरे हैं। ऐसा देश में पहली बार हुआ है। सीएम गहलोत ने पिछले दिनों प्रदेश में 19 नए जिलों और तीन नए संभाग बनाने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। उनके इस फैसले के बाद मानों विरोधियों में सन्नाटा सा छा गया। राजस्थान में 19 नए जिलों के गठन के बाद प्रदेश में 50 नए जिले हो गए हैं। गहलोत सरकार अब नए जिलों के गठन को लेकर नोटिफिकेशन जारी करने की तैयारी में हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस फैसले ने राजस्थान में कांग्रेस के भीतर ऑक्सीजन देने का काम किया है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम गहलोत के इस फैसले के बाद हौंसला बढ़ा है।
राजस्थान सबसे अधिक जिलों वाला तीसरा राज्य
वर्तमान में देश में सर्वाधिक जिले उत्तर प्रदेश में हैं। जहां जिलों की संख्या 75 है। दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश है। यहाँ कुल 55 जिले हैं। राजस्थान में 19 नए जिलों की घोषणा होने के बाद अब जिलों की संख्या 50 हो जाने पर यह देश का तीसरा सबसे अधिक जिलों वाला राज्य बन गया है। देश के अन्य राज्यों की बात करें तो तमिलनाडू में 38, बिहार में 38, महाराष्ट्र में 36, असम में 34, तेलंगाना में 33, गुजरात में 33, कर्नाटक में 31, ओडिसा में 30, छत्तीसगढ में 28, अरुणाचल प्रदेश में 25, झारखंड में 24, पंजाब में 23, पश्चिमी बंगाल में 23, हरियाणा में 22, मणिपुर में 16, केरल में 14, आंध्रप्रदेश में 13, उत्तराखंड में 13, हिमाचल प्रदेश में 12, नागालैंड में 12, मिजोरम में 11, मेघालय में 11, त्रिपुरा में 8, सिक्किम में 4 और गोवा में 2 जिले हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत ने तोड़े अब तक के सारे रिकॉर्ड
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में जिला बनाने के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आजादी के बाद भारत में पहली बार एक साथ किसी राज्य में 19 जिले बनाए गए हैं। तब भी जब किसी प्रदेश को बांट गया हो। फिर चाहे उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना उत्तराखंड की बात हो या फिर मध्यप्रदेश से अलग होकर बना छत्तीसगढ़ हो। यहां तक की बिहार से अलग होकर बने झारखंड में भी इतने जिले नहीं बनें। दक्षिण में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना बंटवारे में भी इतने जिले नहीं बने हैं। आपको बता दें कि भौगोलिक रूप से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। यह सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी साझा करता है। ऐसे में प्रदेश में नए जिलों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रदेश के कई नेता नए जिलों के गठन को लेकर मांग भी कर रहे थे।
राजस्थान में इन नए जिलों और संभाग की घोषणा
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनावी साल में बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेला है। बजट सत्र के दौरान वित्त एवं विनियोग विधेयक पर चर्चा के उपरांत मुख्यमंत्री गहलोत ने कई घोषणाएं की। इनमें सबसे बड़ी घोषणा प्रदेश में 19 नए जिले बनाने और 3 नए संभाग मुख्यालय बनाने की है। प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए यह घोषणा की गई है। नए बनाए जाने वाले जिलों में अनूपगढ, बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, दूदू, गंगापुरसिटी, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, जोधपुर पूर्व, जोधपुर पश्चिम, केकड़ी, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल, नीम का थाना, फलौदी, सलूम्बर, सांचौर और शाहपुरा शामिल हैं। अब तक राजस्थान में 33 जिले थे। हालांकि जयपुर और जोधपुर पहले से दो जिले हैं। ये दोनों जिले जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, जोधपुर पूर्व और जोधपुर पश्चिम में मर्ज होंगे। नए जिलों की घोषणा के बाद अब प्रदेश में 50 जिले हो गए हैं। साथ ही बांसवाड़ा, पाली और सीकर में नए संभाग मुख्यालय खोलने की घोषणा की गई है। चर्चा है कि गहलोत सरकार जल्द ही इनको लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर सकती है।
कैबिनेट की सहमति के बाद नए जिलों में हल्का बदलाव
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसी साल बजट सत्र के दौरान राजस्थान में 19 नए जिलों और 3 नए संभाग के गठन का ऐलान किया था। सीएम की इस घोषणा के बाद सीमांकन को लेकर विरोध हुआ। इसके बाद सीएमआर पर कैबिनेट की बैठक में जिलों के गठन में बदलाव को मंजूरी दे दी गई। गहलोत के मंत्रियों ने लोगों की जनभावना को मुख्यमंत्री के सामने रखा। इनमें जयपुर और जोधपुर शहर के दो टुकड़े नहीं किए जाने और दूदू में शामिल की जाने वाली तहसीलें प्रमुख थी। जनभावना को ध्यान में रखते हुए सीएम गहलोत ने बदलाव को मंजूरी दे दी। इस बदलाव में जयपुर शहर को जयपुर उत्तर और जयपुर दक्षिण में विभाजित किए जाने के बजाय जयपुर शहर और जयपुर ग्रामीण जिले के गठन को स्वीकृति दी गई। साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फैसला किया कि दूदू में शामिल नहीं होने को लेकर विरोध कर रही तहसीलों को जयपुर ग्रामीण में शामिल किया जाएगा।
प्रदेश में नए जिलों के गठन से आमजन में खुश
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भले ही चुनाव से पहले यह मास्टर स्ट्रोक लगाकर आमजन से चुनावी वादा किया हो। लेकिन जहां तक नए जिले बन रहे हैं। इससे उन जिलों के लगभग सभी लोग इस सौगात से काफी खुश है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि फिलहाल तो सबकी निगाहें इस बात को लेकर है कि कितने जल्दी नए जिले अस्तित्व में आते हैं और इससे उपजने वाले गतिरोध को गहलोत सरकार किस तरह दूर करेगी। सीएम गहलोत के इस फैसले के बाद जहां विपक्ष ने उनका विरोध किया है। वहीं आमजन ने उनके फैसले का स्वागत भी किया है। जाहिर तौर पर अशोक गहलोत के इस फैसले के बाद प्रदेश में उनका और कांग्रेस का ग्राफ तेजी से बढ़ा है।












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