Lok Sabha Chunav 2024: राजस्थान में मोदी-शाह को भाजपा नेताओं पर नहीं भरोसा, कांग्रेसी नेताओं को दे रहे टिकट
Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजस्थान को लेकर उठापटक तेज हो गई है। प्रदेश में दोनों दलों के भीतर टिकटों को लेकर पेचीदगियां बढ़ गई है। भाजपा में लगातार उपेक्षा से आहत हाड़ौती और वसुंधरा राजे के करीबी नेता प्रह्लाद गुंजल ने कांग्रेस में शामिल होकर प्रदेश की सियासत में भूचाल खड़ा कर दिया है। राहुल कस्वां को भी टिकट नहीं दिए जाने के बाद कांग्रेस में शामिल होकर टिकट लेना पड़ा।
दल बदलने का यह बवंडर भाजपा में ही नहीं कांग्रेस में जारी है। पिछले दिनों कांग्रेस के कई नेता भाजपा में शामिल हुए। पार्टी द्वारा कुछ नेताओं को लोकसभा चुनाव के लिए टिकट भी दे दिया गया।
भाजपा द्वारा कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल कर टिकट दिए जाने से कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल कमजोर होकर नाराजगी बढ़ी है। सियासी गलियारों में इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या मोदी-शाह को राजस्थान के भाजपा नेताओं पर भरोसा नहीं है? राजनीतिक समीक्षक इसे पार्टी की बौखलाहट से भी जोड़कर देख रहे हैं।
ज्योति मिर्धा और महेंद्र जीत मालवीय को दिया टिकट
राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं। पार्टी प्रदेश की 15 सीटों पर टिकटों का एलान कर चुकी है। पार्टी ने इन 15 में से 2 सीट पर कांग्रेस से आए नेताओं को टिकट दिया है। चर्चा है कि शेष 10 सीटों पर भी पार्टी कांग्रेस से आए नेताओं को चुनाव मैदान में उतार सकती है। पिछले दिनों पूर्व मंत्री महेंद्र जीत मालवीय, ज्योति मिर्धा, रिजु झुनझुनवाला, लालचंद कटारिया भाजपा में शामिल हुए।
पार्टी ने ज्योति मिर्धा को नागौर और महेन्द्रजीत मालवीय को बांसवाड़ा से टिकट दे दिया है। अब लालचंद कटारिया को जयपुर ग्रामीण, रिजु झुनझुनवाला को भीलवाड़ा और मानवेंद्र सिंह जसोल को राजसमंद से टिकट देने की चर्चा है। पार्टी के नेता इसे चुनाव जीतने की रणनीति का हिस्सा भी बता रहे हैं। लेकिन इससे पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।

वसुंधरा राजे के नेतृत्व में दो बार जीती 25 सीटें
राजनीतिक समीक्षक कहते हैं कि राजस्थान में साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में 25 की 25 सीटें भाजपा की झोली में गई थी। राजस्थान में 2013 में भाजपा की सरकार बनी। वसुंधरा राजे ने प्रदेश के मुखिया की कमान संभाली।
लोकसभा चुनाव 2014 में उनके नेतृत्व में 25 सीटें भाजपा को जिताकर दी। इसके बाद 2019 में भी पार्टी ने वसुंधरा राजे की सलाह से टिकट वितरण किया। इस चुनाव में भी भाजपा ने प्रदेश की 25 सीटें जीती। हाल ही में हुए राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश की कमान भजन लाल शर्मा को दे दी गई है।
पार्टी ने वसुंधरा राजे को दरकिनार कर दिया है। अब पार्टी वसुंधरा राजे से कोई संवाद नहीं कर रही है। न ही उनसे टिकट वितरण को लेकर कोई चर्चा की जा रही है। बताया जा रहा है कि वसुंधरा राजे पार्टी से नाराज भी हैं।
भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में आक्रोश
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल कर लोकसभा चुनाव के लिए टिकट दिए जाने के बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ गया है। नाम नहीं छपने की शर्त पर बीजेपी के एक बड़े नेता का कहना है कि क्या पार्टी ने नेता इतने कमजोर हो गए जो भाजपा नेतृत्व उन पर भरोसा नहीं जता पा रहा है।
वे कहते हैं कि कार्यकर्ता और नेता कल तक जिन नेताओं को कोसते थे। उनको नेता मानकर अब कार्यकर्ताओं को काम करना पड़ेगा। इससे कार्यकर्ताओं की मनोस्थिति पर असर पड़ेगा।
इसके साथ ही उन नेताओं का क्या होगा जो पार्टी से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं राजनीति के जानकार इसे भाजपा का शीर्ष नेतृत्व की बौखलाहट बता रहे हैं। वे पार्टी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि क्या भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को राजस्थान के नेताओं पर भरोसा नहीं है?












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