6 माह की बेटी की मौत के बाद रिटायरमेंट पर डॉक्टर ने PF के 19 लाख रुपए कॉलेज छात्राओं के लिए खरीदी बस

जयपुर। नौकरी से रिटायर होने के बाद अक्सर लोग अपने पीएफ के पैसों को भविष्य के लिए सुरक्षित करते हैं, मगर इस मामले में राजस्थान के रामेश्वर प्रसाद यादव ने जो कदम उठाया वो मिसाल बन गया।

डॉक्टर की छह माह की बेटी की हो गई थी मौत

डॉक्टर की छह माह की बेटी की हो गई थी मौत

डॉ. आरपी यादव राजस्थान के जयपुर जिले के कोटपुतली के गांव चुरी के रहने वाले हैं। बरसों पहले डॉ. यादव की 6 महीने की बेटी की मौत हो गई थी। बेटी की मौत ने डॉ. रामेश्वर यादव को झकझोर कर रख दिया।

80 बेटियां निशुल्क कर रहीं सफर

80 बेटियां निशुल्क कर रहीं सफर

ऐसे में रिटायर होने पर अन्य बेटियों के लिए कुछ करने की ठानी और अपने पीएफ खाते से 19 लाख रुपए निकालकर बेटियों के लिए बस खरीद डाली। अब इस बस से आस-पास के कई गांवों की 70-80 बालिकाएं बिना किसी किराए के राजकीय पाना देवी महाविद्यालय में पढ़ते जाती हैं।

बालिकाओं का पूजन भी करते हैं

बालिकाओं का पूजन भी करते हैं

डॉ. आरपी यादव ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि छात्राओं को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अभाव में कॉलेज आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा था। खास बात यह है कि डॉक्टर आरपी यादव और उनकी पत्नी प्रतिदिन बालिकाओं का पूजन कर और उनका मुंह मीठा करवाकर बस में उनको बैठाने जाते हैं।

 पेंशन से देते हैं चालक को वेतन

पेंशन से देते हैं चालक को वेतन

बता दें कि बस खरीदने के पीएफ खाते से 19 लाख ​रुपए निकलवाने के ​अलावा डॉ. आरपी यादव अपनी पेंशन 68 हजार 932 रुपए में से करीब 48 हजार रुपए बस चालक व बस के रखरखाव पर खर्च करते हैं।

 दस किमी दूर पैदल जाने को थीं मजबूर

दस किमी दूर पैदल जाने को थीं मजबूर

मीडिया से बातचीत में डॉ. आरपी यादव बताते हैं कि एक दिन वे पत्नी के साथ अपनी कार में सीकर जिले के नीमकाथाना से कोटपुतली आ रहे थे। उस दिन तेज बारिश हो रही थी। रास्ते में चार छात्राएं कीचड़ में सनी हुईं पैदल ही कॉलेज जा रही थी। डॉक्टर यादव ने कार रोकी और छात्राओं से बात की तो पता चला कि इस रास्ते में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अभाव है। इसलिए उन्हें पैदल ही दस किलोमीटर दूर कॉलेज जाना पड़ता है।

 इसलिए खरीद डाली बस

इसलिए खरीद डाली बस

छात्राओं ने डॉक्टर व उनकी पत्नी को यह भी बताया कि इस रूट पर एक प्राइवेट बस चलती है। उसमें लड़के छात्राओं से छेड़छाड़ करते हैं। छात्राओं की यह सुनकर डॉक्टर यादव को अपनी दिवंगत बेटी की याद आ गई। उन्होंने सोचा यदि अपनी बेटी जीवित होती तो उसके लानन-पालन और ब्याह-शादी अब तक कितना खर्च आता। उतनी ही राशि खर्च करके वे इन बेटियों को सुविधा उप​लब्ध करवाने की ठानी।

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