जयपुर हेरिटेज नगर निगम : मेयर बनाने के लिए कांग्रेस ने पार्षदों की बाड़ाबंदी, निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं 'खेल'
जयपुर। कांग्रेस और भाजपा के बीच कई राज्यों में हुए सत्ता संघर्ष के लिए अब 'बाड़ाबंदी' को लेकर राजस्थान में एक नया ट्रेंड सामने आ रहा है। करीब दो साल में कांग्रेस ने राजस्थान के होटल व रिसोर्ट में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात के विधायकों की चार बार बाड़ाबंदी की गई। इस बार राजस्थान सरकार पर कथित संकट के बाद अब शहरी सरकार को लेकर एक बार फिर कांग्रेस ने बाड़ाबंदी की है।

जयपुर हेरिटेज नगर निगम में मुकाबला कड़ा
जयपुर हेरिटेज नगर निगम पार्षदों की बाड़ाबंदी अब दिल्ली रोड स्थित जयबाग रिज़ॉर्ट में की गई है। रिजॉर्ट में पार्षदों ने आज क्रिकेट मैच खेल कर वक्त बिताया। वहीं भाजपा ने भी प्रशिक्षण शिविर के नाम पर पार्षदों की बाड़ाबंदी कर रखी है। बता दें कि जयपुर हेरिटज नगर निगम के सौ वार्डों में भाजपा के 42 व कांग्रेस के 47 और अन्य पार्षद 11 हैं। ऐसे में पाला बदलने की आशंका की वजह से पार्षदों की बाड़ाबंदी की गई है। पार्षदों ने क्रिकेट खेलकर समय बिताया।

पूर्व सीएम ने भी की थी विधायकों की बाड़ाबंदी
गौरतलब है कि राजस्थान में सत्ता संघर्ष के साथ ही बाड़ाबंदी का ट्रेड भी पुराना है। पहले व्यास व सुखाडिय़ा के बीच सत्ता के लिए हुई वोटिंग के समय भी दोनों गुटों के विधायक एक जगह एकत्रित हुए थे, लेकिन 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने सत्ता पर संकट की आशंका के बाद चोखी ढाणी रिसोर्ट में भाजपा विधायकों की बाड़ाबंदी की थी,तब शेखावत सत्ता बचा पाए थे।

दूसरे राज्यों के विधायकों की बाड़ाबंदी
इसके बाद प्रदेश में झारखंड, उत्तराखंड, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात व मध्यप्रदेश के विधायकों की बाड़ाबंदी हो चुकी है। राज्यसभा और आरसीए चुनावों में बाड़ाबंदी के बाद महाराष्ट्र के विधायकों की भी दो बार बाड़ाबंदी की गई, लेकिन मध्यप्रदेश को लेकर बाड़ाबंदी में साख नहीं बच सकी थी। अब देखने की बात यह है कि शहरी निकायों को लेकर कांग्रेस और भाजपा की बाड़ेबंदी में शहरी सरकार का ताज किसके माथे पर सजता है और किसकी आंखों से अश्रुधारा बहती है।












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