Rajasthan : MLA हेमाराम चौधरी बोले-डेढ़ साल से पी रहे जहर का घूंट, अब गहलोत बदलो, कांग्रेस बचाओ
बाड़मेर। राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार पर आया राजनीतिक संकट फिलहाल टलता नजर नहीं आ रहा है। प्रदेश में कई दिन से सियासी ड्रामा चल रहा है, मगर पूरी पिक्चर अभी बाकी है। बगावत पर उतरे उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थक विधायकों ने भी अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल रखा है। उन्हीं में से एक हैं बाड़मेर के गुड़ामालानी से विधायक हेमाराम चौधरी। सोमवार को मीडिया से बातचीत में विधायक चौधरी ने कहा कि 'गहलोत बदलो, कांग्रेस बचाओ' की बात कही है।
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तीस विधायक पायलट के साथ
गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी ने कहा कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार में डेढ़ साल तक जहर का घूंट पिया है। गहलोत के पास कार्यकर्ताओं के काम लेकर जाते हैं तो जवाब मिलता है कि पायलट गुट के हो। जबकि सचिन पायलट ही राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। ऐसे में मैं अकेला नहीं बल्कि प्रदेश के तीस विधायक उनके साथ हैं।

पायलट को सीएम नहीं बनाना बड़ी गलती
विधायक हेमाराम चौधरी ने कहा कि अब पानी गले तक आ गया है, चुप नहीं रह सकते है। सरकार बड़ी नहीं है, संगठन बड़ा है। कांग्रेस को बचाना है तो नेतृत्व बदलना बहुत जरूरी है। कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 सचिन पायलट के नेतृत्व में जीता था और उन्हें दरकिनारकर गहलोत को मुख्यमंत्री बनाना गलत निर्णय था। फिर भी साथ दिया लेकिन अब गला भर गया है, चुप नहीं रह सकते।

भाजपा में नहीं जाना, कांग्रेस को बचाना हमारा दायित्व
राजस्थान सियासी संकट के बीच कांग्रेस विधायकों के भाजपा ज्वाइन करने की चर्चाओं को लेकर हेमाराम चौधरी ने स्पष्ट किया कि बीजेपी से हमारा कोई लेना देना नहीं है। हम तो बीजेपी के सामने चुनाव लड़ कर आए हैं। कांग्रेस को बचाना का हमारा दायित्व है। संगठन सर्वोपरि है। सरकार संगठन की वजह से बनी है। सरकार बड़ी नहीं है, संगठन बड़ा है।

अब भी समय है संभल जाओ
विधायक हेमाराम चौधरी ने अशोक गहलोत पर निशान साधते हुए कहा कि पिछली बार 21 आए और इस बार 11 आएंगे। गहलोत के नेतृत्व में पहले भी चुनाव लड़ा था। राजस्थान में विधायकों की संख्या 156 से 56 पर आ गई थी। अभी भी बहुत समय है, अब संभल जाओ। उधर, अशोक गहलोत के पास मौजूदा समय में 106 विधायकों के समर्थन पर चौधरी बोले कि उनके पास 106 विधायक है, तो उनके पास बहुमत है। फिर उन्हें होटल में विधायकों को कैद करने की जरुरत क्यों पड़ी? खुले क्यों नहीं घूमने देते है।
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