राजस्थान में काले गेहूं की खेती कर रहे पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी, जानिए इसकी पूरी प्रक्रिया
Tonk , Apr 12 : राजस्थान के कृषि नवाचारों में पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी हमेशा ही एक्टिव रहे हैं. फिर वो चाहे सत्ता में हो या नहीं. कृषि के क्षेत्र में वे सदैव नवाचार कर प्रगतिशील किसानों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं. अक्सर वो टोंक जिले के अपने गृह नगर आवां में पहले भी वो अपने फार्म में पिंडखजूर, जैतून, नारियल जैसी खेती कर नायाब नमूना पेश कर चुके हैं.

पथरीली जमीन में ओर जलवायु से अनुकूल ये नवाचार वाकई किसानों के लिए आय बढ़ाने वाले भी है तो इनका प्रयोग करने वाले लोगों के लिए बेहद स्वास्थ्यवर्धक भी है. दरअसल इसका नवाचार पंजाब के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यट की ओर से किया गया था, जिसका पेटेंट भी कराया गया. इसकी शुरुआत पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी ने राजस्थान में आंवा से की है.
कहते हैं यूं तो काले गेंहू (Black wheat) की खेती सिर्फ़ पंजाब में होती है, लेकिन राजस्थान में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है. आवां में ये फसल परवान पर है. पूर्व कृषि मंत्री सैनी ने बताया कि ब्लेक व्हीट(काला गेंहू) मूलतः जापानी गेंहू के साथ ब्रीडिंग कर बनाया गया है. इसमें कोई जेनेटिक छेड़छाड़ नहीं की गई है. इसका बीज करीब 150 रुपये प्रति किलो के भाव से उपलब्ध होता है. जबकि फसल (Crop) का बाजार भाव 4 हजार से 6 हजार रुपये क्विंटल है.
प्रगतिशील किसान इस फसल की बुवाई से अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि काले गेंहू में एंथोसायनिन पिगमेंट की मात्रा 100 से 200 पीपीएम होती है जबकि साधारण गेंहू में ये मात्रा 5 से 15 पीपीएम तक होती है. काले गेंहू में बड़ी मात्रा में प्रोटीन, न्यूट्रिएंट्स, स्टार्च, जिंक की मात्रा भी है, जो रोगप्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी करता है.












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