Exclusive Interview: टीडीपी की जीत के महायोद्धा, जानिए कैसे आगे बढ़ी नायडू की पार्टी
Exclusive Interview: आंध्र प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव में तेलुगुदेशम पार्टी की भारी जीत की पटकथा शो टाइम कंसलटिंग के वॉर रूम में लिखी गई। पार्टी पदाधिकारियों के साथ 200 से अधिक पेशेवरों ने टीडीपी की जीत के लिए रणनीति बनाई। शो टाइम कंसलटिंग ने दावा किया कि वॉर रूम ने टीडीपी के लिए चुनावी सफलता हासिल की है। वन इंडिया हिंदी ने शो टाइम के डायरेक्टर और ऑपरेशन हैड शांतनु सिंह से खास बातचीत की है। पढ़िए, इस बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल: तेलगू देशम पार्टी और शो टाइम के बीच संबंध कब और कैसे शुरू हुए ? टीडीपी विपक्ष में होने के बावजूद शो टाइम का उसे चुनने की वजह ? जबकि आम तौर पर कंसल्टिंग एजेंसी सत्ताधारी पार्टी को पसंद करती हैं ?
जवाब: साल 2019 में, शो टाइम पहली राजनीतिक कंसल्टिंग कंपनी बनी। जिसे किसी पार्टी द्वारा नियुक्त किया गया। टीडीपी द्वारा शो टाइम को पांच वर्षों के लिए नियुक्त किया गया। शो टाइम ने टीडीपी को प्राथमिकता दी। क्योंकि इसके नेता चंद्रबाबू नायडू एक दूरदर्शी नेता के रूप में बेहतरीन रिकॉर्ड रखते हैं और उन्हें समर्थन देना सही हमें लगा। सत्ताधारी पार्टी के साथ तो कोई भी काम कर सकता है। लेकिन एक बिखरी हुई विपक्षी पार्टी के लिए काम करना बड़ी चुनौती थी। मुझे बहुत खुशी है कि शो टाइम ने इस अहम बदलाव के साथ खुद के लिए एक विशेष जगह बनाई है।

सवाल: टीडीपी के साथ काम करके आपका अनुभव कैसा रहा ? इस अभियान से आप क्या सीख ले रहे हैं ?
जवाब: टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू अत्यधिक लोकप्रिय नेता हैं। साल 2019 में पार्टी की हार के बावजूद उनकी लोकप्रियता कभी भी वास्तव में कम नहीं हुई। महिला मतदाता निर्णायक संख्या में हैं। वे चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने की शक्ति रखती हैं। हमारे केंद्रीय कमांड सेंटर ने वॉर रूम के संचालन को क्रांतिकारी बनाया है। आंध्र प्रदेश के मतदाताओं ने विकास के लिए वोट दिया है। एक जनकल्याणकारी शासन ने अपनी कमियों को स्वीकारते हुए अच्छी वापसी की है।
सवाल: टीडीपी के साथ काम शुरू करने के बाद जब आपने काम करना शुरू किया। तब शुरूआती 3 से 6 महीने के भीतर आपने अपने काम से कैसा अनुभव किया ? क्या सत्ता में मौजूद पार्टी के लिए समर्थन कम हो रहा था ?
जवाब: सत्ता में मौजूद पार्टी के लिए समर्थन 2020 की शुरुआत में ही घटने लगा था। क्योंकि लोग मौजूदा सत्ताधारी नेता की तुलना उनके पिता और चंद्रबाबू नायडू से करने लगे थे। कई फैसले, जैसे अमरावती का त्याग, प्रजा वेदिका को अलग-थलग करना और राजनीतिक हिंसा में बढ़ोतरी हुई। इससे आम जनता के मन में सत्ताधारी दल को लेकर नकारात्मकता का भाव पैदा हुआ। जनता के भीतर सत्ता में मौजूद पार्टी के प्रति लोगों के भरोसे कमजोर कर दिया। नतीजा आपके सामने है। इसके अलावा कोविड-19 के दौरान कुप्रबंधन, बढ़ती बेरोजगारी, निवेश में कमी और अर्थव्यवस्था राज्य के सामने प्रमुख चुनौतियां बनकर उभरी। जिसने सत्ता में मौजूद पार्टी की छवि को धूमिल कर दिया। नीतिगत यू-टर्न, अपरिपक्व घोषणापत्र और वादे, बदले की राजनीति के साथ ही चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी और भूमि शीर्षक अधिनियम जैसी स्थितियां शामिल थे। इन हालातों ने सत्ता-विरोधी भावनाओं को और मजबूत किया। जिससे सत्ताधारी दल का पारंपरिक मतदाता वर्ग भी दूर हो गया। उस समय से सत्ता में मौजूद पार्टी के लिए समर्थन केवल घट ही नहीं रहा था। बल्कि लगातार खत्म होता जा रहा था।
सवाल: टीडीपी के साथ आपके सफल राजनीतिक अभियान को डिजाइन करने के लिए क्या तरीका अपनाया ? अपने लक्ष्यों को पूरा करने में आपकी क्या भूमिका रही ? आपने किस तरीके से टीडीपी की मदद की ?
जवाब: किसी भी राजनीतिक अभियान के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है आमजन को प्राथमिकता देना और यह सुनिश्चित करना कि आपकी रणनीति नवीनतम तकनीक के साथ सुझावात्मक और जमीन से जुडी हो। इसके अलावा हमनें जमीनी स्तर पर मुद्दों को परखकर अपनी रणनीति तैयारी की है। हमने राज्य में नवीनता के साथ दो स्तर पर केंद्रीय कमांड सेंटर स्थापित किए। साथ ही एक मजबूत और ऊर्जावान टीम ने हमें अभियान चलाने और उस पर नजर बनाए रखने में हमारी सहायता कीएक मजबूत और ऊर्जावान टीम जिसने हमें वास्तविक समय में अभियान चलाने और निगरानी करने की संभावना प्रदान की।
सवाल: सामान्यतः आमतौर पर कंसल्टिंग एजेंसी अभियान के दौरान और उसके बाद अपने आप को प्रमोट करने में बहुत अग्रेसिव होती है। इसे लेकर आपका नजरिया अलग है। ऐसा क्यों ?
जवाब: शो टाइम कंसल्टिंग एजेंसी मेहनत करने, चुपचाप काम करने और अपने काम को बोलने देने में विश्वास करती है। हमारा समूह विनम्र स्वभाव का है। जो जमीनी स्तर पर काम करने पर भरोसा करता है। हमारा ध्यान हमारे ग्राहकों और उनके पीआर पर है।
सवाल: टीडीपी जिस तरह सत्ताधारी दल को चुनौती देकर सत्ता में आने में काबियाब रही है। ऐसे में आप टीडीपी को क्या तीन संदेश देंगे ?
जवाब: अपना काम जारी रखें। जनता की भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करें। एक मजबूत नेटवर्क बनाकर जनता बीच जाकर संवाद स्थापित करें।
सवाल: आपका अब आगे क्या विचार है ? आगे अपनी अपनी जिम्मेदारियों को कैसे निभाएंगे ? क्या सरकार में आपकी भूमिका आपको उत्साहित करती है ?
जवाब: मैं इस समय बहुत कुछ नहीं कह सकता। लेकिन अगर कोई अपडेट हुआ तो मैं आपको जरूर साझा करूंगा।
आपको बता दें कि टीडीपी ने 175 सदस्य विधानसभा में 135 सीटें जीती है। वहीं टीडीपी, जनसेना और भाजपा गठबंधन को 164 सीटें मिली हैं। गठबंधन को 25 लोकसभा सीटों में से 21 पर जीत मिली है। इनमें टीडीपी की 16 लोकसभा सीट शामिल है। माना जा रहा है कि टीडीपी की इस प्रचंड जीत के पीछे शो टाइम का बड़ा हाथ है।
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