Rajasthan में बीसूका उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान सहित चार नेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया तलब, जानिए पूरा मामला
Rajasthan में बीसूका के उपाध्यक्ष डॉ चंद्रभान सहित चार नेताओं पर सरकारी पदों पर रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहने के मामले में शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता सोनल तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, राजस्थान सरकार सहित बीसूका के उपाध्यक्ष डॉ चंद्रभान सहित संबित पात्रा, इकबाल सिंह लालपुरा और जश्मीन शाह को नोटिस भेजकर तलब किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।

राजनीतिक पद के दुरुपयोग का मामला
मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि लोगों को उचित इलाज नहीं मिल रहा है। नौकरी नहीं मिल रही है। जैसे बेहतर मुद्दे हैं जिन्हें हम समझ सकते हैं। कोर्ट ने सवाल पूछा कि इस याचिका का मसौदा किसने तैयार किया। इसके साथ ही कहा कि यह बहुत ही चतुराई से तैयार किया गया है। बेंच ने कहा कि इस पर थोड़ा सा और उस सर्च किया जाए। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियों में आधिकारिक पदों पर रहने वाले लोगों को नियमों का उल्लंघन कर नियमित रूप से सरकारी पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। इसका नीति निर्माण पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। यह राजनीतिक पदों के दुरुपयोग के समान हैं। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होने की आशंका है। याचिका में राजनीतिक पार्टियों में सरकारी पदों पर लोक सेवक के रूप में नियुक्ति के लिए दिशानिर्देश करने के लिए एक समिति का गठन किए जाने की मांग की गई है।

चारों नेताओं की भूमिका पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने याचिका में चारों नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि डॉ. चंद्रभान बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन और समन्वय समिति के उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी हैं। उन्होंने राजनीतिक जुड़ाव और कांग्रेस के भीतर अपनी स्थिति के बारे में खुलकर बात करते हुए भाजपा की आलोचना की है। जनहित याचिका में सभी लोगों की वीडियोग्राफी गवाही भी पेश की गई है। वही संबित पात्रा भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता होने के साथ ही भारतीय पर्यटन विभाग निगम के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बड़े स्तर पर खुद को भाजपा के प्रवक्ता के रूप में पेश किया है। खासकर सोशल मीडिया पर। इकबाल सिंह लालपुरा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैं। जबकि बीजेपी संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं। उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों के लिए एनसीएम कार्यालय का इस्तेमाल किया है। कांग्रेस और आप सहित विपक्षी दलों पर हमला करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की तथा इस तरह के कार्यों के लिए एनसीएम के परिसर का इस्तेमाल किया है। इसी तरह जश्मीन शाह दिल्ली के डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन की वाइस चेयरमैन है। आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता हैं। उन्होंने विभिन्न वीडियो में आम आदमी पार्टी का समर्थन करते हुए भाजपा की आलोचना की है।

सरकारी पदों पर नियुक्ति होने के बाद भी तटस्थता के सिद्धांत का उल्लंघन
याचिकाकर्ता ने याचिका में तर्क दिए हैं कि आईपीसी की धारा 21(12) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 2(c) में अभिव्यक्ति की परिभाषा के मुताबिक नामित प्रतिवादी पब्लिक सर्वेंट है। सरकारी पदों पर नियुक्ति के बावजूद तटस्थता का सिद्धांत उन्हें उल्लंघन करते हुए राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकता है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि करदाताओं के पैसे से वेतन भत्ते और अनुराग का आनंद लेते हुए और पक्षपातपूर्ण गतिविधियों के कारण सरकारी खजाने को इनसे भारी नुकसान होगा। यह लोग राजनीतिक दलों का प्रचार भी कर रहे हैं और अपने राजनीतिक लाभ और एजेंडे के लिए सार्वजनिक कार्यालय का उपयोग कर रहे हैं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और बीसूका के उपाध्यक्ष हैं डॉ. चंद्रभान
राजस्थान में डॉ चंद्रभान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं। वे झुंझुनू जिले के मंडावा के रहने वाले हैं। अभी वह बीसूका के उपाध्यक्ष हैं। चंद्रभान टोडारायसिंह से विधायक रहे हैं और गहलोत सरकार के पिछले से पिछले में ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं। अभी वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं। याचिका में डॉ चंद्रभान पर बीसूका उपाध्यक्ष रहते हुए पद का दुरुपयोग कर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया गया है।












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