कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर काउंटडाउन शुरू, क्या अशोक गहलोत ही होंगे अगले अध्यक्ष, जानिए वजह
जयपुर, 4 सितम्बर। कांग्रेस की महंगाई के खिलाफ महारैली के बाद कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। पार्टी के अधिकांश नेता राहुल गांधी को फिर से कमान संभालने का दबाव बनाए हुए हैं। गुलाम नबी आजाद के पार्टी छोड़ने के बाद बदले हालात में पार्टी नेताओं का मानना है कि गांधी परिवार को ही कमान संभालनी चाहिए। लेकिन अभी तक राहुल के इनकार के बीच कई तरह के विकल्पों पर पार्टी के अंदरखाने में मंथन चल रहा है। इसमें सबसे ज्यादा संभावना सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बनाए रखने का हो सकता है। अगर सोनिया और राहुल तैयार नहीं हुए तो फिर गहलोत ही पार्टी की कमान संभालने वाला सबसे मजबूत चेहरा माना जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही पार्टी के सामने राजस्थान जैसे राज्य को बचाना भी बड़ी चुनौती है।


राजस्थान में गहलोत पहली पसंद
कांग्रेस आलाकमान यह भी जानता है कि गहलोत ही एक मात्र ऐसे नेता हैं। जो राजस्थान में सत्ता और संगठन दोनों को साधे बैठे हैं। यही नहीं सरकार को बाहर से आकर समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायकों की मुख्यमंत्री के तौर पर एकमात्र पसंद गहलोत ही है। सचिन पायलट के बगावती तेवर दिखाने के बाद इन्हीं बाहरी विधायकों के सहारे गहलोत ने सवा दो साल पहले बीजेपी का ऑपरेशन लोटस सफल नहीं होने दिया था। ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस आलाकमान गहलोत को दिल्ली रखते हैं तो राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा। यह पूरी तरह से गहलोत पर ही निर्भर रहेगा। ऐसी परिस्थिति में गहलोत अपने खास माने जाने वाले सीपी जोशी, बीड़ी कल्ला, गोविंद सिंह डोटासरा जैसे नेताओं का नाम आगे कर सकते हैं।

पायलट को नुकसान देगी बगावत
राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना लगभग ना के बराबर है। क्योंकि गांधी परिवार पायलट के बागी तेवरों को नही भूला है। सवा दो साल पहले गहलोत के रहते सरकार बची थी। सूत्रों के अनुसार गांधी परिवार के पास पायलट के साथ बागी तेवर अपनाने वाले डेढ़़ दर्जन विधायकों के लेन देन के सबूत भी है।

गांधी परिवार करेगा पार्टी के नेताओं से चर्चा
अध्यक्ष पद की सियासत के बीच राहुल ही लौट आए है। सोनिया और प्रियंका गांधी के अगले सप्ताह लौटने के आसार है। इस बीच राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी 7 सितंबर से शुरू हो जाएगी। ऐसे में संकेत है कि यात्रा का एक चरण पूरा होने के बाद 24 सितंबर से शुरू हो रहे नामांकन के आस-पास गांधी परिवार नेताओं से चर्चा कर नए अध्यक्ष के नाम को हरी झंडी दे सकता है।

गहलोत-हुड्डा की मुलाकात के मायने
महंगाई के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई कांग्रेस की हल्ला बोल रैली से पहले गहलोत की भूपेंद्र सिंह हुड्डा से हुई मुलाकात को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गहलोत और हुड्डा पुराने दोस्त हैं। हुड्डा पार्टी छोड़ चुके गुलाम नबी के करीबी माने जाते हैं। लेकिन हुड्डा भी पार्टी छोड़ने से इनकार करते आए हैं। दोनों नेताओं की शनिवार को हुई मुलाकात में वे करीब 45 मिनट एक साथ रहे। इसके बाद कई तरह की सियासी चर्चाएं गर्म हो गई हैं। मुलाकात को राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। क्योंकि कांग्रेस छोड़़ चुके गुलाम नबी से मुलाकात के बाद हुड्डा पार्टी में अपने विरोधियों के निशाने पर हैं। विरोधी नेताओं ने नबी से मुलाकात को लेकर हाईकमान को पत्र भी लिखा है। कुछ नेता हाईकमान से हुड्डा पर कार्रवाई करने का दबाव भी बना रहे हैं।












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