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Congress हाईकमान दीपावली के बाद करेगा राजस्थान को लेकर फैसला, अध्यक्ष बनते ही खड़गे के सामने बड़ी चुनौती

Congress अध्यक्ष पद पर मल्लिकार्जुन खड़गे निर्वाचित हो गए हैं। दीपावली बाद 26 अक्टूबर को खड़गे विधिवत रूप से अध्यक्ष पद का कामकाज संभाल लेंगे। अध्यक्ष पद संभालते ही खड़गे के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान होगा। उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी राजस्थान के सियासी संग्राम का समाधान तलाशने की होगी। कांग्रेस के लिए राजस्थान में एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई जैसी स्थिति है। ऐसे में कांग्रेस को सख्ती से कोई फैसला लेकर आगे बढ़ना ही होगा। सम्भवतया दीपावली के बाद ही राजस्थान को लेकर पार्टी हाईकमान कोई फैसला लेगा।

राजस्थान में विधायक दल की बैठक बुलाने के बाद हुई थी बगावत

राजस्थान में विधायक दल की बैठक बुलाने के बाद हुई थी बगावत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही राजस्थान में सियासी संग्राम शुरू हो गया था। 25 सितंबर को गहलोत गुट के विधायकों ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर हाईकमान से सीधे बगावत करने से इस मामले ने एकाएक तूल पकड़ लिया था। इस घटना को करीब 25 दिन बीतने के बाद भी स्थिति जैसी की जैसी ही बनी हुई है।

राजस्थान में अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव

राजस्थान में अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव

राजस्थान में 2023 के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। राजस्थान में हर 5 साल में सरकार बदलने का मिथक तोड़ने की रणनीति पर पार्टी चल रही है। खड़गे के सामने सीमित विकल्प है। पार्टी नेताओं का मानना है कि सचिन पायलट 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी उन्हें नाराज नहीं करना चाहती है। जबकि राजस्थान के पेचीदा सियासी समीकरण का फायदा अशोक गहलोत को मिल रहा है। उनको सीएम पद से हटाने पर सरकार गिरने की भी आशंका पार्टी मानकर चल रही है। इस तरह के हालात के बीच खड़गे को कोई सख्त फैसला लेना ही होगा।

राजस्थान के मसले को गांधी परिवार भी नहीं सुलझा सका

राजस्थान के मसले को गांधी परिवार भी नहीं सुलझा सका

राजस्थान के मसले को गांधी परिवार भी नहीं सुलझा सका है। अब गेंद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पाले में आ चुकी है। वैसे भी खड़गे को राजस्थान के सियासी हालात की अच्छी तरह से जानकारी है। जिस विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कांग्रेस के गहलोत समर्थक विधायकों ने किया था। उसके पर्यवेक्षक खुद खड़गे ही थे। ऐसे में खड़गे के आगामी कदम पर सबकी निगाह टिकी है।

अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं पर होगी कार्रवाई

अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं पर होगी कार्रवाई

विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करने के लिए कांग्रेस ने संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल, मुख्य सचेतक महेश जोशी और आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को अनुशासन समिति ने नोटिस दिया था। इस पर तीनों में अपने जवाब भी दे दिए हैं। अब समिति की बैठक में इनके जवाब पर निर्णय होना है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी का एक वर्ग अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए तीनों को सख्त सजा देने के पक्ष में है। इसके लिए तीनों को पदों से हटाने की मांग भी शामिल है। जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत माफी मांग चुके हैं। इसलिए इस मामले को बंद कर देना चाहिए। अब खड़गे को भी इस पर भी फैसला करना है कि क्या वह सख्ती दिखाकर पार्टी में अनुशासन बनाए रखने का संदेश देंगे।

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