Rajasthan में सरदार शहर सीट पर कांग्रेस ने दी भंवर लाल शर्मा के बेटे को हरी झंडी, भाजपा करेगी रायशुमारी
Rajasthan के चूरू की सरदार शहर सीट पर चुनावी कवायद आगे बढ़ने लगी है। कांग्रेस की ओर से दिवंगत नेता भंवरलाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को हरी झंडी मिलने के बाद उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। वह 17 नवंबर को नामांकन भर सकते हैं। वहीं भाजपा की ओर से प्रत्याशियों को लेकर रायशुमारी की जा रही है। पार्टी पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा कर प्रत्याशियों के नाम मांगे। भाजपा ने सरदारशहर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को अपना प्रभारी नियुक्त किया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर सतीश पूनिया ने कन्हैया लाल चौधरी और बनवारी लाल सिंघल को सह प्रभारी बनाया है। दो चुनाव प्रबंध समन्वयक भी नियुक्त किए गए हैं। चुनाव मैनेजमेंट कोऑर्डिनेटर के तौर पर प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच और प्रदेश उपाध्यक्ष व संभाग प्रभारी माधोराम को जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा कोर कमेटी करेगी टिकट पर फैसला
भाजपा इस सीट पर प्रत्याशी को लेकर झुंझुनू में होने वाली पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में फैसला करेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बताया कि अब तक पार्टी से 15 से ज्यादा दावेदारों ने टिकट मांगा है। उन्होंने कहा कि इस अनुभूति की लहर में भले ही कांग्रेस पहले उपचुनाव जीती हो। लेकिन इस बार चुनाव का रिजल्ट उनकी खुशफहमी को दूर कर देगा। सहानुभूति बहुत लंबे समय तक नहीं चलती। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने जनता के साथ वादाखिलाफी की है।

अगले महीने 5 तारीख को होगा मतदान
चुरू जिले के सरदारशहर विधानसभा सीट निर्वाचन क्षेत्र के लिए 5 दिसंबर को उपचुनाव होगा। नामांकन की अंतिम तिथि 17 नवंबर को है। प्राप्त नामांकन पत्रों की जांच 18 नवंबर को की जाएगी। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 21 नवंबर है। मतगणना 8 दिसंबर को होगी। सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 89 हजार 579 मतदाता तथा कुल 295 मतदान केंद्र है।

भाजपा के रणनीतिकार सहानुभूति फैक्टर तोड़ने की रणनीति में
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि सरदारशहर सीट से हम 70 हजार से ज्यादा वोट हमेशा लेते रहे हैं। बहुत ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। इस अंतर को पाटने कि हम कोशिश करेंगे। इधर पार्टी के सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा किसी बाहरी प्रत्याशी पर भी दांव खेल सकती है। पार्टी के रणनीतिकार सहानुभूति फैक्टर को तोड़ने के लिए इस रणनीति पर भी विचार कर रही है। कोर कमेटी की बैठक में इसे लेकर यदि नीतिगत निर्णय होता है तो पार्टी यह दांव खेल सकती है।












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