BJP नेताओं ने स्पीकर को ज्ञापन सौंपते वक्त पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को किया दरकिनार, जानिए पूरी वजह

Rajasthan में पिछले दिनों 25 सितंबर को सियासी घटनाक्रम के बाद गहलोत समर्थक विधायकों द्वारा विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को दिए गए इस्तीफा प्रकरण मंगलवार को एक बार फिर जोर पकड़ गया। भाजपा नेताओं ने स्पीकर सीपी जोशी से मिलकर उन्हें ज्ञापन देकर इस मामले में उचित फैसला लेने का अनुरोध किया है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग सहित भाजपा विधायकों ने विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी से मुलाकात की। इस पूरे घटनाक्रम से भाजपा के भीतर चल रहा अंतर्कलह एक बार फिर सामने आ गया है। भाजपा नेताओं ने ज्ञापन देते वक्त पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे को अपने साथ नहीं लिया। जबकि वसुंधरा राजे अपने आवास 13, सिविल लाइंस पर मौजूद थी। विधानसभा अध्यक्ष का आवास वसुंधरा राजे के घर के ठीक सामने हैं। बावजूद इसके भाजपा नेताओं ने वसुंधरा राजे को आमंत्रित करने पर मौन साधे रखा। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस पर छूट का फायदा उठाने की तैयारी करने वाली भाजपा खुद की पार्टी के भीतर चल रहे कलह को कैसे लड़ पाएगी।

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एकजुटता के संदेश के बावजूद भाजपा के भीतर अंतर्कलह

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के राजस्थान में पार्टी को एकजुटता का संदेश दिए जाने के बावजूद पार्टी के भीतर का अंतर्कलह सामने आ ही जाता है। राजस्थान में भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिछले दिनों वसुंधरा राजे की बीकानेर और शेखावाटी यात्रा के दौरान भाजपा के जिला अध्यक्षों ने दूरी बनाए रखी। वही प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के बारां में दौरे के जिलाध्यक्ष ने पुनिया के कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। सतीश पूनिया भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष होते हुए खुद को सीएम फेस के तौर पर प्रोजेक्ट करने के प्रयास करते रहते हैं। टॉक में भी सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया के जन्मदिवस के मौके पर मंगलवार को सतीश पूनिया को मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगे है। आपको बता दें राजस्थान में वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच अदावत जगजाहिर है।

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का आरोप सब कुछ सुनियोजित

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि 2018 में कांग्रेस के विग्रह की शुरुआत राज्यपाल से हो गई थी। उसकी परिणिति राजद्रोह के मामलों से हुई। पीसीसी चीफ एवं डिप्टी चीफ मिनिस्टर सचिन पायलट के बर्खास्तगी हुई। बाद में बाड़ेबंदी हुई। चिट्ठी पत्री, सदन में विरोध और विकार से हुई। आखिर में ऐसा मौका आया जब गहलोत सरकार के लगभग 91-92 विधायकों ने स्पीकर के घर जाकर सुनियोजित तरीके से इस्तीफे दिए। हालांकि से तात्कालिक फैसला करार दिया गया। लेकिन सवाल उठता है कि टेंट वाला कहां से आया। क्या शांति धारीवाल हलवाई घर में रखते हैं। क्या स्पीकर महोदय ने जलेबियाँ पहले से बनवा रखी थी। इसका मतलब यह पूरा घटनाक्रम सियासी मामला था और सुनियोजित था। सतीश पूनिया ने सवाल उठाया कि जब सरकार के विधायक इस्तीफा दे चुके हैं तो सरकार कौन चला रहा है।

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