Ashok Gehlot-Sachin Pilot विवाद का हुआ द एंड, पायलट ने मानी 'माफ करें, भूल जाएं व आगे बढ़ें की सलाह
CM Ashok Gehlot vs Sachin Pilot: दिल्ली में हाल ही हुई कांग्रेस नेताओं की बैठक के बाद राजस्थान सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह हो गई है। इस पर सचिन पायलट ने इंटरव्यू दिया है।
Ashok Gehlot and Sachin Pilot Latest News: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले कांग्रेस के लिए अच्छी खबर है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सियासी विवाद पर फुल स्टॉप लग गया है।
शनिवार को खुद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सलाह पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मनमुटाव को समाप्त कर दिया है। राजस्थान विधानसभान चुनाव 2023 में जीत के लिए सामूहिक नेतृत्व ही 'एकमात्र रास्ता' है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारियों को लेकर हाल ही दिल्ली में आयोजित कांग्रेस नेताओं की बैठक के बाद न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सचिन पायलट ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें 'माफ करें और भूल जाएं' और आगे बढ़ने की सलाह दी थी, जो उनका एक तरह से निर्देश था।
सचिन पायलट ने कहा कि अशोक गहलोत जी मुझसे बड़े हैं, उनके पास अनुभव भी ज्यादा है। उनके कंधों पर भारी जिम्मेदारियां हैं। जब मैं राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष था तो मैंने सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश की। मुझे लगता है कि आज वे मुख्यमंत्री (गहलोत) हैं। इसलिए वह सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं।
राजस्थान पीसीसी चीफ और पूर्स डिप्टी सीएम रह चुके सचिन पायलट ने कहा कि अगर थोड़ा भी इधर-उधर हुआ तो यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, क्योंकि पार्टी और जनता किसी भी व्यक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है। मैं भी इसे समझता हूं और वह भी इसे समझते हैं।
पूर्व में अशोक गहलोत द्वारा उन्हें नाम से पुकारने और पिछली वसुंधरा राजे सरकार में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर निष्क्रियता को लेकर गहलोत सरकार की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर, पायलट ने कहा कि उनके साथ एक बैठक में, कांग्रेस प्रमुख खड़गे ने कहा था कि वह समय बीत चुका है। वापस नहीं आना है और भविष्य की ओर देखना है।

सचिन पायलट बोले कि खड़गे ने कहा कि माफ करो और भूल जाओ और आगे देखो और यह हर किसी पर लागू होता है। मेरा मानना है कि, हमें अब आगे बढ़ना होगा और नई चुनौतियों का सामना करना होगा। इस देश को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेस की जरूरत है। हमें आशीर्वाद लेने की जरूरत है।
इसके लिए राजस्थान में हमें एकजुट होकर काम करना होगा और ऐसे तरीके से आगे बढ़ना होगा जो लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को स्वीकार्य हो। पूर्व में किसने, किस समय क्या कहा, इसके बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है। मैंने हमेशा ऐसे किसी भी शब्द या भाषा का उपयोग करने से परहेज किया है जो मुझे अप्रिय लगता है या कुछ ऐसा है जिसके बारे में मैं सुनना नहीं चाहता हूं। पायलट ने कहा हमारे लिए अगली चुनौती राजस्थान विधानसभ चुनाव 2023 जीतना है। न तो व्यक्ति और न ही बयान मायने रखते हैं, ये सब बीत चुका है।
उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट ने अशोक गहलोत के प्रति सारे गिले शिकवे भूला दिए और यह सब हाल ही दिल्ली में पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राजस्थान के एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर रंधावा, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद डोटासरा व अन्य नेताओं की बैठक के बाद हुआ है। पैर की उंगलियों की चोट से उबर रहे गहलोत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।
अशोक गहलोत-सचिन पायलट का विवाद का क्या था?
अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच सियासी मनमुटाव समझने के लिए राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 को समझना होगा। दरअसल, कांग्रेस ने साल 2018 के चुनाव जीते तब सचिन पायलट प्रदेशाध्यक्ष थे।
विवाद की शुरुआत उसी समय से हो गई थी।
सचिन पायलट गुट के विधायक व समर्थकों उन्हें सीएम बनाए जाने की मांग उठाई थी। फिर दो साल तक अंदरखाने मनमुटाव चलता रहा और साल 2020 में सचिन पायलट अपने समर्थक विधायक के हरियाणा के मानेसर के होटल में डेरा डाल लिया। तब राजस्थान कांग्रेस संकट में आ गई। अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में आते आते बची। आलाकमान की दखल के बाद मामला शांत हुआ।
इसके बाद से अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच सियासी लड़ाई खुलकर सामने आई। दोनों एक साथ मंच शेयर करने से भी बचते रहे। अब राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस में वापसी के लिए कांग्रेस आलाकमान ने अशोक गहलोत व सचिन पायलट के साथ बैठक पुरानी बातों को पीछे छोड़ आगे बढ़ने को कहा।
देखिए राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की पूरी सूची












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