Lumpy Virus: जबलपुर में भी बढ़ा लंपी वायरस का खतरा, संदिग्ध गौवंश के लिए गए सैंपल
जबलपुर, 25 सितंबर: मप्र में लंपी वायरस पैर पसारता जा रहा है। जबलपुर में भी इस वायरस के लक्षण वाले संदिग्ध जानवर सामने आ रहे हैं। जिले के ढूंडी गांव में एक बछिया और हिनोतिया में एक गाय में ऐसे लक्षण मिले। जिसके बाद पशु विभाग में हडकंप मच गया। आनन-फानन में संबंधित क्षेत्रों में पशु चिकित्सकों की टीम पहुंची और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। इन मवेशियों को आइसोलेट कराया गया है। साथ ही पशु मालिकों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

लंपी वायरस केस की लंबी हो रही चेन
जानवरों में लंपी वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है। एमपी के कई जिलों में इसका प्रकोप देखने को मिल रहा हैं। जबलपुर में भी इस बीमारी के लक्षण गाय और बछड़े के मामले सामने आए। सिहोरा तहसील के धनपुरी ढूंडी गांव में बछिया के शरीर में गांठें पाई गई हैं जो कि लंपी वायरस का प्रारंभिक स्टेज बताई जा रही है। इसी तरह रविवार को बरेला के हिनोतिया गांव में एक गाय आवारा हालत में घूमते नजर आई। उसके शरीर में भी मोटे दाने नजर आ रहे है। जिसकी खबर फ़ौरन पशु विभाग को की गई।

पशु चिकित्सकों ने लिए सैम्पल
दोनों ही ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सकों की टीम पहुंची और संदिग्ध लक्षण वाले इन जानवरों के सैम्पल लिए गए है। उपसंचालक डॉ एस के वाजपेई ने बताया कि दोनों मवेशी के सैंपल जबलपुर की संभागीय पशु रोग अनुसंधान प्रयोगशाला भेजा गया है। जहां से सैंपल को भोपाल की हाई सिक्योरिटी लैब भी भेज दिया गया है। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही लंपी वायरस की पुष्टि हो पाएगी।

ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर
चौकाने वाली बात यह है कि मप्र में पिछले एक महीने पहले इस बीमारी ने दस्तक दी। वैकल्पिक तौर पर बकरियों की बीमारियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन का इस्तेमाल करना सुनिश्चित किया गया है। जबलपुर जैसे जिले में करीब दो लाख मवेशियों के लिए महज 2700 वैक्सीन की व्यवस्था की दावा किया जा रहा हैं। जबकि जानकर बताते है कि इतनी तादात में मवेशियों की सुरक्षा के मद्देनजर लगभग 60 हजार वैक्सीन का इंतजाम होना चाहिए।

ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल
लंपी वायरस के संदिग्ध केस सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में दहशत का माहौल है। गाय पालकर दुग्ध उत्पादन करने वाले पशु मालिकों को अपनी रोजी रोटी के संकट की चिंता भी सताने लगी है। क्योकि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में गाय के दूध का इस्तेमाल न करने की सलाह भी प्रचारित हो रही है। वही पशु वैज्ञानिकों ने पशु मालिकों संयम बरतने की अपील की है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की बात भी कही है।
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