Jabalpur High Court से 76 दिन बाद राजा पटेरिया को मिली जमानत, पीएम मोदी के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी का आरोप
बहुचर्चित मामले में कांग्रेस नेता राजा पटेरिया को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन पर पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप हैं। पहले आवेदन में राहत नहीं मिली थी।

Raja Pateria gets bail from Jabalpur High Court: पीएम मोदी की हत्या के उकसाने वाले बयान के आरोपों में जेल में बंद पूर्व मंत्री राजा पटेरिया को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अब राहत मिल गई है। गिरफ्तारी के 76 दिन बाद वह जेल के बाहर खुली हवा में सांस ले सकेंगे। जबलपुर हाई कोर्ट ने सभी बिंदुओं और क़ानूनी पहलुओं पर गौर करते हुए पटेरिया को जमानत का लाभ दिया। आपको बता दें कि आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोपों में घिरे रहे 'राजा' को लेकर जमकर बवाल मचा था। पवई कोर्ट फिर ग्वालियर की एमपी एमएलए कोर्ट के साथ पहले आवेदन में हाई कोर्ट भी जमानत याचिका खारिज कर चुका था। पिछली सुनवाई के वक्त कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी भी की थी।

13 दिसंबर 2022 को गिरफ्तार हुए एमपी के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर राजा पटेरिया को आखिरकार हाई कोर्ट से दूसरे जमानत के आवेदन पर राहत मिल गई। इससे पहले 11 जनवरी को जबलपुर हाई कोर्ट ने पटेरिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने ऐसे बढ़ते मामलों को लेकर भी तल्ख़ टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद पर आसीन व्यक्तियों को नीचा दिखाने जनता के नेता से अभद्र भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। हिरासत अवधि के दौरान जमानत देने से जनता के बीच गलत सन्देश जाएगा। पटेरिया की जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी नेता के द्वारा भाषण के दौरान विचलित करने वाले शब्दों का प्रयोग आजकल फैशन बन गया है।

क़ानूनी रूप से याचिका खारिज होने के 30 दिनों बाद दोबारा जमानत के लिए आवेदन का प्रावधान हैं। इसी के तहत पटेरिया की ओर से हाई कोर्ट में दोबारा जमानत अर्जी लगाई। जिस पर वर्तमान और पहले के सभी बिंदुओं पर गौर करते हुए जमानत दे दी गई। आपको बता दें कि दिसंबर 2022 में कांग्रेस नेता राजा पटेरिया का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के उकसाने वाले बयान का वीडियो वायरल हुआ था। जिसके आधार पर पुलिस में शिकायत की गई, फिर उनकी गिरफ्तारी हुई थी। पटेरिया की ओर से दलील दी गई कि राजनीतिक दुर्भावनावश केस दर्ज कर कार्रवाई हुई है। अदालत में पेश किए गए वीडियो फुटेज में पूरे नहीं है और छेड़छाड़ की गई है। हालाँकि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि सीडी की प्रमाणिकता और परीक्षण पर विचार करना उचित नहीं है।












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