Election: नेताजी को कार्डलेस माइक से भाषण देना पड़ेगा महंगा, VIP खाना 550/- तकिए पर भी बैठे तो जुड़ेगा खर्च
चुनाव है तो खर्चा भी होगा, लेकिन यहाँ प्रत्याशियों की पॉकेट नहीं, बल्कि निर्वाचन कार्यालय ने खर्चे की सीमा निर्धारित कर दी है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ इलैयाराजा टी.द्वारा एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल गठित की है
जबलपुर, 22 जून: चुनाव है तो ज़ेब भी ढीली होती ही है, नेताजी के बटुए में भले ही खूब रुपए हो लेकिन जबलपुर में स्थानीय निर्वाचन एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल को पाई-पाई का हिसाब देना होगा, कि किसने कहाँ और कितना खर्च किया। चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी चाहे पुड़ी-सब्जी या फिर VIP थाली खाएं-खिलाए , भाषण देने स्टेंड माइक या फिर कॉर्डलेस माइक हो , लोहे की कुर्सी या फिर तकिए पर भी बैठे... तो हर एक चीज के निर्वाचन कार्यालय ने रेट निर्धारित कर दिए है। नगर-निगम महापौर के लिए 35 लाख और पार्षद के लिए 8 लाख 75 हजार रुपये व्यय सीमा निर्धारित है। अब प्रत्याशी बने नेताजी के ऊपर डिपेंड करता है कि इस ज़माने के चुनाव में उन्हें क्या महंगा और क्या सस्ता लगता है ?

एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल गठित
जब हम कोई चीज खरीदते है तो बजट का तो ख्याल रखना ही पड़ता हैं। हमारी पॉकेट हमारी खर्च सीमा निर्धारित कर देता है। इन दिनों में मप्र में नगरीय-निकाय चुनाव का मौसम है। तमाम पार्टी के और निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। चुनाव है तो खर्चा भी होगा, लेकिन यहाँ प्रत्याशियों की पॉकेट नहीं, बल्कि निर्वाचन कार्यालय ने खर्चे की सीमा निर्धारित कर दी है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ इलैयाराजा टी. द्वारा गठित एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल ने निर्वाचन लेखा व्यय दर सूची जारी की है। महापौर और पार्षद प्रत्याशियों के लिए अलग-अलग व्यय सीमा है।

महापौर के लिए 35 लाख, पार्षद के लिए 8 लाख 75 हजार रुपये
निर्वाचन कार्यालय की एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल द्वारा प्रत्याशियों के चुनावी खर्चे की व्यय सीमा निर्धारित की गई है। जबलपुर में महापौर पद के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी अधिकतम 35 लाख रुपये और पार्षद प्रत्याशी के लिए 8 लाख 75 हजार रुपये व्यय सीमा निर्धारित है। घर से लेकर दफ्तर तक चुनाव प्रचार से संबधित हर गतिविधि पर निर्वाचन आयोग की सख्त नजर है। प्रचार में उपयोग होने वाले छोटे से छोटे झंडे से लेकर टेंट-शामियाने, कार्यकर्ताओं समर्थकों के रहने खाने-पीने के हर इंतजाम में होने वाले खर्च का ब्यौरा एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल को सौंपना होगा।

8/- का समोसा-आलूबंडा, 550/- की VIP थाली
चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी के साथ पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक भी रहते है। कई लोग घर से भूखे-प्यासे प्रचार करने निकल पड़ते है। चाय-नाश्ते से लेकर उनके रुकने-ठहरने का इंतजाम भी प्रत्याशी को अपने खर्च पर ही करना पड़ता है। ऐसे में प्रचार के दौरान नाश्ते के अलग-अलग आइटम का अलग-अलग रेट तय है। प्रचार में यदि किसी ने एक नग समोसा या आलूबंडा खाया तो 8 या फिर 4 चार पुड़ी-सब्जी तो 35/- रुपये के हिसाब से खर्च खाते में जुड़ेगा। चाहे टेंट लगवाया, कालीन बिछवाया या फिर दरी-तकिए की जरुरत पड़ी तो हर चीज का पाई-पाई का हिसाब खर्च में शामिल होगा। किसी जगह यदि नेताजी को स्टेंड वाला माइक सूट नहीं करता और वहां कॉर्डलेस माइक का इंतजाम होगा तो उसकी दर सामान्य माइक से चार गुना ज्यादा निर्धारित है।

समय-समय पर देना होगी व्यय की जानकारी
ख़ासबात यह है कि प्रत्याशियों को अपने खर्चे की जानकारी निर्वाचन विभाग में समय-समय पर देना होगी। चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत प्रत्येक प्रत्याशी को प्राधिकृत व्यय प्रेक्षक को चाही गई जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई प्रत्याशी सूचना मिलने के बाबजूद चुनाव खर्च संबंधी जानकारी निर्धारित वक्त में मुहैया नहीं कराता है, तो यह कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। आयोग के नियम के मुताबिक ऐसे उम्मीदवार के खिलाफ IPC की धारा 171-1 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।












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