हॉस्पिटल अग्निकांड मामले की जांच पर HC की फटकार, ये आखिरी मौका, अब करेंगे स्वतंत्र एजेंसी पर विचार
जबलपुर, 24 अगस्त: भीषण अग्निकांड के जरिए 8 लोगों की जान लेने वाले न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की जांच कटघरे में हैं। जबलपुर जिले में नियम विरुद्ध चल रहे अस्पतालों से संबंधित याचिका पर मप्र हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें अग्निकांड वाले हॉस्पिटल की जांच भी शामिल थी। सरकार की ओर दी गई जानकारी फिर कोर्ट द्वारा पूछे गए सवाल पर जबाब न मिलने से अदालत ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने सरकार को आखिरी मौका देते हुए दो टूक कहा कि यदि तथ्यों के साथ संतोषजनक जबाब नहीं मिला, तो फिर मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने विचार किया जाएगा।

दरअसल जबलपुर में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे अस्पतालों को लेकर मप्र लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की ओर से जनहित याचिका लगाई गई है। जिस पर चीफ जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ में सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल अग्निकांड की विस्तृत जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई। शपथ पत्र के साथ पेश की गई रिपोर्ट पर गौर करने के बाद अदालत ने कई सवाल किए। जिस पर सरकार की ओर से ऐसा कोई भी जबाब नहीं रहा, जिससे कोर्ट संतुष्ट हो सकें। इस बात पर अदालत ने नाराजगी जताई और तल्ख़ टिप्पणी भी की।

हॉस्पिटल को क्लीन चिट देने वाले आरोपी क्यों नहीं?
कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार की ओर से पूछा कि भीषण अग्निकांड वाले हॉस्पिटल को जिन अधिकारियों और डॉक्टर ने अस्पताल संचालन के लिए क्लीन चिट दी, उन्हें इस घटनाक्रम की FIR में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? इसके जबाब के लिए सरकार की ओर से फिर समय मांगने का निवेदन किया तो कोर्ट ने सख्त एतराज जताया। कोर्ट ने जनहित के इस गंभीर मामले में दो टूक कहा कि यह आखिरी मौका है, यदि तथ्यपूर्ण जबाब नहीं मिला तो फिर पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए है कि पुलिस जाँच की वस्तुस्थिति सील बंद लिफ़ाफ़े में पेश की जाए। साथ ही संभागायुक्त द्वारा की जा रही जांच की रिपोर्ट भी पेश करना जरुरी है। याचिकाकर्ता मप्र लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने पैरवी की।












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