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होटल में हॉस्पिटल: डॉ. अश्विनी पाठक पर FIR की तैयारी, आयुष्मान योजना के अधिकारी को मिली धमकी

जबलपुर, 27 अगस्त: केंद्र सरकार की बेहद महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत योजना के नाम जबलपुर में गोरखधंधा ही चल रहा था। योजना से जुड़े अधिकारियों और पुलिस के छापे के 24 घंटे बाद इसकी पुष्टि खुद आयुष्मान भारत योजना के जिला अधिकारी ने वन इण्डिया हिंदी से की। बगैर किसी परमीशन होटल को हॉस्पिटल का रूप देकर एमपी में इस बड़े स्केम को अंजाम दिया जा रहा था।सर्दी-जुकाम, सिर दर्द जैसी सामान्य बीमारी को गंभीर बताकर डॉ. अश्विनी पाठक गिरोह बनाकर सरकार से अपनी तिजोरी भर रहा था। पिछला रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है और करोड़ों के फर्जीवाड़े का संदेह हैं। वही यह मामला उजागर होने के बाद जांच टीम के एक अधिकारी को फोन पर धमकी भी मिली है।

होटल में हॉस्पिटल का गोरखधंधा !

होटल में हॉस्पिटल का गोरखधंधा !

एमपी के जबलपुर में हॉस्पिटल की आड़ में सनसनीखेज फर्जीवाड़े ने स्वास्थ्य महकमे की कलई खोलकर रख दी हैं। बीच शहर में बेख़ौफ़ ढंग से डमी मरीजों के नाम सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल का संचालक डॉ. अश्विनी पाठक पर फर्जीवाड़े के संगीन आरोप है। एक तो बगैर अनुमति होटल को हॉस्पिटल का रूप दे दिया गया, फिर अधिकतम पांच लाख तक मुफ्त उपचार वाली केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का गलत ढंग से भुगतान लिया जाता रहा। योजना के जिला अधिकारी डॉ. रामभुवन साहू ने इस बात की पुष्टि की है।

कार्रवाई के बाद जांच टीम के अधिकारी को धमकी

कार्रवाई के बाद जांच टीम के अधिकारी को धमकी

सरकार की आंखों में धूल झौंककर चल रहे इस फर्जीवाड़े से जुड़े कई दस्तावेज बरामद होने का दावा किया किया जा रहा है। वही जांच कार्रवाई में लगी एक टीम के अधिकारी को फोन पर धमकी भी मिली है। वन इंडिया को संबंधित अधिकारी ने बताया कि धमकी देना वाला व्यक्ति शहर के अन्य अस्पताल का डॉक्टर है। उसने फोन करते हुए कहा कि डॉ. अश्विनी पाठक के अस्पताल में कार्रवाई कैसे की? अधिकारी ने यह भी बताया कि धमकी देने वाले डॉक्टर ने 4 साल पहले महाकौशल हॉस्पिटल में की गई कार्रवाई का जिक्र भी किया।

छापे में मिले थे करीब 77 लोग

छापे में मिले थे करीब 77 लोग

इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल संचालक डॉ. अश्विनी पाठक के होटल में लगभग 77 लोग मिले थे। जिसमें दावा किया गया कि अधिकांश लोग होटल के कमरों, हॉल में बतौर मरीज भर्ती थे। अस्पताल की तरह होटल में पलंग, ऑक्सीजन के पाइप और दिखावे की कई व्यवस्थाएं थी। मरीज के रूप में जो लोग मिले वह सभी आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारी निकले।

जबरदस्ती चढ़ी ड्रिप, फाइलों में गंभीर बीमारी

जबरदस्ती चढ़ी ड्रिप, फाइलों में गंभीर बीमारी

पुलिस द्वारा किए गए इस गोरखधंधे के भंडाफोड़ के बाद पहुंची आयुष्मान भारत योजना के अधिकारियों ने जो पड़ताल की, उसके मुताबिक होटल में कथित हॉस्पिटल का संचालन पूरी तरह से अवैध हैं। इसके अलावा आयुष्मान कार्डधारी हितग्राही डमी मरीजों के इलाज की फ़ाइल में गंभीर बीमारी दर्ज होना पाई गई। जबकि विभाग द्वारा मरीजों से की पूछताछ में पता चला कि किसी को सर्दी-जुकाम था, तो किसी को सिर दर्द या फिर अन्य सामान्य तरह की कोई समस्या। दिखावे के लिए कई लोगों को जबरदस्ती ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाकर रखी थी।

गुमराह कर करोड़ों का फर्जीवाड़ा !

गुमराह कर करोड़ों का फर्जीवाड़ा !

केद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जरुरतमंद मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद इस योजना का वास्तविक मरीजों को मिलने वाला हक़ खुद डॉ. अश्विनी पाठक और उससे जुड़े लोग डकार रहे थे। अब तक हुई जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि जबलपुर के सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल संचालक ने सरकार को न सिर्फ गुमराह किया, बल्कि सरकारी खजाने से करोड़ों की अंधी कमाई की हैं। तथाकथित मरीजों के नाम अब तक सरकार को कितने करोड़ का चूना लगाया गया है, इसकी जांच जारी है।

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