मप्र नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता के 37 हजार पेज गायब, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार सरकार से माँगा जबाब
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। जिससे बड़ा खुलासा हुआ कि 453 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता संबधी मूल रिकॉर्ड से 37 हजार 759 पन्ने गायब है। 37 thousand pages of recognition
जबलपुर, 08 जुलाई: मध्यप्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती देने हाईकोर्ट में दायर याचिका से एक बड़ा खुलासा हुआ है। अदालत के आदेश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेजों के मान्यता के समस्त रिकॉर्ड की याचिकाकर्ता द्वारा पेश निरीक्षण रिपोर्ट में कहा गया, कि मान्यता संबंधी मूल रिकॉर्ड से 37 हजार से ज्यादा पेज गायब है। मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) ने सुनवाई के दौरान इसे गंभीर माना और राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर रिकॉर्ड के गायब पन्ने कहाँ गए?

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने दायर की है याचिका
मप्र में नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़ा का आरोप लगाते हुए लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया है कि नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए मप्र नर्सिंग काउंसिल ने ऐसे कॉलेजों को मान्यता दे दी, जिनके पास न तो खुद का भवन है और न ही इंफ्रास्ट्रक्चर। यदि कही भवन है भी, तो उसी में कई पाठ्यक्रम संचालित हो रहे है। नियम मुताबिक कॉलेज की मान्यता को लेकर जो मापदंड तय किए गए, उनको दरकिनार कर अधिकारियों, जांचकर्ताओं ने सांठगाँठ कर मान्यता दे दी। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मान्यता का रिकॉर्ड सरकार से माँगा था, जिसका निरीक्षण करने याचिकाकर्ता को अनुमति प्रदान की गई थी।

फ़ाइल से 37 हजार 759 पेज गायब !
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता का समस्त रिकॉर्ड पेश किया था। जिसका परीक्षण करने बाद याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। जिससे बड़ा खुलासा हुआ कि 453 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता संबधी मूल रिकॉर्ड से 37 हजार 759 पन्ने गायब है। मान्यता से संबंधित जानकारी फाइलों में है, लेकिन वास्तविक दस्तावेज जिनके आधार पर कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई, वह गायब है। नियमों मुताबिक कॉलेजों को मान्यता के लिए जिन शर्तों को पूरा करना चाहिए, वह कागजात गायब है।

कोर्ट सख्त, सरकार से माँगा जबाब
याचिका पर सुनवाई के दौरान विशाल बघेल द्वारा पेश की गई परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने मूल दस्तावेजों की हेराफेरी को गंभीर कृत्य माना है। हाईकोर्ट ने इस सिलसिले में नर्सिंग काउंसिल और सरकार से जबाब माँगा है। अगली सुनवाई 11 जुलाई को रखी गई है, तब तक कोर्ट के समक्ष सरकार को इस सवाल का जबाब देना होगा कि आखिर मूल रिकॉर्ड से कॉलेजों की मान्यता संबंधी 37 हजार 759 पन्ने कहाँ और क्यों गायब हुए?

चौंकाने वाले कई खुलासे
सरकार द्वारा कॉलेजों के मान्यता संबधी रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद याचिकाकर्ता ने पाया कि 80 ऐसे कॉलेज है, जहाँ का शैक्षिणक स्टाफ एक ही समय में अन्य संस्थाओं में कार्यरत है। कुछ कॉलेज में एक ही भवन में कई तरह के पाठ्यक्रमों की मान्यता ले ली गई, जो नियमों के विपरीत है। अदालत के समक्ष कॉलेजों की फोटों के साथ एक सूची भी पेश की गई है। इसके अलावा साल 2020-21 में जिन नर्सिंग कॉलेजों द्वारा ऑनलाइन फार्म में शैक्षणिक स्टाफ दर्शाया था, उसकी सॉफ्ट कॉपी की मांग की गई। मप्र हाईकोर्ट ने इस संबंध में भी नर्सिंग काउंसिल को समस्त रिकॉर्ड याचिकाकर्ता को मुहैया कराने के निर्देश दिए है।












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