ध्रुव पर बर्फ पिघलने से 48,500 साल बाद जाग रहे जॉम्बी वारयस, मंडरा रहा कोरोना से भी बड़ी महामारी का खतरा

वैज्ञानिकों ने आर्कटिक और अन्य स्थानों पर बर्फ की चोटियों के नीचे दबे वायरस से उत्पन्न खतरों के बारे में चेतावनी दी है। द गार्जियन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि धरती के बढ़ते तापमान से आर्कटिक के पर्माफ्रॉस्ट भी पिघल रहे हैं। इसकी वजह से जॉम्बी वायरस का प्रकोप फैल सकता है।

पर्माफ्रॉस्ट पृथ्वी की सतह पर या उसके नीचे स्थायी रूप से जमी हुई परत है जो कम से कम 2 सालों तक बर्फ में दबी रहती है। इसमें मिट्टी, बजरी, और रेत होती है, जो आमतौर पर बर्फ़ से एक साथ बंधी होती है। आर्कटिक में जमीनें हजारों साल से बर्फ में ढकी हुई हैं।

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ऐसे में यदि पर्माफ्रॉस्ट के पिघलते हैं तो इससे इंसानों को कई गुना घातक आपदा का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिघलने वाला आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट 'ज़ोंबी वायरस' जारी कर सकता है और एक भयावह वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल को ट्रिगर कर सकता है।

इन वायरस से जुड़े खतरों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, एक वैज्ञानिक ने पिछले साल साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट से लिए गए नमूनों से उनमें से कुछ को पुनर्जीवित किया था। ये वायरस जमीन में जमे हुए हजारों साल बिता चुके हैं।

इन वायरसों को रूस के सुदूर पूर्वी इलाके में स्थित साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट से खोजा गया। यहां पर पांच अलग-अलग प्रजातियों के 13 वायरसों के सैंपल इकट्ठा कर उसपर शोध शुरू हुआ था।

ऐसा कहा जाता है कि इनमें से कुछ वायरस 48,500 साल पुराने हैं। हजारों-हजार सालों से ये बर्फ में दबे सो रहे थे। लेकिन जमीन पिघलने की वजह से अब ये जाग गए हैं। ये वायरस बर्फ में दबे होने के कारण सदियों से किसी जीव के संपर्क में नहीं आए थे। लेकिन अब पानी के साथ बहकर समंदर में मिल रहे हैं। अब ये किसी जीव के संपर्क में आने पर किस तरह से रिएक्ट करेंगे, ये बता पाना मुश्किल है।

एक्स-मार्सील यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में जीनोमिक्स और बायोइन्फॉरमेटिक्स के प्रोफेसर जीन-मिशेल क्लेवेरी ने कहा कि आर्किटक में ऐसे वायरस हैं जो मनुष्यों को संक्रमित करने और एक नई बीमारी का प्रकोप शुरू करने की क्षमता रखते हैं। जो कोरोना से भी कई गुणा अधिक खतरनाक हो सकता है।

रॉटरडैम में इरास्मस मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिक मैरियन कूपमैन्स ने भी इससे सहमति जताई और कहा, "हम नहीं जानते कि पर्माफ्रॉस्ट में कौन से वायरस मौजूद हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वास्तविक जोखिम है कि कोई वायरस ट्रिगर करने में सक्षम हो सकता है।"

क्लेवेरी ने कहा कि जिन वायरस को हमने अलग किया था, वे केवल अमीबा को संक्रमित करने में सक्षम थे और मनुष्यों के लिए कोई खतरा नहीं था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य वायरस जो अभी भी पर्माफ्रॉस्ट में जमे हुए हैं, मनुष्यों को बीमार करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।

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