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Year Ender 2025: इंडियन डिफेंस के लिए शानदार रहा ये साल, जानें कौन-कौन सी मिसाइलों के किए सफल परीक्षण

Year Ender 2025: साल 2025 में भारत ने डिफेंस के क्षेत्र में जोरदार छलांग लगाई है। ऑपरेशन 'सिंदूर' के बाद देश ने लगातार कई मिसाइलों के परीक्षण किए, नई टेक्नोलॉजी विकसित की और अपनी सैन्य क्षमता को नए स्तर तक पहुंचाया। आइए जानते हैं, इस साल भारत ने रक्षा शक्ति में क्या-क्या हासिल किया।

हाइपोर्सोनिक टेक्नोलॉजी

25 अप्रैल 2025 भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन साबित हुआ। DRDO ने हैदराबाद स्थित Scramjet-Connect Test Facility में पहली बार स्क्रमजेट (scramjet) इंजन का 1,000 सेकंड (लगभग 16+ मिनट) का सफल ग्राउंड टेस्ट किया।

Year Ender 2025

यह उपलब्धि इस बात का सबूत है कि भारत ने हाइपोर्सोनिक क्रूज़ मिसाइल (जो Mach 5+ की अविश्वसनीय गति से उड़ती है) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। हाइपोर्सोनिक मिसाइलें तेज़, घातक और ट्रैक करना बेहद मुश्किल होती हैं-जो किसी भी आधुनिक युद्ध में गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।

24 घंटे में तीन मिसाइल परीक्षण

16-17 जुलाई 2025 भारत की स्ट्राइक कैपेबिलिटी के लिए एक मजबूत संकेत था। सिर्फ 24 घंटे में देश ने तीन बड़ी मिसाइलों का सफल परीक्षण किया:

• Prithvi-2 - कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल
• Agni-1 - कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल
• Akash-Prime - एडवांस्ड एयर-डिफेंस मिसाइल सिस्टम

17 जुलाई को Prithvi-2 और Agni-1 दोनों मिसाइलों ने अपने सभी मिशन पैरामीटर्स और तकनीकी मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इन परीक्षणों ने दिखा दिया कि भारत की शॉर्ट और मीडियम-रेंज स्ट्राइक क्षमता, खासकर क्विक रिस्पॉन्स मिशनों में, और मजबूत हो चुकी है। 28 और 29 जुलाई 2025 को भारत ने स्वदेशी Pralay बैलिस्टिक मिसाइल के लगातार दो सफल टेस्ट किए।

Pralay मिसाइल की खासियत:

• रेंज: 150-500 किमी
• पेलोड क्षमता: 350-700 किलो
• हाई प्रिसिजन स्ट्राइक

यह मिसाइल दुश्मन के सामरिक ठिकानों को बेहद सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है। सीमांत सुरक्षा, तेज़ प्रतिक्रिया और रणनीतिक मिशनों में यह भारत के लिए बेहद अहम हथियार बन चुका है।

तोपों की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा

एयरो इंडिया 2025 में DRDO ने एक और धमाका कर दिया। DRDO ने 155 mm Ramjet Artillery Projectile पेश की, जिसे भारत की एडवांस्ड तोप ATAGS के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि ATAGS की मारक रेंज को 45 किमी से बढ़ाकर 80 किमी तक ले जाने की क्षमता। इस टेक्नोलॉजी से भारतीय तोपों की पावर, दूरी और ऑपरेशनल क्षमता कई गुना बढ़ जाती है - खासकर सीमा पर हाई-एक्युरेसी स्ट्राइक के लिए।

DRDO सुपरफास्ट मोड में: 138 रक्षा प्रोजेक्ट्स पूरे

2025 में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि DRDO ने पिछले तीन सालों में कुल 138 रक्षा प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इनमें शामिल हैं:
• मिसाइल सिस्टम
• एयर-डिफेंस टेक्नोलॉजी
• गाइडेड वेपन्स
• सॉलिड-फ्यूल रॉकेट टेक्नोलॉजी
• नई आर्टिलरी सिस्टम्स
यह आंकड़ा दिखाता है कि भारत सिर्फ परीक्षण नहीं कर रहा, बल्कि व्यापक स्तर पर स्वदेशी रक्षा उत्पादन और टेक्नोलॉजी डेवेलपमेंट को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है।

ये प्रगति भारत के लिए क्यों बेहद अहम है?

• हाइपोर्सोनिक टेक्नोलॉजी भारत को बेहद तेज़, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली और ट्रैक करना मुश्किल मिसाइलों के निर्माण की दिशा में बढ़त देती है।
Prithvi-2, Agni-1, Pralay जैसी मिसाइलें भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी और स्ट्राइक कैपेबिलिटी को कई स्तर ऊपर ले जाती हैं।
• नई 155 mm रैमजेट आर्टिलरी भारतीय तोपों को लंबी दूरी से हमला करने में सक्षम बनाती है।
• 138 प्रोजेक्ट्स पूरा होना दिखाता है कि भारत एक मजबूत, स्वदेशी और आधुनिक डिफेंस इकोसिस्टम बना रहा है। कुल मिलाकर, 2025 भारत की रक्षा शक्ति के लिए "बिग-लीप ईयर" साबित हुआ है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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