Year Ender 2024: पृथ्वी की हालत तंदूर जैसी, इतिहास का सबसे अधिक गर्म वर्ष, Global Warming ने तोड़े रिकॉर्ड
Year Ender 2024: पृथ्वी पर तेजी से बदलती जलवायु (Climate Chang) के चलते साल दर साल दुनिया के सभी देशों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में तो मानव जीवन पर पूरी तरह से संकट बन गया है। ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) के प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों और तटीय इलाको में साल दर साल महाविनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं की संख्या बढ़ रही है। जलवायु संकट के बीच कई इलाकों में आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इस सब के बीच मौजदा वर्ष की बात करें तो ये धरती के अब तक ज्ञात इतिहास में सबसे अधिक गर्म वर्ष रहा।
वर्तमान स्थिति का आकलन करने के बाद जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वॉर्मिंक के प्रभावों का नजदीकी से अध्ययन करने वाले साइंटिस्ट्स ने जलवायु संकट अगले वर्ष और अधिक बढ़ने के संकेत दिए हैं। यूरोपियन यूनियन की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने बड़ा खुलासा किया है कि साल 2024 इतिहास का सबसे गर्म साल रहा। जलवायु परिवर्तन और तामपान को लेकर अध्ययन की बात करें तो जनवरी से नवंबर तक का औसत वैश्विक तापमान प्री-इंडस्ट्रियल एरा (1850-1900) की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। इससे पहले 2023 को सबसे गर्म साल के तौर पर दर्ज किया गया।

एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
कॉपरनिकस के जलवायु विशेषज्ञ जुलियन निकोलस ने ताजा अध्ययन में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से आगाह किया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2024 का नवंबर में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा। कॉपरनिकस के जलवायु विशेषज्ञ जुलियन निकोलस ने आगार किया है। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में ये स्थिति बिगड़ सकती है। निकोलस ने कहा कि जीवाश्म ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंक को सबसे अधिक बढ़ावा देते हैं। ऐसे इसके प्रयोग को रोकना बेहद जरूरी है। निकोलस ने कहा कि जिस तरह से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, वो दिन दूर नहीं जब धरती तंदूर की तरह गर्म हो जाएगी।
2025 पर साइंटिस्ट्स की टिकी नजर
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो और ला नीना जैसे जलवायु पैटर्न तापमान को प्रभावित करते हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिक फ्रेडरिक ओट्टो ने बताया कि अगले साल अल नीनो की जगह ला नीना के प्रभाव से तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि स्थिति सामान्य होगी। संभावना है कि अगामी वर्षों के दौरान हीटवेव, सूखा, जंगली आग और साइक्लोन जैसी आपदाओं का प्रकोप बढ़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने की जरूरत
एक रिपोर्ट्स में जलवायु पर परिवर्तन रखने वाली संस्था C3S ने कहा कि वर्ष 2024 में CO2 उत्सर्जन रिकॉर्ड स्तर पर रहा। हालांकि कई देशों ने इसे कम करने का वादा किया था। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के इस संकट से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन को शून्य करना बेहद जरूरी है। साइंटिस्ट्स के मुताबिक अगर ग्लोबल वॉर्मिंग को नियंत्रित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते तो आगामी वर्षों में पृथ्वी पर महाविनाशकारी आपदाओं की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो सकती है।












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