पाकिस्तान के लिए शी जिनपिंग ने किया बहुत बड़ा ऐलान, शहबाज शरीफ ने बीजिंग में की है मुलाकात

पाकिस्तान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, दोनों नेता सीपीईसी और रणनीतिक साझेदारी समेत विभिन्न क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं।

Shahbaz Sharif China: पाकिस्तान के प्रधानमत्री शहबाज शरीफ चीन के दौरे पर पहुंचे हैं, जहां उन्होंने लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने वाले शी जिनपिंग से मुलाकात की। प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज शरीफ की ये पहली चीन यात्रा है, जहां दोनों देशों के नेताओं के बीच बैठक की गई है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान चीन-पाकिस्तान की सदाबहार दोस्ती और 60 अरब अमरीकी डालर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है।

चीन दौरे पर शहबाज शरीफ

चीन दौरे पर शहबाज शरीफ

शहबाज शरीफ दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार रात बीजिंग पहुंचे हैं और इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा है। हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज शरीफ की शी जिनपिंग के साथ ये दूसरी मुलाकात है। उन्होंने पिछले महीने उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के मौके पर भी शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। शहबाज शरीफ के साथ समरकंद बैठक में शी जिनपिंग ने सीपीईसी परियोजनाओं पर काम कर रहे सैकड़ों चीनियों को ठोस सुरक्षा मुहैया कराने का आह्वान किया था। पाकिस्तान की सरकारी एपीपी समाचार एजेंसी ने बुधवार को बताया कि, शहबाज शरीफ और शी जिनपिंग ने मंगलवार को चीन के पीपुल्स ग्रेट हॉल में मुलाकात की और क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचारों के आदान-प्रदान के अलावा अर्थव्यवस्था और निवेश में व्यापक सहयोग पर चर्चा की है।

बातचीत के केन्द्र में सीपीईसी

बातचीत के केन्द्र में सीपीईसी

पाकिस्तान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, दोनों नेता सीपीईसी और रणनीतिक साझेदारी समेत विभिन्न क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। वहीं, शहबाज शरीफ और शी जिनपिंग, दोनों नेताओं ने अपने देशों के बीच ऑल वेदर स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन पार्टनरशिप को और बढ़ावा देने की इच्छा जताई है। आपको बता दें कि, शहबाज शरीफ चीनी नेता शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद बधाई देने वाले पहले नेता थे। आपको बता दें कि, पिछले महीने ही शी जिनपिंग को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का लगातार तीसरी बार महासचिव चुना गया है और कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक में शी जिनपिंग को चीन का सर्वशक्तिशाली नेता बना दिया गया है। वहीं, अपने चीन दौरे के दौरान शी जिनपिंग चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग और चीन की संसद- नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के अध्यक्ष ली झांशु से भी मुलाकात करेंगे।

कई समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद

कई समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि, उनकी यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। लेकिन, पाकिस्तान को सबसे ज्यादा उम्मीद इस बात को लेकर है, कि चीन कर्ज को लेकर उसे राहत दे। अगर चीन से पाकिस्तान को राहत मिल जाती है, तो वो आने वाले महीनों में खुद को बड़े आर्थिक संकट में फंसने से बचा लेगा। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अगर चीन ने राहत नहीं मिलती है, तो पाकिस्तान में श्रीलंका सरीखा संकट ही उत्पन्न हो सकता है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, पाकिस्तान का कुल नन-पेरिस क्लब बाइलेटरल कर्ज वर्तमान में लगभग 27 अरब अमरीकी डालर है, जिसमें से चीन का कर्ज करीब 23 अरब अमरीकी डालर है। लिहाजा, पाकिस्तान चीन से बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कर रहा है। वहीं, शहबाज शरीफ की चीन यात्रा उस वक्त हो रही है, जब उनके देश में राजनीतिक गतिरोध गहराया हुआ है। इमरान खान की लॉंग मार्च ने शहबाज शरीफ सरकार की परेशानी बढ़ा रखी है।

शी जिनपिंग की बड़ी घोषणा

शी जिनपिंग की बड़ी घोषणा

वहीं, शहबाज शरीफ से मुलाकत के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है, कि पाकिस्तान में वित्तीय संस्थानों की स्थापना में चीन पाकिस्तान की मदद करेगा। चीन की सरकारी मीडिया की तरफ से दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात के बाद बयान जारी किया गया है। हालांकि, चीन की तरफ से सीपीईसी प्रोजेक्ट को लेकर भी बयान जारी किया गया है और कहा गया है, कि चीन और पाकिस्तान को अपने आर्थिक गलियारे के निर्माण के साथ और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ना चाहिए, साथ ही ग्वादर सी पोर्ट के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लानी चाहिए। आपको बता दें कि, सीपीईसी को लेकर चीन पहले ही नाराजगी जता चुका है। चीन सीपीईसी की परियोजनाओं में देरी से भी नाखुश है, जो कि शी जिनपिंग की मल्टी-बिलियन डॉलर प्रोजेक्ट बीरआई का हिस्सा है। लेकिन, पाकिस्तान की तरफ से इस प्रोजेक्ट को इतना लेट कर दिया गया है, कि चीन के निवेशकों को काफी घाटा हुआ है और चीनी निवेशकों में गहरा असंतोष है।

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