सऊदी अरब में महिलाओं के नये अवतार को देख दुनिया दंग, पहली बार ऊंट प्रतियोगिता में दिखाया जलवा
तेल समृद्ध खाड़ी राज्य इस्लाम की कठोर व्याख्या का पालन करता है, लेकिन 2017 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं को धीरे धीरे आजादी दी जा रही है।
रियाद, जनवरी 11: सऊदी अरब काफी तेजी से क्राउन प्रिंस के मिशन-2030 की तरफ बढ़ रहा है और देश को मजहबी कट्टरपंथ से तेजी से निकाल रहा है। सऊदी अरब महिलाओं के प्रति अपनी कट्टरपंथी और रूढ़िवादी सोच को लगातार बदल रहा है और देश की नई छवि दुनिया के सामने पेश कर रहा है। सऊदी अरब से ऊंटों के मेले से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं हैं, जो सऊदी अरब की बदलती सोच की तस्दीक कर रहा है।

ऊंटों के परेड में महिलाएं
ऐसा पहली बार हुआ है, जब सऊदी अरब में महिलाओं को ऊंटों के मेले में शामिल होने और उन्हें ऊंटों के परेड में शामिल होने की इजाजत दी गई है। सऊदी अरब में आयोजित ऊंटों के सौंदर्य प्रतियोगिता 'शिप्स ऑफ द डेजर्ट' में पहली बार महिलाओं ने हिस्सा लिया है और ऊंटों की परेड निकाली है। आपको बता दें कि, सऊदी अरब में ऊंटों की ये सौंदर्य प्रतियोगिता एक फेस्टिवल का हिस्सा है, जिसका नाम अब्जेसअजीज फेस्टिवल है और इस प्रतियोगिता में सिर्फ मर्दों को ही भाग लेने की इजाजत थी, लेकिन पहली बार सऊदी शासन ने महिलाओं को मेले में भाग लेने की इजाजत दी है।
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महिलाओं में काफी खुशी
ऊंटों के इस प्रतियोगिता में पहली बार भाग लेने वाली 27 साल की लामिया अल-रशीदी काफी ज्यादा खुश हैं और उन्होंने कहा कि, ''इंशाअल्लाह, आज ये साबित हुआ है और मैं उम्मीद करती हूं कि हमें (महिलाओं) समाज में जरूर सम्मान मिलेगा''। ऊंटों की ये प्रतियोगिता सऊदी अरब की राजधानी रियाद के उत्तर-पूर्व में रूमा रेगिस्तान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दर्जनों प्रतिभागी हिस्सा ले रही हैं।

बचपन से ही था शौक
प्रतियोगिता में भाग लेने वाली रशीदी ने कहा कि, "जब से मैं छोटी थी तभी से मुझे ऊंटों में दिलचस्पी रही है और मेरे परिवार में ही 40 ऊंट हैं''। उन्होंने कहा कि, ''जैसे ही इस प्रतियोगिता में महिलाओं को भाग लेने की इजाजत दी गई, मैं खुद को रोक नहीं सकी''।

स्कार्फ से चेहरा ढकी महिलाएं
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंटों की इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी महिलाओं ने काले रंग के स्कार्फ से अपना चेहरा ढंक रखा था और उनके कंथों पर अलग अलग रंगों का शॉल लटक रहा था और इन महिलाओं का स्टाइल देखने ही लायक था।

प्रतियोगिता में करोड़ों इनाम
राजधानी रियाद में आयोजित इस प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए करोड़ों रुपये का इनाम रखा हुआ था और इस प्रतियोगिता में 40 महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था और रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतियोगिता में टॉप-5 में रहने वाली महिलाओं को 10 लाख रियाल यानि 19 करोड़ 23 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया है। आपको बता दें कि, प्रतियोगिता में विजेताओं का फैसला कई प्वाइंट्स के आधार पर किया जाता है ऊंटों की सुंदरता पर भी काफी अंक दिए जाते हैं। इसमें ऊंटों की गर्दन, होंठ और ऊंटों के कूबड़ के आकार पर भी ध्यान दिया जाता है।

दिसंबर में कई ऊंटों को किया गया था रिजेक्ट
आपको बता दें कि, ऊंटों के इस प्रतियोगिता की तैयारी पिछले कई महीनों से चल रही थी और दिसंबर महीने में इस प्रतियोगिता से कई ऊंटों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था, क्योंकि ऊंटों को बोटोक्स इंजेक्शन दिए गये थे, जिससे ऊंटों की शक्ति बढ़ती है। ऊंटों के इस परेड में लाल रंग के रेत के ट्रैक पर ऊंटों पर सवार और चेहरे को काले रंग के स्कार्फ से ढंकी महिलाएं जब परेड में निकली, तो देखने वाले उस खूबसूरती को देखकर दंग रह गये। इन महिलाओं ने सफेद रंग का ड्रेस पहन रखा था और तलवार लिए पुरूष प्रतिभागी म्यूजिक की धुन पर नाचने लगे, इस बीच महिला प्रतिभागी आगे निकल गईं और प्रतियोगिता को जीत लिया।

सऊदी अरब में 'समाज सुधार'
तेल समृद्ध खाड़ी राज्य इस्लाम की कठोर व्याख्या का पालन करता है, लेकिन 2017 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं को धीरे धीरे आजादी दी जा रही है और पिछले साल सऊदी अरब में महिलाओं को कार चलाने की भी आजादी दी चुकी है।

शरिया में संशोधन
वहीं, सऊदी अरब में शरिया कानून को संशोधित किया जा रहा है और सऊदी अरब, पर्यटन, मनोरंजन और खेल क्षेत्रों में भारी निवेश करते हुए तेल से दूर अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। सऊदी अरब में आए इस सामाजिक बदलाव की वजह से अब सड़कों पर पुरूषों के साथ महिलाएं भी गाड़ी चलाती नजर आ रही हैं, जो काफी सुखद लगता है।

महिलाओं से समृद्ध हुआ ऊंटों का मेला
वहीं, ऊंटों के इस मेले का मैनेजमेंट संभाल रहे मोहम्मद अल-हरबी ने कहा कि, "महिलाएं हमेशा से हमारे खानाबदोश समाज का एक अभिन्न अंग रही हैं। वे ऊंटों की मालिकिन हुआ करती थीं और उनकी देखभाल किया करती थीं''। उन्होंने कहा कि, ''महिलाओं की भागीदारी सऊदी अरब की "ऐतिहासिक विरासत" को ध्यान में रखते हुए किा गया है''। वहीं एक और प्रतिभागी मुनीरा अल-मिश्खास ने कहा कि "ऊंट लंबे समय से हमारा हिस्सा रहे हैं, लेकिन हमारे (महिलाओं) के लिए एक प्रतियोगिता का मंचन करना एक बड़ा कदम है।''












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