ब्रिटेन के उपचुनाव में पीएम मोदी बने मुद्दा, संसद में तीखी बहस

मोदी और जॉनसन का पोस्टर
Reuters
मोदी और जॉनसन का पोस्टर

ब्रितानी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ़ कॉमंस' में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और नेता प्रतिपक्ष कीर स्टर्मर के बीच उपचुनाव के लिए छपे विवादित पर्चे को लेकर तीखी बहस हुई.

इस पर्चे को ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय ने 'विभाजनकारी' और 'भारत विरोधी' बताया है.

सदन में प्रधानमंत्री से पूछे जाने वाले प्रश्न काल (पीएमक्यू) के दौरान नस्लवाद के मुद्दे पर काफ़ी तीखी बहस हुई.

बोरिस जॉनसन ने उस पर्चे को हाथ में ले रखा था, जिस पर उन्हें वर्ष 2019 के जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते दिखाया गया और संदेश लिखा गया कि ''टॉरी सांसद (कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसदों के लिए इस्तेमाल होने वाली शब्दावली) का जोखिम ना उठाएं, वो आपके पक्ष में नहीं हैं.''

उन्होंने लेबर पार्टी के नेता से माँग की कि "वे पर्चों को वापस लें जिनका इस्तेमाल हाल में उत्तर इंग्लैंड के बैटले एंड स्पेन सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान किया गया था." इस सीट पर विपक्षी पार्टी ने जीत दर्ज की है.

जॉनसन ने कहा, ''क्या अब मैं उन्हें कह सकता हूँ कि वे इस पर्चे को वापस लें जो मेरे हाथ में है और जिसे लेबर पार्टी द्वारा बैटले एंड स्पेन उपचुनाव के दौरान प्रकाशित किया गया था और ख़ुद उनकी पार्टी के नेताओं ने उसे नस्लवादी करार देते हुए निंदा की थी."

मोदी जी-7
Getty Images
मोदी जी-7

दोनों पार्टियों में टकराव

हालांकि, लेबर पार्टी के नेता इंग्लैंड के फ़ुटबॉल खिलाड़ियों द्वारा मैदान में झेले जाने वाले नस्लवादी दुर्व्यवहार के संदर्भ में कंज़र्वेटिव पार्टी द्वारा विरोध नहीं करने की टिप्पणी पर अड़े दिखाई दिए.

उन्होंने कहा, ''ये बहुत आसान है, प्रधानमंत्री नस्लवाद के ख़िलाफ़ इंग्लैंड के खिलाड़ियों के साथ खड़े रहें या वे अपने मंत्रियों और सांसदों के रिकॉर्ड का बचाव कर सकते हैं, लेकिन वे दोनों बाते नहीं कर सकते. क्या वे सदन में कह सकते हैं कि वो उनकी आलोचना करने में असफल रहने पर खेद जताते हैं जिन्होंने नस्लवाद के साथ खड़े होने पर इंग्लैंड के खिलाड़ियों का तिरस्कार किया."

कीर स्टर्मर ने इस मुद्दे पर ख़ासतौर पर गृह मंत्री प्रीति पटेल का संदर्भ दिया.

उपचुनाव में छपे इस पर्चे को लेकर बहस दोबारा तीखी हो गई है, जिसकी आलोचना लेबर पार्टी के कई नेताओं और भारतीय समुदाय के समूहों द्वारा की जा चुकी है.

https://twitter.com/manojladwa/status/1415270887369150467

ब्रिटेन में रहने वाले उद्यमी और प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव अभियान दल के पूर्व सदस्य प्रोफ़ेसर मनोज लाडवा ने ट्वीट किया, ''ये बहुत ही निराशाजनक और परेशान करने वाला है कि लेबर पार्टी के नेता कीर स्टर्मर ने लेबर पार्टी द्वारा हाल में सपंन्न बैटले एंड स्पेन उपचुनाव के दौरान छपवाए 'नस्लवादी और भारत विरोधी' पर्चे की निंदा करने से इनकार कर दिया. यह मुद्दा प्रधानमंत्री जॉनसन ने पीएमक्यू के दौरान उठाया था.''

पिछले महीने हुए उपचुनाव के दौरान लेबर फ्रेंड्स ऑफ़ इंडिया (एलएफआईएन) समूह ने तत्काल इस पर्चे को वापस लेने की माँग की थी.

भारतीय मूल के सांसद निवेंदु मिश्र ने ट्विटर के माध्यम से इस पर विरोध दर्ज कराया था. उन्होंने ट्वीट किया कि ''नस्लवाद ज़िंदा है और वो भी लेबर (पार्टी) के भीतर.''

ओवरसीज़ फ्रेंड्स ऑफ़ बीजेपी (ओएफबीजेपी) समूह ने भी लेबर पार्टी नेता कीर स्टर्मर के ख़िलाफ़ शिकायती पत्र के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी थी और पर्चा अभियान में 'वोट बैंक की राजनीति' करने पर आलोचना की थी.

मोदी और जॉनसन का पोस्टर
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कहाँ से शुरु हुआ हंगामा?

जून के अंतिम सप्ताह में ख़बरें आई थीं कि उत्तरी इंग्लैंड में उपचुनाव के दौरान लेबर पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध कर वोट पाने की कोशिश कर रही है.

लेबर पार्टी की प्रचार सामग्री पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कंज़र्वेटिव पार्टी के नेता और ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन के साथ एक तस्वीर में दिखाई दिए थे. यह एक पोस्टर था जिस पर पीएम मोदी से बचकर रहने की बात लिखी गई थी.

तब लेबर पार्टी ने दलील दी थी कि "अगर वहाँ के लोगों ने दूसरी पार्टी को वोट दिया तो ऐसी तस्वीर दिखने का ख़तरा है, लेकिन लेबर पार्टी इस मामले में स्पष्ट है."

इस प्रचार सामग्री के वायरल होते ही प्रवासी भारतीय समूहों ने ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी को विभाजनकारी और भारत विरोधी करार दिया.

https://twitter.com/RicHolden/status/1409444990019854340

इस पोस्टर के सामने आने के बाद, लोगों ने सवाल किया कि क्या लेबर पार्टी के नेता सर कीर स्टर्मर को भारतीय प्रधानमंत्री के साथ हाथ मिलाते हुए नहीं देखा जाएगा.

तब भारतीय समुदाय के संगठन कंज़र्वेटिव फ्रैंड्स ऑफ़ इंडिया ने सवाल किया था कि क्या लेबर पार्टी का कोई प्रधानमंत्री या राजनेता दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ कोई संबंध रखने से इनकार करेगा? क्या ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के 15 लाख से अधिक सदस्यों के लिए आपका यह संदेश है?

इस प्रचार सामग्री को लेकर लेबर पार्टी के नेताओं के बीच भी आक्रोश देखने को मिला था.

लेबर फ्रैंड्स ऑफ़ इंडिया (एलएफआईएन) ने इसे तत्काल वापस लेने की माँग की थी.

एलएफआईएन ने एक बयान में कहा था कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि लेबर पार्टी ने अपने लीफ़लेट पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और ब्रिटेन के सबसे क़रीबी दोस्तों में से एक, भारत के प्रधानमंत्री की 2019 के जी-7 सम्मेलन की एक तस्वीर इस्तेमाल की.

लेबर पार्टी के भारतीय मूल के वरिष्ठ सांसद वीरेंद्र शर्मा ने भी इस क़दम की निंदा की थी.

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