नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा पर ओबामा का खुफिया कैमरा!
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा बहुत सफल रही। भारत को आर्थिक एवं सामाजिक लाभ पहुंचाने वाली इस यात्रा से क्या लाभ होगा, यह तो जल्द दिखाई दे जायेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोद की इस यात्रा पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने खुफिया कैमरा लगा रखा था!
अरे चौंकिये नहीं ऐसा कोई कैमरा नहीं लगा था, लेकिन हां ओबामा की एक टीम जरूर इस यात्रा पर नजरे टिकाये होगी।
भारत की अर्थव्यवस्था का वर्तमान में जिस तरह से विस्तार हो रहा है, उसे अमेरिका समझता है। उसे मालूम है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एशिया में तीसरे स्थान पर है। ये बात चीन को भी पता है।
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मिलिट्री बजट
भारत का मिलिट्री बजट 38 बिलयन डालर के आसपास है। 2020 में भारत का डिफेंस बजट दुनिया का चौथे नंबर का हो जाएगा। और सबसे बड़ी बात ये है कि भारत का मिडिल क्लास पैसे वाला है।
नजरअंदाज नहीं कर सकता
जाहिर है कि इस तरह के देश को अमेरिका नजरअंदाज नहीं कर सकता तब तो कतई नहीं जब अमेरिका को चुनौती देने वाला चीन उसके करीब आ रहा है। भारत-चीन के व्यापारिक संबंध 100 बिलियन डालर तक पहुंच रहे हैं।
लंबा इतिहास
विदेश मामलों के जानकार पुष्परंजन ने एक बार कहा था कि भारत-अमेरिका के संबंधों का लंबा इतिहास है। दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। इसके विपरीत भारत-चीन के बीच 2500 किलोमीटर की सरहद है। सीमा विवाद बेहद कटु है। इस सवाल पर दोनों देश जंग लड़ चुके हैं। उस जंग की कड़वी यादें भारत के जेहन में है। इसलिए अमेरिका को मालूम है कि भारत चीन से संबंध मजबूत करते हुए उसकी अनदेखी नहीं कर सकता।
भारतीयों का रोल
एक बात और। भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूती अमेरिका में बसे 25 लाख से ज्यादा भारतीय भी देते हैं। वे अमेरिका में अहम पदों पर हैं। अमेरिकी प्रशासन में उनकी तूती बोलती है। ये भारत-अमेरिका संबंधों को कभी कटु नहीं होने देंगे।
पाक अधिग्रहित कश्मीर
हालांकि मोदी चीन दौरे पर हैं, पर भारत को इस बात को लेकर चिंता बनी रहती है चीन पाकिस्तान को अतिरिक्त रूप से मदद कर रहा है। एक इस तरह के मुल्क को जो आतंकवाद का गढ़ बन चुका है। उसने और तो और पाक अधिग्रहित कश्मीर में भी तगड़ा निवेश करना शुरू कर दिया है।
पर जानकार मानते हैं कि वर्तमान वैश्विक संसार में कोई भी देश एक-दूसरे से दूर नहीं रह सकता। सबको एक-दूसरे की जरूरत है। इसलिए एक देश के दूसरे देश से संबंधों के मधुर होने से किसी तीसरे देश को परेशान नहीं होना चाहिए।













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