पेप्सी और कोकाकोला के सामने दुनिया की कोई कंपनी नहीं टिक पाई, अंबानी की कैंपाकोला चटा पाएगी धूल?
बाजार में जितने भी अलग-अलग फेमस कोल्ड डिंक्स के नाम आप सुनते हैं वे पेप्सी और कोकाकोला के ही प्रोडक्ट हैं। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या ट्रेंड तोड़ने मुकेश अंबानी, कोकाकोला और पेप्सी के वर्चस्व को तोड़ पाएंगे?
नई दिल्ली, 03 सितंबरः इस डिजिटल दौर में अब खबर बहुत देर तक नहीं छुपती। बाजार की दुनिया की थोड़ी सी भी जानकारी रखने वालों को तो मालूम हो ही चुका होगा कि मुकेश अंबानी ने अब कोला बाजार में उतरने के लिए कमर कस लिया है। इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्री एक और बड़ा अधिग्रहण करने जा रही है। इस नए अधिग्रहण के साथ ही मुकेश अंबानी सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में बड़ा उलटफेर करने जा रहे हैं। कभी कोला बाजार में टॉप की कंपनी मानी जाने वाली कैंपा कोला फिर से बाजार में वापसी करने जा रही है।

रिलायंस ने प्योर ड्रिंक ग्रुप से की डील
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस ने प्योर ड्रिंक ग्रुप से 22 करोड़ की डील की है। इसके सौदे के साथ ही एक बार फिर से कैंपा कोला भारतीय बाजार में लौटने जा रहा है। 1970 के दशक में कैंपा कोला को कंपनी ने लॉन्च किया था, लेकिन पेप्सी, कोका कोला जैसी कंपनियों के कारण इसे बाजार से बाहर होना पड़ा। अब रिलायंस के साथ एक बार फिर से ये मार्केट में उतर रहा है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या ट्रेंड तोड़ने मुकेश अंबानी, कोकाकोला और पेप्सी के वर्चस्व को तोड़ पाएंगे?

पूरी दुनिया के ड्रिंक मार्केट पर दो कंपनियों का दबदबा
कोका कोला 1886 में फार्मेसिस्ट जॉन पेम्बेरटन द्वारा शुरू की गई थी वहीं इसके महज 7 साल बाद 1893 में फार्मेसिस्ट सेलेब ब्रेडहम द्वारा पेप्सी को लाया गया। ये दोनों ही अमेरिकी कंपनी हैं। भारत ही नहीं लगभग पूरी दुनिया में सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट का कारोबार इन्हीं दो कंपनियों के बीच बंटा हुआ है। बाजार में जितने भी अलग-अलग फेमस कोल्ड डिंक्स के नाम आप सुनते हैं वे इन्हीं दो कंपनियों के प्रोडक्ट हैं। सेवेन अप, माउटेन ड्यू, मिरिंडा, स्लाइस, रिवाइव जैसे पेय पेप्सी ब्रांड के हैं वहीं, भारत में सबसे अधिक बिकने वाला सॉफ्ट ड्रिंक स्प्राइट, थम्सअप, फैंटा, माजा, मिनट मेड, लिमका आदि कोका कोला के ड्रिंक्स आते हैं।

कोई भी पेप्सी-कोला का वर्चस्व नहीं तोड़ पाया
ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में बेवरेज उत्पाद की लिस्ट में कोक की हिस्सेदारी लगभग 48 फीसदी है वहीं पेप्सी की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी की है। तीसरे नंबर पर रेडबुल लंबे समय से कायम जरूर है लेकिन वह सॉफ्ट डिंक्र की नहीं एनर्जी ड्रिंक के नाम पर बेची जाती है। पूरी दुनिया में ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जिसमें इन दोनों ही कंपनियों के वर्चस्व को तोड़ने की कोशिशें की गईं लेकिन अब तक कोई भी इसमें सफल नहीं हो पाईं। ऐसे में सवाल लाजिमी है कि क्या भारत के बाजार में मुकेश अंबानी कोई चमत्कार दिखा पाएंगे?

कैंपा कोला के लिए तैयार है बाजार
जो भी कंपनियां पेप्सी और कोकाकोला से टक्कर लेती हैं उन्हें लोगों तक अपने उत्पाद को पहुंचाने में, उनका खुद का नाम बनाने में ही काफी लागत खर्च हो जाता है। लेकिन मुकेश अंबानी के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। कैंपा कोला एक चर्चित नाम है। दरअसल कैंपा को खरीदना रिलायंस की एफएमसीजी बाजार में प्रवेश करने की रणनीति का हिस्सा है। जिसे कंपनी इस साल शुरू करने जा रही है। कैंपा कोला के स्वागत में एक बड़ा बाजार पहले से तैयार खड़ा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में रिलायंस इसे अपने रिटेल स्टोर्स, जियोमार्ट और किराना स्टोर्स में बेचेगी। एक बार बाजार मिल जाने के बाद लोगों तक इसकी पहुंच आसान हो जाएगी।

पेप्ली-कोला के खेल को खत्म कर सकते हैं अंबानी?
पूरी दुनिया में कोकाकोला, पेप्सी पर हावी है वहीं, भारत में लोग पेप्सी को कोकाकोला की तुलना में अधिक पसंद करते हैं। हालांकि पेप्सी के ओवरऑल उत्पादों की बात की जाए तो ये कोकाकोला से बेहद पीछे है। कोकाकोला के कुछ उत्पाद जैसे कि स्प्राइट, माजा और थम्स अप भारत में बेहद लोकप्रिय हैं। सॉफ्ट ड्रिंक्स के बाजार का इतिहास बाकी कंपनियों के लिए बेहद क्रूर रहा है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि रिलांयस इस क्षेत्र में उतरकर सफल नहीं हो सकती।

जियो ने बाकी कंपनियों का किया बोरिया बिस्तर किया गोल
एक वक्त था जब भारत में दूरसंचार क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक कंपनियां थीं। सभी कंपनियों के बीच कड़ी टक्कर चल रही थी। ऐसे वक्त में कोई यह सोच भी नहीं सकता था कि इस फील्ड में कोई नई कंपनी आकर शीर्ष पर पहुंच सकती है। इसी बीच एक दिन गाजे बाजे के साथ रिलायंस जियो इस क्षेत्र में कदम रखती है और बाकी सबचीजों को इतिहास का हिस्सा बनते हम देख चुके हैं कि कैसी इस बड़ी-बड़ी कंपनियों को या तो मैदान छोड़ना पड़ा या फिर मर्जर होकर टिकना पड़ा। अगर उस दौर से आज के दौर की तुलना की जाए तो पता चलता है कि कैसे सभी कंपनियां अपने भाव गिराकर ग्राहकों को सेवा उपलब्ध करा रही है।

आएगा सस्ते कोल्ड ड्रिंक का दौर
वहीं अगर सॉफ्ट ड्रिंक्स कंपनियों की बात की जाए तो यह जगजाहिर है कि इन पेय पदार्थों का निर्माण लागत बहुत कम है। इसकी कीमत अधिक होने की वजह मार्केटिंग पर हेतहाशा खर्च करना है। ऐसे में रिलांयस के सॉफ्ट ड्रिंक्स के मैदान में उतरने के बाद बाजार में प्राइस वार शुरू हो सकता है, जिसमें ग्राहकों को कम रेट पर कोल्ड ड्रिंक खरीदने को मिल सकती है। यह सॉफ्ट ड्रिंक्स के साम्राज्य पर राज करने वाली शीर्ष कंपनियां कोका कोला और पेप्सी के लिए दुखदायी साबित हो सकता है।
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