क्या Sakhalin-1 तेल प्रोजेक्ट में निवेश करेगा भारत? रूस के ऑफर पर मोदी सरकार का आया जवाब
भारतीय पेट्रोलियम मंत्री ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अधिकारियों के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि, "किसी भी स्तर पर हमें कभी भी रूसी तेल खरीदने से मना नहीं किया गया।"
India-Russia crude oil: सस्ते तेल के बाद रूस ने भारत को अपने तेल प्रोजेक्ट में निवेश करने का बड़ा ऑफर दिया है, जिसको लेकर अब भारत की तरफ से भी जवाब आ गया है। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि, भारत रूस के साथ एक "स्वस्थ संवाद" बनाए रखता है और सखालिन -1 तेल और गैस परियोजना पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि, तेल कंपनी में ऑनरशिप में परिवर्तन होने के बाद रूस की तरफ से क्या पेशकश की जाती है, उसपर भारत विचार करेगा।

रूस के ऑफर पर भारत का जवाब
रूस ने पिछले हफ्ते एक डिक्री जारी कर एक्सॉन मोबिल की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी को जब्त करने की अनुमति दी थी और फिर उसे एक रूस सरकार द्वारा संचालित कंपनी को यह तय करने का अधिकार दिया, कि क्या भारत के 'ओएनजीसी विदेश' सहित विदेशी शेयरधारक परियोजना में अपनी भागीदारी बरकरार रख सकते हैं। अमेरिका के टेक्सास के ह्यूस्टन में अमेरिकी तेल अधिकारियों के साथ बैठक के बाद भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि, "हम देखेंगे कि खेल की स्थिति क्या है और प्रस्ताव क्या है।" पुरी ने कहा कि, भारत पिछले हफ्ते ओपेक+ द्वारा तेल उत्पादन में 2 मिलियन बैरल प्रति दिन की कटौती करने पर सहमत होने के बाद तेल की कीमतों पर सऊदी अरब के एशिया प्रीमियम पर "सक्रिय रूप से निगरानी" कर रहा है।

तेल की कीमत बढ़ने से बढ़ेगी मुद्रास्फीति
वैश्विक ऊर्जा संतुलन और ओपेक+ फैसलों के "अनपेक्षित परिणामों" का जिक्र करते हुए भारठतीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि, "आखिरकार उपभोक्ता इस तरह की परिस्थितियों के विकसित होने पर भूमिका निभाना शुरू कर देते हैं।" उन्होंने कहा कि, बहुत अधिक तेल की कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की तरफ धकेल सकती हैं, जिससे तेल की मांग कम हो सकती है। रूसी तेल खरीद पर प्रस्तावित यूरोपीय संघ के प्राइस कैप को लेकर पुरी ने सुझाव दिया कि, यह अभी तक दृढ़ नहीं है। उन्होंने कहा कि, "यदि यूरोपीय एक योजना के साथ आते हैं, तो देखते हैं कि यह कैसे विकसित होता है।" पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने इस सप्ताह वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी ऊर्जा सचिव जेनिफर ग्रानहोम और ऊर्जा सुरक्षा सलाहकार अमोस होचस्टीन से मुलाकात की है, जहां उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के अलावा जैव ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग पर चर्चा की।

'रूसी तेल खरीदने से मना नहीं किया गया'
भारतीय पेट्रोलियम मंत्री ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अधिकारियों के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि, "किसी भी स्तर पर हमें कभी भी रूसी तेल खरीदने से मना नहीं किया गया।" वहीं, ह्यूस्टन में उन्होंने अपतटीय तेल और गैस एक्सप्लोरेशन एरिया के लिए बीडिंग शुरू करने के बाद एक्सॉन मोबिल, तेल क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी ह्यूजेस और तरलीकृत प्राकृतिक गैस उत्पादकों के अधिकारियों से मुलाकात की। पुरी ने कहा कि, भारत तेल रिफाइनरियों में अपतटीय उत्पादन, इथेनॉल और सल्फर रिकवरी में अमेरिकी कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता में रुचि रखता है। वहीं, हरित ऊर्जा प्राप्त करने की कोशिशों को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, "हरित ऊर्जा प्राप्त करने के लिए आपको वर्तमान में जीवित रहना होगा।" उन्होंने कहा कि, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया के साथ संयुक्त निवेश और भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति के लिए भी बातचीत चल रही है।

Sakhalin-1 तेल प्रोजेक्ट क्या है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सखालिन -1 तेल और गैस परियोजना के लिए एक नया ऑपरेटर स्थापित करने के लिए शुक्रवार को प्रकाशित एक डिक्री पर हस्ताक्षर किए हैं, जहां भारत के शेयर्स हैं। इस कंपनी में अभी तक यूएस एक्सॉन मोबिल की 30% हिस्सेदारी है और यही कंपनी इस वक्त रूस के सुदूर पूर्व में स्थापित सखालिन -1 का संचालक था। लेकिन, अब अमेरिकी कंपनी एक्सॉन मार्च महीने के बाद से रूस के अपना ऑपरेशन बंद कर बाहकर निकलने की कोशिश कर रहा है। वहीं, रूसी कंपनी रोसनेफ्ट, भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश, भारत की ओएनजीसी की विदेशी निवेश शाखा और जापान की सोडेको कंपनी भी इस परियोजना में भागीदार हैं। सखालिन 1 तेल और गैस परियोजना में भारत के ओएनजीसी विदेश की हिस्सेदारी साल 2001 से 20 प्रतिशत है।

पुतिन सरकार की डिक्री क्या है?
राष्ट्रपति पुतिन की डिक्री में कहा गया है कि, रूसी सरकार एक नई रूसी लिमिटेड कंपनी स्थापित कर रही है, जो एक्सॉन नेफ्टेगाज़ के ऑपरेटर के अधिकारों सहित निवेशकों के अधिकारों का मालिक होगा। डिक्री में कहा गया है कि, विदेशी साझेदारों को नई कंपनी की स्थापना के एक महीने के भीतर सरकार को आवेदन करना होगा, ताकि वह पिछली कंपनी में अपनी हिस्सेदारी के अनुसार नई इकाई में शेयर लेने के अपने समझौते के बारे में सूचित कर सके। रोसनेफ्ट की सहायक कंपनी सखालिनमोर्नफेटेगाज-शेल्फ को नई कंपनी के प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया है। पुतिन ने जुलाई में रूस के सुदूर पूर्व में एक अन्य गैस और तेल परियोजना, सखालिन -2 का पूर्ण नियंत्रण लेने के लिए एक डिक्री पर भी हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, जापान सखालिन-2 से तेल परियोजना से अभी भी तेल खरीद रहा है।












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