पाकिस्तान के लिए दमघोंटू साबित होगा IMF का $3 अरब का लाइफलाइन? जानिए कैसे

Pakistan-IMF Deal: पाकिस्तानी अखबार डॉन ने शुक्रवार को बताया है, कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान के साथ 3 अरब डॉलर की "स्टैंड-बाय व्यवस्था" पर "कर्मचारी-स्तरीय समझौते" पर पहुंच गया है।

पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच हुआ 3 अरब डॉलर का ये समझौता, आईएमएफ बोर्ड की अनुमति के बाद की गई है, जो निश्चित तौर पर पाकिस्तान को कुछ अस्थायी राहत प्रदान करेगा, जो गंभीर भुगतान संतुलन संकट और गिरते विदेशी मुद्रा भंडार से जूझ रहा है। पाकिस्तान सरकार ने इसका दिल से स्वागत किया है और प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है, कि यह सौदा "देश को सतत आर्थिक विकास के रास्ते पर ले जाएगा"।

Pakistan-IMF Deal

लेकिन, क्या वाकई ऐसा हो पाएगा? क्या 3 अरब डॉलर मिलने के बाद पाकिस्तान अपने आर्थिक स्थिति को संभाल पाएगा या फिर ये 3 अरब डॉलर का लाइफ लाइन, पाकिस्तान के लिए एंड गेम साबित होगा, आइये समझते हैं।

लाइफलाइन या एंडगेम?

आईएमएफ ने अपने एक बयान में कहा है, कि "नई स्टैंड-बाय व्यवस्था (एसबीए) अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के अधिकारियों के तत्काल प्रयासों का समर्थन करेगी... (और) बेहतर घरेलू राजस्व जुटाने और सावधानीपूर्वक खर्च करने के माध्यम से सामाजिक और विकास के लिए खर्च के लिए भी जगह बनाएगी।"

आईएमएफ के साथ हुआ यह सौदा पाकिस्तान के विस्तारित फंड सुविधा (ईएफएफ) कार्यक्रम के तहत नहीं आता है, जिसे देश ने 2019 में दर्ज किया था, और जो शुक्रवार (30 जून) को समाप्त हो गया है, बल्कि आईएमएफ के प्रेस वक्तव्य के अनुसार, एसबीए ईएफएफ के तहत प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।

ये प्वाइंट समझना काफी जरूरी है। दरअसल, आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच साल 2019 में 6.5 अरब डॉलर के कर्ज के लिए समझौता हुआ था, जिसकी एक ही किस्त मिलने के बाद पाकिस्तान की तत्कालीन इमरान खान की सरकार ने उस समझौते को तोड़ दिया। जिसके बाद आईएमएफ ने पाकिस्तान को कर्ज की बाकी किस्त देने पर रोक लगा दी। पिछले एक साल से शहबाज शरीफ की सरकार कर्ज की 1.1 अरब डॉलर की किस्त के लिए आएमएफ से बातचीत कर रही थी। 2019 में हुआ ये समझौता 30 जून 2023 को खत्म हो रहा था और आईएमएफ ने उस सौदे के तहत आखिरकार पाकिस्तान को लोन नहीं दिया।

बल्कि, पाकिस्तान को जो अभी 3 अरब डॉलर का लोन मिला है, वो "नई स्टैंड-बाय व्यवस्था (एसबीए)" के तहत दिया गया है, जिसका लॉकिंग पीरियड 12 से 18 महीनों के लिए है। यानि, पाकिस्तान को ये कर्ज अगले डेढ़ साल के भीतर आईएमएफ को वापस करने हैं और यहीं से ये लोन, पाकिस्तान के लिए दमघोंटू बन जाता है।

तो IMF-पाकिस्तान डील की शर्तें क्या हैं?

एसबीए के तहत आईएमएफ अगले 9 महीनों में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर उपलब्ध कराएगा। 28 जून को डॉन की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि पाकिस्तान और आईएमएफ 2.5 अरब डॉलर के स्टैंड-बाय समझौते पर विचार कर रहे हैं।

हालाँकि, इस सौदे में कुछ प्रमुख शर्तें जुड़ी हुई हैं, वे मुद्दे जो पहले आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत में एक महत्वपूर्ण प्वाइंट थे। अपनी प्रेस विज्ञप्ति में, आईएमएफ ने कहा कि "पाकिस्तान के अधिकारी आने वाले समय में टैक्स छूट ना दे।"

प्रेस रिलीज में आईएमएफ ने पाकिस्तान के बिजली क्षेत्र का जिक्र किया है। पाकिस्तानी उपभोक्ताओं के लिए बिजली पर ऐतिहासिक रूप से भारी सब्सिडी दी जाती रही है, और यह इस सौदे के साथ समाप्त होने जा रही है। यानि, अब पाकस्तान में बिजली की कीमत में बेतहाशा इजाफा होना तय है।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ ने यह सुनिश्चित करने के लिए टैरिफ के "समय पर" पुनर्मूल्यांकन का आह्वान किया है, कि बिजली बिलों की वसूली हो। जिसका मतलब ये होगा, कि जिस पाकिस्तान में महंगाई पहले से ही आसमान छू रही है, वहां पर बिजली बिल में भारी इजाफा, लोगों के लिए दम घोंटने वाला होगा।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में ही कहा गया है, कि पाकिस्तान के सेन्ट्रल बैंक में विदेशी मुद्रा भंडार काफी तेजी से घट रहा है और लिहाजा बाहरी भुगतान को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए आयात प्रतिबंधों को भी हटाना होगा। रॉयटर्स के अनुसार, वर्तमान में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 3.5 अरब डॉलर है, जो मुश्किल से एक महीने के नियंत्रित आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

वर्तमान में, पाकिस्तान में विभिन्न बाजारों में कई नियंत्रण और विनिमय दर प्रथाएं हैं। आईएमएफ ने इन्हें पूरी तरह से बाजार-निर्धारित विनिमय दर के साथ समाप्त करने का निर्देश दिया है, जबकि पाकिस्तानी रुपया हाल के हफ्तों में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। लिहाजा, इस सौदे से केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में और बढ़ोतरी की भी संभावना है। पाकिस्तान सेन्ट्रल बैंक का फिलहाल ब्याज दर रिकॉर्ड 22 प्रतिशत है।

क्या 3 अरब डॉलर से संकट का होगा समाधान?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ के उम्मीद से ज्यादा बड़े राहत पैकेज के बावजूद, समझौते में इस बात पर जोर दिया गया है, कि पाकिस्तान को बहुपक्षीय और द्विपक्षीय वित्तीय सहायता जुटाना जारी रखना होगा।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को वित्तीय वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय ऋण सेवा सहित अपने बाहरी भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए 22 अरब डॉलर की आवश्यकता है, जो आज, यानि 1 जुलाई से शुरू हो रहा है और 30 जून 2024 को समाप्त होता है।

संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की सहायता देने का वादा किया है और आईएमएफ समझौता होने के बाद अब धनराशि आने की उम्मीद है। चीन, पाकिस्तान का सबसे बड़ा ऋणदाता है और वहां से भी ऋण रोलओवर में उसकी सहायता के लिए आने की उम्मीद है। लेकिन, क्या पाकिस्तान 22 अरब डॉलर जुटा पाएगा? जवाब है नहीं... लिहाजा एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान फिलहाल बचा लिया गया है, लेकिन कब तक के लिए, कहा नहीं जा सकता है।

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