क्या अब भारतीय चुनावों को प्रभावित कर पाएगी फ़ेसबुक?

फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने बीते मंगलवार को अमरीकी सीनेट के सामने पेश होकर बताया है कि फ़ेसबुक भविष्य में दुनियाभर में होने वाले चुनावों में मतदाताओं को उनकी जानकारी के बिना प्रभावित किए जाने से रोकने के लिए क्या क़दम उठा रही है.
ज़करबर्ग ने बताया है, "भारत, ब्राज़ील, पाकिस्तान और हंगरी समेत दुनिया भर में अहम चुनाव होने वाले हैं. हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम इन चुनावों की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी संभव क़दम उठाएं. मुझे विश्वास है कि हम इस समस्या का समाधान करने जा रहे हैं."
ऐसे में सवाल ये है कि फ़ेसबुक ऐसा क्या करने जा रहा है जिससे भारतीय आम चुनाव का हाल अमरीका के हालिया राष्ट्रपति चुनाव जैसा न हो.
इस चुनाव में रूसी तत्वों ने लाखों अमरीकी फ़ेसबुक यूज़र्स तक पहुंचने वाले राजनीतिक विज्ञापन जारी किए.
भारत के चुनावों पर क्या बोले ज़करबर्ग?
फ़ेसबुक ने इस हफ़्ते से 5.5 लाख भारतीय यूज़र्स को सूचना देना शुरू कर दिया है कि उनका डेटा ब्रितानी राजनीतिक कंसल्टिंग फर्म कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा इस्तेमाल किए जाने की संभावना है.
ये वो कंपनी थी जो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान से जुड़ी थी. कंपनी का दावा था कि इसने ट्रंप के चुनाव अभियान में एक अहम भूमिका निभाई थी.
इस कंपनी ने कथित तौर पर भारत में कांग्रेस और बीजेपी को अपनी सेवाएं देने की कोशिश और उनके लिए रिसर्च करने का काम किया है.
हालांकि, अब तक किसी राजनीतिक पार्टी के हित में व्यक्तिगत जानकारियों के ग़लत प्रयोग से जुड़े प्रमाण सामने नहीं आए हैं.
क्या मोदी को पीएम बनाने में फ़ेसबुक ने की थी मदद?
साल 2019 में होने वाले अगले आम चुनाव तक 50 करोड़ भारतीय नागरिकों के फ़ेसबुक इस्तेमाल करने की संभावना हैं.
ऐसे में इंटरनेट की मदद से मतदाताओं के बीच राजनीतिक संदेश फैलाने और उन्हें प्रभावित करने की संभावना बहुत ज़्यादा है.
भारत में फ़ेसबुक इस्तेमाल करने वाले लोग अमरीका या किसी दूसरे देश के मुक़ाबले ज़्यादा हैं.
ऐसे में फ़ेसबुक पर इस बात का दबाव है कि ये अपना सिस्टम इतना दुरुस्त करे कि विदेशी एजेंसियां और फ़ेक अकाउंट अमरीकी चुनाव की तरह यहां भी फ़ेसबुक का ग़लत इस्तेमाल न कर सकें.
फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने अमरीकी सीनेट के सामने पहले से तैयार किए गए बयान को पढ़ते हुए फ़ेसबुक के आगामी क़दमों की जानकारी दी.
- फ़ेसबुक फ़ेक अकाउंट को हटाने और राजनीतिक अकाउंट्स को वैरिफाई करने के लिए हज़ारों लोगों की भर्ती करेगी
- किसी भी विज्ञापनदाता की पहचान वैरिफाई करना, राजनीतिक और किसी मुद्दे पर विज्ञापन चलाने वाले पेज को वैरिफाई करना
- फ़ेसबुक दिखाएगा कि किसी भी राजनीतिक विज्ञापन के लिए किसने पैसे दिए
- फ़ेक अकाउंट की पहचान के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग को बढ़ाएगा
- उन रूसी अकाउंट्स को बंद किया जाएगा जो फ़ेक न्यूज़ और राजनीतिक विज्ञापनों को चला रहे थे
राजनीति के लिए बेअसर हुआ फ़ेसबुक?
क्या इसका ये मतलब है कि अब फ़ेसबुक भारत में राजनीतिक पार्टियों के लिए आगामी चुनावों में प्रचार करने का मुख्य जरिया नहीं रहेगा?
इस सवाल का जवाब ना में है क्योंकि फ़ेसबुक पर वायरल होने वाले ज़्यादातर वीडियोज़ पर किसी ना किसी पार्टी की छाप होती है.
हर पार्टी अभी भी फ़ेसबुक पर अपने समर्थकों में राजनीतिक संदेश फैला सकती है जो कि पूरी तरह से क़ानूनी भी होगा.
फ़ेसबुक में बदलाव का राजनीतिकों को फ़ायदा
फ़ेसबुक की न्यूज़ फीड में आए हालिया बदलाव का फ़ायदा राजनीतिक पार्टियों को मिलने की संभावना है.
इस बदलाव के तहत ज़्यादा शेयर किया जाना वाल कंटेंट दूसरे फ़ेसबुक यूज़र्स की टाइमलाइन पर ज़्यादा दिखाई देगा.
राजनीतिक पार्टियों द्वारा जारी सामग्री के साथ भी ऐसा ही होता है क्योंकि उनके समर्थक उनकी पार्टी की तरफ से आई सामग्री को ज़्यादा शेयर करते हैं.
इस तरह ये बदलाव राजनीतिक पार्टियों को लाभ पहुंचा सकता है.
फ़ेसबुक पर बात वॉट्सऐप पर नहीं
फ़ेसबुक ने अख़बारों की सुर्ख़ियों में जगह बनाई है लेकिन ज़करबर्ग अपनी दूसरी कंपनी वॉट्सऐप के असर को लेकर काफ़ी शांत हैं.
वॉट्सऐप पर आने वाले वायरल मैसेज़ और वीडियो को सबसे पहले भेजने वाले के बारे में जानकारी हासिल करने का अभी भी कोई रास्ता नहीं है.
इस प्लेटफॉर्म पर फ़ेक न्यूज़ फैलाना बेहद आसान है और उसकी पहचान, रिपोर्टिंग और रोकथाम बेहद मुश्किल है.
भारत में इस प्लेटफ़ॉर्म के इस्तेमाल से कई बार घातक परिणाम सामने आ चुके हैं. कई बार झूठी अफ़वाहों की वजह से सांप्रदायिक हिंसा और सामुहिक हत्याएं तक हो चुकी हैं.
इस साल फ़ेसबुक पर इस समस्या का समाधान देने का दवाब बनाया जाएगा. और ये कोई संयोग नहीं है कि वॉट्सऐप इसी समय भारत में अपना कार्यकारी अधिकारी चुनने की प्रक्रिया में है.
ज़करबर्ग ने कहा कि उनकी कंपनी फ़ेसबुक रूस के साथ हथियारों की रेस में थी ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाले चुनावों में रूस फ़ेसबुक का ग़लत इस्तेमाल करके विदेशी चुनावों को प्रभावित न कर सके.
भारत के चुनावों पर क्या बोले ज़करबर्ग?
फ़ेसबुक कॉन्टैक्ट नंबर ही नहीं आपके निजी मैसेज भी पढ़ता है!












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