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शी जिनपिंग ने चीनी सेना PLA का डायरेक्ट कंट्रोल अपनी हाथों में लिया, SSF खत्म... किस मिशन पर चीनी राष्ट्रपति?

China News: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 19 अप्रैल को चीन के स्ट्रैटजिक सपोर्ट फोर्स (SSF) को भंग कर तीन समानांतर डिवीजन बना दिए हैं, जो अब सीधे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) को रिपोर्ट करेंगे, जिसके प्रमुख वो खुद हैं। शी जिनपिंग के इस फैसले का मतलब है, कि चीन की सेना का कमान अब सीधे उनकी हाथों में आ गया है, जो देश की राजनीति में उनके 100 फीसदी कंट्रोल का इशारा है।

शी जिनपिंग ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद धीरे धीरे कम्युनिस्ट पार्टी के तमाम अपने विरोधी नेताओं का सफाया करना शुरू किया और 'शंघाई गैंग' को इतना कमजोर कर दिया है, कि उसके ज्यादातर नेता या तो राजनीति छोड़ने के लिए मजबूर हो गये, या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद कर दिए गये।

Xi Jinping Has Taken Direct Control Of china s Military

शी जिनपिंग ने अब इन्फॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स (ISF) नाम से एक नई शाखा बनाई है और 2015 में बनाई गई स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स के अंदर आने वाली एयरोस्पेस और साइबर इकाइयां, अब ISF के समानांतर होंगी। इसके अलावा, अब समाप्त किए जा चुके SSF के राजनीतिक आयुक्त ली वेई, ISF के साथ वही भूमिका निभाएंगे। जैसी भूमिका वो SSF के साथ निभा रहे थे।

वहीं, स्ट्रैटजिक सपोर्ट फोर्स के पिछले कमांडर जनरल जू कियानशेंग लापता हो चुके हैं और अब वो कहां है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। ये कुछ ऐसा ही है, जैसे चीन के पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग और रक्षा मंत्री ली शांगफू अपने पद पर रहते हुए गायब हो गये। ये दोनों भी पिछले डेढ़ साल से लापता है, जिसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।

Xi Jinping Has Taken Direct Control Of china s Military

सेना में किस तरह का बदलाव किया गया?

चायनीज पीपुल्स पार्टी अब नये सिस्टम के साथ काम करेगी, जिसकी चार सर्विस है.. 1- जमीनी सेना, 2- वायु सेना, 3- नौसेना और 4- रॉकेट फोर्स (परमाणु हथियारों के लिए)। वहीं, अब पीएलए के चार अंग कर दिए गये है- 1- एयरोस्पेस फोर्स, 2- साइबरस्पेस फोर्स, 3- इन्फॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स (ISF) और 4- ज्वाइंट लॉजिस्टिक फोर्स।

और ये सभी अंग डायरेक्ट सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के अधीन होंगी, जिसके अध्यक्ष शी जिनपिंग हैं।

लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर शी जिनपिंग ने सेना का पूर्ण नियंत्रण अपनी हाथों में क्यों ले लिया है? और क्या ऐसा करने के बाद अब चीन में कोई भी शी जिनपिंग का विरोधी नहीं होगा और सबसे अहम सवाल, क्या कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना का कंट्रोल अब सिर्फ एक आदमी के पास ही रहेगा?

सेना का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के शी जिनपिंग के फैसले ने कई लोगों को हैरान कर दिया है। लेकिन, आइये जानते हैं, वो चार वजहें, कि आखिर श जिनपिंग ने ये फैसला क्यों किया है?

1- माना जाता है, कि शी जिनपिंग इस बात से नाखुश थे, कि पिछले साल अमेरिका ने चीनी निगरानी गुब्बारे को कैसे मार गिराया था। उनके लिए उन्होंने खुफिया नाकामी और SSF के भीतर विभिन्न डिवीजनों में तालमेल की कमी को जिम्मेदार माना है। इसलिए माना जा रहा है, कि उन्होंने SSF के पुनर्गठन का फैसला किया है और इसे खत्म ही कर दिया है।

2- ऐसा कहा जाता है, कि SSF अत्याधुनिक तकनीक पर बहुत ज्यादा निर्भर है और पिछले दो सालों में अमेरिका ने लगातार चीन की टेक्नोलॉजी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसकी वजह से CCS को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। जिसकी वजह से शी जिनपिंग ने 'मिलिट्री-सिविलयन गठबंधन' को खत्म करने का फैसला किया है। ऐसा कहा जाता है, कि चीन की सेना में उपयोग की जाने वाली 80 प्रतिशत से ज्यादा टेक्नोलॉजी नागरिक क्षेत्रों से आती हैं। इस प्रकार देखा जाए तो, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना संचालन को अलग करना कुछ हद तक इस संलयन को छिपाने की दिशा में एक कदम हो सकता है। बेशक, इसकी सफलता देखने वाली बात होगी।

3- SSF अभी तक स्वतंत्र फैसले लेता था, लिहाजा शी जिनपिंग के मन में SSF को लेकर अविश्वास काफी बढ़ गया था और उन्होंने लगातार SSF के अंदर फैले भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाना शुरू कर दिया था। चीन में जो भी भ्रष्टाचार की जांच के जद में आता है, वो खत्म कर दिया जाता है। और SSF के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जू गैंशेंग अभी भी लापता हैं। चीन में ऐसी अफवाह उड़ाई गई है, कि वह सैन्य खरीद धोखाधड़ी में शामिल थे। और शी जिनपिंग का कहना है, कि सैन्य अधिकारियों और डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के बीच एक सांठगांठ बन गई है, जिसे वो खत्म कर रहे हैं। ये एक ऐसा अभ्यास है, जिसके परिणामस्वरूप 2023 से पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू सार्वजनिक रूप से गायब हो गए हैं।

4- शी जिनपिंग ने सेना में जो नये बदलाव किए हैं, उसमें कमांडर स्तर के सभी लेयर्स खत्म कर दिए हैं उन जगहों पर अपने विश्वासपात्रों को बिठा दिया है और ये विश्वासपात्र सेना अंदर होने वाली तमाम गतिविधियों की जानकारी शी जिनपिंग को देते हैं।

जैसे पीएलए के ताजा बयान में कहा गया है, कि "ISF को पूर्ण निष्ठा, पवित्रता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए पार्टी के आदेश का दृढ़ता से पालन करना चाहिए। इसे युद्ध संचालन के लिए मजबूत समर्थन प्रदान करना चाहिए, सेना की समग्र संयुक्त परिचालन प्रणाली में गहराई से एकीकृत होना चाहिए, और सभी दिशाओं और डोमेन में सैन्य संचालन की सेवा और गारंटी के लिए सटीक और कुशलतापूर्वक सूचना समर्थन प्रदान करना चाहिए।"

निष्ठा, पवित्रता और पार्टी कमांड जैसे शब्दों का इस्तेमाल शी जिनपिंग के पूर्ण नियंत्रण और छोटे और छोटे सैन्य संगठनों के साथ उनके सीधे संपर्क के साथ अच्छी तरह से फिट बैठता है, जिसका वह 2015 के सुधारों के बाद से समर्थन कर रहे हैं, जिसका मकसद कमांड की परतों को काटना है।

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